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ब्रह्मांड घूम रहा है, 500 अरब साल में लगाता है एक चक्कर!

नई दिल्ली – हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली संभावना जताई है कि हमारा पूरा ब्रह्मांड हर 500 अरब साल में एक बार घूमता है। यह खोज ब्रह्मांड विज्ञान की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक — हबल तनाव — को हल करने में मददगार हो सकती है।

हबल तनाव एक ऐसा विरोधाभास है जिसमें ब्रह्मांड के विस्तार की दर अलग-अलग तरीकों से मापने पर अलग-अलग परिणाम मिलते हैं। एक तरफ सुपरनोवा जैसी घटनाओं को देखकर की गई मापें हैं, और दूसरी तरफ ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) पर आधारित मापें। इन दोनों में लगभग 10% का अंतर पाया गया है।

इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने अब एक नया गणितीय मॉडल पेश किया है, जिसमें ब्रह्मांड के धीमे घूर्णन को शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि ये मॉडल वर्तमान मापों को नकारे बिना ही सभी विरोधाभासों को संतुलित करता है।

वैज्ञानिकों का तर्क है कि जब ग्रह, तारे, आकाशगंगाएं, और ब्लैक होल जैसे हर खगोलीय पिंड घूमते हैं, तो फिर ब्रह्मांड क्यों नहीं? 1949 में मशहूर गणितज्ञ कर्ट गोडेल ने भी घूमते हुए ब्रह्मांड की अवधारणा रखी थी, और बाद में स्टीफन हॉकिंग जैसे वैज्ञानिकों ने भी इस पर विचार किया।

यह नई थ्योरी न सिर्फ एक पुरानी पहेली को हल कर सकती है, बल्कि ब्रह्मांड की संरचना और उसके व्यवहार को समझने के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है।

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