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सियासत

यह न केवल भारत की सामरिक छवि बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की साख को भी प्रभावित करता है!

वैभव अग्रवाल-

आज सुबह से मन काफी व्यथित था। जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने, इतनी करारी हार के बावजूद, बेशर्मी से राष्ट्र के नाम संबोधन कर ‘पाकिस्तान की जीत’ की घोषणा कर दी तो भीतर से और भी आक्रोश हुआ।

अमेरिका में होने के कारण कुछ रिपोर्ट्स पढ़ने को मिलीं। एक विश्वसनीय सूत्र के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जिन्होंने एक दिन पहले ही स्पष्ट कहा था कि भारत-पाकिस्तान विवाद से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है, उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संपर्क कर सीज़फायर पर सहमति के लिए आग्रह किया। यह कदम किसी क्रेडिबल इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर उठाया गया था, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।

संभावना है कि यह इनपुट चीन द्वारा दूसरे मोर्चे पर कोई सैन्य तैयारी, या किसी अन्य संवेदनशील खतरे से संबंधित हो। अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश सचिव रूबियो, जो पाकिस्तान-विरोधी माने जाते हैं, द्वारा इस तरह का कदम उठाया जाना भी कुछ गंभीर संकेत देता है।

जो भी कारण रहे हों, आज की स्थिति हर भारतीय के लिए पीड़ादायक है। यह न केवल भारत की सामरिक छवि बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की साख को भी प्रभावित करता है। हालांकि, आम जनता के रूप में हम पूर्ण सच्चाई से अवगत नहीं हो सकते , वो तो केवल उच्च स्तर के लोग ही जानते हैं।

इस कठिन घड़ी में, एक राष्ट्रभक्त नागरिक होने के नाते, हमें अपनी सरकार पर विश्वास रखना चाहिए।

हमें आशा करनी चाहिए कि निकट भविष्य में कुछ ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे, ताकि आतंकवाद की इस प्रयोगशाला का अंत हो सके और भारत की गरिमा फिर से दृढ़ हो।

जय हिंद।

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