सुजीत सिंह प्रिंस-
लखनऊ/प्रयागराज — उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में जारी आदेशों और नीतियों में जहां नियुक्ति विभाग ने मेरिट बेस्ड ट्रांसफर की स्पष्ट व्यवस्था की है, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी वरिष्ठता सूची (सीनियरिटी लिस्ट) के आधार पर तबादले करने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति विभाग की ट्रांसफर गाइडलाइंस (दिनांक 06.05.2025) में स्पष्ट निर्देश हैं कि समूह ख अधिकारियों की तैनाती मेरिट बेस्ड ट्रांसफर मेरिट आधारित मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर की जाए। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी इस प्रक्रिया को नजरअंदाज़ करते हुए पुराने सीनियरिटी सिस्टम को तरजीह दे रहे हैं।



इससे पहले वर्ष 2024 में भी इसी प्रकार के ट्रांसफर विवाद ने तूल पकड़ा था, जिसकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री तक पहुँची थी। अब एक बार फिर से तबादलों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
2024 के ट्रांसफर के बाद एक आरटीआई कार्यकर्ता सत्यनारायण सिंह द्वारा लिखित पत्र में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि बेसिक शिक्षा विभाग के भीतर तबादलों में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने पत्र में दावा किया था कि एक BSA पद के लिए 20 लाख रुपये तक की डीलिंग हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने अब सख्ती नहीं दिखाई, तो 2027 में जनता इसका जवाब देगी।
पत्र में यह भी कहा गया था कि कुछ बीएसए अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय से नकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद तैनात किया जा रहा है, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि तबादलों में पारदर्शिता के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रमुख बिंदु:
• नियुक्ति विभाग की गाइडलाइन में मेरिट आधारित तबादलों की बात, लेकिन विभागीय अधिकारी सीनियरिटी को तरजीह दे रहे।
• पिछले वर्षों में भी ट्रांसफर नीति में अनियमितताओं की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँची थी।
• 2024 में आरटीआई कार्यकर्ता ने सीएम को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए था ।
• शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर पैसे लेकर तैनाती कराने के आरोप लगाया था ।
मांग की जा रही है कि बेसिक शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर पूरी पारदर्शिता रखी जाए और मेरिट आधारित चयन प्रणाली का पालन किया जाए, ताकि योग्य और ईमानदार अधिकारियों को नेतृत्व का मौका मिल सके।


