
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार 26 नवंबर 2025 को ‘भारत एक्सप्रेस’ न्यूज़ नेटवर्क के बैनर तले आयोजित ‘बज्म-ए-सहाफत’ उर्दू कॉन्क्लेव ने देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब का दर्शन कराया. दिल्ली सरकार के सहयोग से दिल्ली के उर्दू अकादमी में हुए इस भव्य कार्यक्रम में सियासत, साहित्य और मीडिया जगत की हस्तियों ने शिरकत की. कॉन्क्लेव का मुख्य फोकस उर्दू भाषा के सांस्कृतिक महत्व और देश के विकास में इसकी भूमिका पर रहा.
इस कार्यक्रम में ‘भारत एक्सप्रेस’ के एडिटर-इन-चीफ और सीएमडी उपेंद्र राय ने अपने संबोधन में उर्दू को किसी एक पंथ या मजहब की भाषा मानने की अवधारणा को खारिज करते हुए इसे ‘गहरी विरासत और रिच कल्चर’ की जुबान बताया. कॉन्क्लेव में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के लिए एक बड़ा विजन पेश करते हुए 1100 ‘आरोग्य मंदिर’ बनाने की घोषणा की. वहीं, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने उर्दू को ‘बहुत मिठास वाली भाषा’ बताते हुए इसे आगे बढ़ाने के लिए एनडीए सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया.
मिली-जुली संस्कृति का केंद्र रही दिल्ली: CM रेखा गुप्ता
उर्दू कॉन्क्लेव के मंच से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए अपनी सरकार का व्यापक विजन प्रस्तुत किया. उन्होंने ‘भारत एक्सप्रेस’ के CMD उपेंद्र राय से बातचीत में साफ तौर पर अपनी प्राथमिकताएं बताईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली हमेशा से ही एक मिली-जुली संस्कृति का केंद्र रही है, और उनकी सरकार इस ऐतिहासिक पहचान को और सशक्त बनाएगी. उन्होंने घोषणा की, “दिल्ली में गंगा-जमुनी संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे,” जिससे राजधानी की समावेशी पहचान मजबूत हो सके. उन्होंने हर भाषा और समुदाय को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता जताई.
1100 ‘आरोग्य मंदिर’ बनवाएंगी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोगों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण ऐलान किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली के हर नागरिक को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए, दिल्ली में आरोग्य मंदिर बनवाए जा रहे हैं. अबतक 250 आरोग्य मंदिर जनता को समर्पित कर दिए गए हैं. आने वाले समय में 1100 आरोग्य मंदिर बना देंगे. इससे हर विधानसभा में 15 आरोग्य मंदिर होंगे.
‘उर्दू विरासत की भाषा, मजहब की नहीं’: CMD उपेंद्र राय
‘भारत एक्सप्रेस’ न्यूज़ नेटवर्क के सीएमडी और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय का संबोधन इस कॉन्क्लेव का केंद्र बिंदु रहा. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “उर्दू किसी एक मजहब की नहीं, विरासत की भाषा है.” उन्होंने उर्दू के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उर्दू वह जुबान है जो इस दुनिया के कारोबार को बढ़ाने वाले और नई खोज में निकले साहसी लोगों, यानी लश्कर के बीच पनपी. उन्होंने कहा कि इसका पहला नाम ‘यूरतु’ था, जिससे टूटकर यह बाद में ‘उर्दू’ शब्द के रूप में सामने आया. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह किसी एक देश, जुबान, या धर्म की नहीं रही, बल्कि उन लोगों की भाषा बनी जो मिलकर कुछ ढूंढने और बनाने निकले थे.


उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आमतौर पर एक माहौल बन गया है कि उर्दू बोलने वाला एक अलग सेक्टर को रिप्रेजेंट करता है, जो कि सत्य नहीं है. “उर्दू एक बहुत ही गहरी विरासत को और एक बहुत ही रिच कल्चर को रिप्रेजेंट करता है.”
‘गहरा रहा है मीडिया और उर्दू का रिश्ता’
सीएमडी उपेंद्र राय ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने सहारा न्यूज़ नेटवर्क का कार्यभार संभाला था, तब उनका उर्दू से गहरा जुड़ाव रहा. उन्होंने बताया कि उस समय 11 शहरों से उर्दू अखबार निकलते थे, जबकि हिंदी के केवल 7 अखबार थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने सुनिश्चित किया कि उर्दू टीम खुश होकर काम करे, हालांकि उन्हें मलाल है कि वह उर्दू लिखना नहीं सीख पाए.
‘ज्ञान, पूंजी और विश्वगुरु भारत का विजन’
सीएमडी उपेंद्र राय ने अपने संबोधन में उर्दू से आगे बढ़कर देश के युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत को पहचानने का आह्वान किया. उन्होंने भारतीय ज्ञान, गणित और विज्ञान की श्रेष्ठता को याद दिलाया. उन्होंने कहा कि भारत ने बुद्ध, कृष्ण, राम, कणाद, विश्वामित्र और अगस्त्य जैसे ऋषि-मनीषी दिए और ज्ञान की उन उच्चतम शिखरों को छुआ, जिसके बारे में सोचना भी पश्चिमी देशों के लिए मुश्किल है.
‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’
सीएमडी उपेंद्र राय ने आज की महाशक्तियों के संदर्भ में पूंजी और धन के महत्व पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने उन ‘पोगा पंडितों’ की मानसिकता का पुरजोर विरोध किया, जिन्होंने देश में यह फैला दिया कि ‘धन-वैभव यह सब मोह माया है’. उन्होंने तर्क दिया कि आज अमेरिका सिर्फ दो कारणों से महाशक्ति है: दुनिया में सबसे ज्यादा पूंजी की उपलब्धता, जिसकी 30 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी है और पूंजी के दम पर उसकी शक्ति.
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस पुरानी मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी शक्ति और पूंजी को पहचानें. उन्होंने अल्लामा इकबाल का शेर भी दोहराया: “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा.”
दिल्ली सरकार के विजन की सराहना
सीएमडी उपेंद्र राय ने अपने संबोधन के दौरान दिल्ली सरकार के विजन की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि नई सरकार रफ्तार के साथ काम कर रही है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की दिल्ली के लिए व्यापक सोच की सराहना की. उन्होंने मंत्री कपिल मिश्रा के विजन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह हमेशा नई चीजों को प्रोत्साहित करते हैं, और पंजाब में आई बाढ़ के दौरान भी कपिल मिश्रा ने आगे बढ़कर कोऑर्डिनेट किया.
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी CMD उपेंद्र राय के विजन को सुना और उन्हें उर्दू कॉन्क्लेव के सफल आयोजन के लिए खुलकर मुबारकबाद दी.
उर्दू कॉन्क्लेव में इन हस्तियों की उपस्थिति रही
‘बज्म-ए-सहाफत’ उर्दू कॉन्क्लेव में विशेष अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और भारत एक्सप्रेस के एडिटर-इन-चीफ और सीएमडी उपेंद्र राय ने शिरकत की. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले भी कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने अपने विचार रखे. इनके अलावा, बिहार में बड़ी जीत हासिल करने वाले बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन, प्रसिद्ध प्रोफेसर और पद्मश्री डॉ. अख्तर-उल-वासई, आईएएस ऑफिसर एवं आकांक्षा समिति की अध्यक्ष रश्मि सिंह, समेत बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी, लेखक, शिक्षक और उर्दू प्रेमी मौजूद रहे. इस कॉन्क्लेव का आयोजन संविधान दिवस के अवसर पर किया गया, जिसने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया.


