विश्व दीपक-
तीसरी दुनिया के चौथे दर्जे के देश भारत को ठगने की कहानी जब आंकड़ों में लिखी जायेगी तो उसका स्वरूप कुछ ऐसा ही होगा. पढ़कर देखिए. अगर सवाल करने की क्षमता बची हो तो सवाल भी कीजिए कि महामानव मोदी के अवतरण से भारत को कितना फायदा हुआ? खामोशी के साथ डॉक्टर मनमोहन सिंह खिचड़ी सरकार के भरोसे भारत के लिए जो कर गए, उसका दशांश भी मोदी जी इतिहास की सबसे सशक्त सरकार चलाकर नहीं कर पाए. मनमोहन सिंह ने कहा था कि आने वाला वक्त उनके लिए ज्यादा उदार होगा. 12 साल के अंदर ही वक्त की चाल बदल गई. मोदी जी के प्रति, इतिहास का रुख आने वाले वक्त में बहुत रुखा होने वाला है. हाल ही में जंतर-मंतर पर उसकी एक झलक दुनिया ने देख ली है. अभी बहुत कुछ देखना बाकी है.
नई दिल्ली। भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को लेकर 2014 से पहले और बाद की तुलना अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती है। सामने दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कई प्रमुख क्षेत्रों में 2004-14 के दौरान हुई प्रगति का हिस्सा 2014 के बाद की तुलना में काफी बड़ा रहा।
ग्राफ में World Bank, RBI, TRAI, DPIIT, SIAM, UNDP, NITI Aayog और अन्य सरकारी/आधिकारिक स्रोतों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
- ग्रामीण वास्तविक मजदूरी: 2004-14 में सालाना औसत वृद्धि 6.8%, जबकि 2014-26 में 1.3% गिरावट दिखाई गई है।
- इंटरनेट सब्सक्राइबर: 4.6 करोड़ से बढ़कर 25.2 करोड़ यानी 5,429% वृद्धि 2004-14 में हुई। 2014-26 में यह आंकड़ा 1.09 अरब तक पहुंचा।
- माल निर्यात: 64 अरब डॉलर से बढ़कर 314 अरब डॉलर यानी 393% वृद्धि 2004-14 में हुई, जबकि 2014-26 में वृद्धि 41% दिखाई गई है।
- FDI: सालाना विदेशी निवेश 4.3 अरब डॉलर से बढ़कर 36 अरब डॉलर यानी 734% वृद्धि 2004-14 में हुई। 2014-26 में यह 95 अरब डॉलर तक पहुंचा।
- दो-पहिया वाहनों की बिक्री: 5.4 करोड़ से बढ़कर 14.8 करोड़, यानी 176% वृद्धि।
- सेवा निर्यात: 27 अरब डॉलर से बढ़कर 152 अरब डॉलर यानी 464% वृद्धि।
- प्रति व्यक्ति आय: 625 डॉलर से बढ़कर 1,550 डॉलर यानी 149% वृद्धि।
- गरीबी से बाहर आए लोग: 2004-14 में करीब 27.1 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए, जबकि 2014-26 के लिए आंकड़ा 13.5 करोड़ बताया गया है।
- GDP: मौजूदा डॉलर में 0.7 ट्रिलियन से बढ़कर 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 188% वृद्धि 2004-14 में हुई।
- विदेशी मुद्रा भंडार: 113 अरब डॉलर से बढ़कर 304 अरब डॉलर यानी 169% वृद्धि।
- औसत वास्तविक GDP ग्रोथ: 2004-14 में 6.8% सालाना, जबकि 2014-26 में 6.2% सालाना।
ग्राफ के मुताबिक, कई संकेतकों में 2004-14 के दौरान हुई वृद्धि बाद के दौर की तुलना में ज्यादा तेज रही। हालांकि, इन अवधियों की सीधी तुलना करते समय अलग-अलग अवधि की लंबाई, आर्थिक परिस्थितियों और इस्तेमाल किए गए संकेतकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
साफ शब्दों में कहें तो आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि भारत की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक प्रगति की नींव कितनी हद तक 2014 से पहले ही तैयार हो चुकी थी।


