Connect with us

Hi, what are you looking for?

सियासत

भाजपा अपनी छवि के मामले में पिछले 14 साल के न्यूनतम पर है!

Portrait of a man wearing glasses and a maroon shirt, smiling, against a purple backdrop with Hindi text.

राजीव रंजन झा-

भाजपा अपनी छवि के मामले में पिछले 14 साल के न्यूनतम पर है, और इसके लिए जिम्मेदार वह स्वयं है।

भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने से हिचक – कहीं डर कि हाय राम कहीं जनता में सहानुभूति न जग जाये जेल भिजवाने पर। कहीं भ्रष्टों को अपने साथ लाकर अपनी शक्ति बढ़ाने का लालच। जिन लोगों को भ्रष्टाचार की कालिख के चलते कांग्रेसी होने पर शर्म आने लगी थी, वे आज फिर से सीना चौड़ा कर कांग्रेस के राज-परिवार का इतिहास बखान रहे हैं।

रामद्रोहियों को सम्मान – रामभक्तों की सामूहिक हत्या करवाने वाले को भारत रत्न देने से बस एक कदम पीछे ही रह गये! रामद्रोहियों के विरुद्ध हर तर्क वहीं जाकर भोथरा हो जाता है कि पद्मविभूषण क्यों दिया फिर?

समरसता का सूत्र भूल कर खुद मंडल राजनीति का सूत्रधार बनने की सनक – संघ-भाजपा के 3-4 दशक पुराने कार्यकर्ताओं को समरसता का सूत्र पता था, उन्हें यही मालूम था कि हमें बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण हिंदू समाज को जोड़ना है। पर कमंडल की शक्ति पर विश्वास न कर ये मंडल के भूत से डरते रहे और स्वयं को ही मंडलवादी साबित करने में लगे रहे। नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है की तर्ज पर ये साबित करने में जुट गये कि हमसे बड़ा मंडलवादी कौन! मंडलवादी जो कर सकते थे, उससे ज्यादा विभाजनकारी नीतियों पर मुहर लगायी।

सत्ता काजल की कोठरी – स्वयं को भ्रष्टाचार से एकदम दूर, निष्कलंक रखने का जो विशेष प्रयास 2014 के बाद से शुरुआती वर्षों में दिखा था, वह बाद में कहीं प्रभावहीन होने लगा। शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं टिके, पर शेष मंत्रिमंडल के लिए संदेह से परे वाला भाव तो कहीं नहीं है। वहाँ से और नीचे उतरें, तो एक कांग्रेसी और एक भाजपाई नेता के बीच कोई अंतर नहीं दिखता।

यह सँभलने का समय है। नहीं सँभल पाये, तो आगे का गर्त बहुत गहरा हो सकता है।


राम मंदिर की महालूट मामूली घटना नहीं है। इसने हिंदुत्व ब्रिगेड को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है, मगर सबसे ज़्यादा पोल खुली है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की। संघ ख़ुद को हिंदू धर्म का ठेकेदार और राष्ट्र के चरित्र निर्माण की पाठशाला बताता रहा है मगर मंदिर की लूट ने साबित कर दिया है कि उसकी फैक्ट्री में निर्मित स्वयंसेवक धर्म का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं। वास्तव में ये संघ के इतिहास की एक निर्णायक घटना है। ये महात्मा गाँधी की हत्या और बाबरी मस्जिद को गिराए जाने जितना बड़ी कलंकित करने वाली घटना है। ये दिखाती है कि वह अपने स्वार्थों के लिए हिंदुओं को भी धोखा दे सकता है। इससे भी ख़तरनाक़ बात ये हुई है कि संघ इस महालूट के महाअपराध को छिपाने की कोशिश कर रहा है, मामूली घटना बताकर खारिज़ करने की कोशिश कर रहा है। समझदार हिँदू देख रहे हैं कि कैसे मोदी और योगी की सरकारें फ़र्ज़ी एसआईटी बनाकर लीपा पोती कर रहे हैं। ये तक सामने नहीं आने दे रहे हैं कि लूट किस पैमाने पर हुई और उनके और आरएसएस द्वारा नियुक्त अधिकारियों की इसमें क्या हिस्सेदारी थी। सवाल उठता है कि इस भंडाफोड़ से उसकी तथाकथित सौ साल की साधना का सत्यानाश नहीं हो गया है….क्या समर्थकों के सामने उसका चरित्र बेनकाब नहीं हो गया है? क्या वे ठगे हुए महसूस नहीं कर रहे होंगे? या फिर उनकी अँधभक्ति संघ को क्लीन चिट दे देगी और वह ख़ुद को साफ़-सुथरा साबित करने में कामयाब हो जाएगा?

-मुकेश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन