
संजय कुमार सिंह
सात चरण में होने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान आज है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव क्षेत्र में भी आज ही मतदान है। इस दौरान वे (पिछली बार की तरह) ध्यान पर हैं और विपक्ष का यह आरोप है कि दरअसल यह भी प्रचार है और शांत अवधि में तस्वीर छपवाने तथा चर्चा में रहने का एक तरीका है। मैं नहीं जानता कानूनन यह सही है या गलत लेकिन निष्पक्षता का तकाजा था कि आज उसकी चर्चा या खबर नहीं होती। चुनाव आयोग ने कुछ किया या नहीं, क्या किया या नहीं किया से अलग, सबको पता है कि वे चुनाव जीतने के लिए क्या सब कर रहे हैं और किस मानसिक दशा में हैं। ऐसे में उनका जीतना जरूरी नहीं है कि देशहित में हो। दस साल का उनका कार्यकाल हम देख चुके हैं और जानते हैं कि जो किया है उसपर वोट नहीं मांग रहे हैं। वोट मांगने के लिए वे लोगों को डरा रहे हैं कांग्रेस और विपक्ष की निराधार आलोचना कर रहे हैं। 10 साल राम, मंदिर और हिन्दुत्व के बाद टेलीविजन के राम को चुनाव लड़ाया और जरूरी नहीं है कि वे जीत ही जायें।
ऐसी दशा में झोला उठा कर चल देने का उनका डायलॉग और 75 साल में रिटायर होने के अपने ही बनाये नियम पर उनने कुछ नहीं कहा है। जबकि अगले साल 75 के हो जायेंगे और विकल्प यहां भी नहीं है या अरविन्द केजरीवाल की मानें तो सिर्फ अमित शाह हैं। इसके अलावा यह आरोप है इस बार जीत गये तो फिर चुनाव नहीं होंगे। चंडीगढ़, सूरत, इंदौर में ये लक्षण भी दिखे हैं। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि आगे चुनाव सभी सक्षम विरोधियों को जेल में रखकर होंगे। इसके अलावा, उनका और उनकी पार्टी का जीतना देश और समाज के हित में नहीं है। राजनीति खराब हो रही है – इसे भी मानने के पर्याप्त कारण हैं। इसके बावजूद अगर उनका समर्थन किया जा रहा है तो क्यो? कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधान प्रचारक होने के बावजूद प्रधान मंत्री भी हैं तो कम से कम स्वयं नियमों का पालन करना चाहिये, नैतिक होना चाहिये, आदर्श व्यवहार करते नजर आना चाहिये और ऐसा नहीं हो तो चुनाव आयोग से लेकर दूसरी संस्थाओं को ध्यान देना चाहिये। यह सब नहीं हो तो मीडिया का काम है, कि वह जनता को सच बताये जिससे वे चुनाव के संबंध में जानकार निर्णय ले सकें।
आज के मेरे ज्यादातर अखबार उनके गलत या अनैतिक और अनुचित कार्य का समर्थन करते लग रहे हैं। मुझे नहीं लगता है कि आज ध्यान लगाने की फोटो और खबर छापना इतना जरूरी था कि पहले ही पन्ने पर हो। खास कर प्रज्वल रेवन्ना की गिरफ्तारी की खबर के साथ। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इससे अगर उनके शक्तिशाली होने के संकेत जा रहे हैं तो मीडिया की लाचारी या समर्थन के भी जा रहे हैं। मीडिया ने अगर इलेक्टोरल बांड के जरिये वसूली की खबर को छिपा रखा था तो अब ऐसा करने वाली व्यवस्था का प्रचार कर रहा है, समर्थन कर रहा है। यह जानते हुए कि विरोधियों-विपक्षियों को परेशान करने में इस व्यवस्था ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में नरेन्द्र मोदी का जीतना निष्पक्ष चुनाव में जीतना नहीं होगा। हार गये तो यह जरूर कहा जा सकेगा कि तमाम अनुचित उपायों और सहयोग के बावजूद हार गये। जो भी हो, मीडिया अपनी शर्मनाक भूमिका के लिए याद किया जायेगा। सरकार बदल गयी तो इसकी स्वतंत्रता निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय सबसे जरूरी होंगे।

आज मेरे सात में से तीन ही अखबारों में मोदी के ध्यान लगाने की फोटो और खबर पहले पन्ने पर नहीं है बाकी चार अखबारों ने अपनी संपादकीय स्वतंत्रता का उपयोग किया है। आइये देखें किसने क्या लिखा है। हिन्दी के दोनों अखबारों में प्रधानमंत्री को फोटो पहले पन्ने पर है। अमर उजाला ने पांच कॉलम की लीड के साथ फोटो छापी है और एक उपशीर्षक है, कन्याकुमारी में पीएम मोदी का सूर्य अर्घ्य। इसके साथ लाल रिवर्स में है, ध्यानयोग … सूर्योदय पर भगवान भास्कर को नमन। कन्याकुमारी डेटलाइन से एजेंसी की खबर है, विवेकानंद रॉ मेमोरियल में ध्यान के क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सूर्योदय के दौरान सूर्य को अर्घ्य दिया। भाजपा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सूर्योदय, सूर्य अर्घ्य, अध्यात्म शीर्षक से साझा किया है। सोशल मीडिया पर साथी डॉक्टर राकेश पाठक ने आज सुबह लिखा है कि ध्यान अवस्था के चौबीस घंटे से भी कम में प्रधानमंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल से अब तक सात ट्वीट किए हैं।
पहला ट्वीट उन्होंने कल शाम को ही किया था जिसमें मिजोरम, असम,मेघालय, मणिपुर आदि में रेमल तूफान के असर पर चिंता जताई थी। दूसरा ट्वीट भी कल रात ही किया जिसमें चौथी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के बारे में जानकारी दी गई। यही आज कई अखबारों में लीड है आज एक जून को सुबह से पांच ट्वीट किए गए हैं। अंतिम चरण के मतदान के लिए हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, उड़िया और पंजाबी में किए गए इन सभी ट्वीट्स में मतदान की अपील की गई है। प्रधानमंत्री का ध्यान और मौन व्रत आज शाम समाप्त होगा। अमर उजाला ने लिखा है, भाजपा ने मोदी की कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं जिनमें वे भगवा कुर्ता, शॉल और धोती पहने मंडपम में ध्यान में लीन हैं। उनके सामने अगरबत्ती जलती दिख रही है। एक तस्वीर में मोदी हाथों में जप माला लेकर ध्यान मंडपम की परिक्रमा करते दिख रहे हैं। अखबार का फोटो कैप्शन है – साधना पर सियासत प्रधानमंत्री मोदी के ध्यान को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। तमिलनाडु कांग्रेस ने इसे लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उसने पीएम पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, पीएम मोदी कन्या कुमारी जाकर नाटक कर रहे हैं। अगर आपको भगवान पर भरोसा है तो अपने घर पर ही ध्यान करें।
अखबार का फोटो कैप्शन है – साधना पर सियासत प्रधानमंत्री मोदी के ध्यान को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। तमिलनाडु कांग्रेस ने इसे लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उसने पीएम पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, पीएम मोदी कन्या कुमारी जाकर नाटक कर रहे हैं। अगर आपको भगवान पर भरोसा है तो अपने घर पर ही ध्यान करें। पहले पन्ने पर इस प्रचार का असर गोरखपुर के मतदाताओं पर होगा ही। मुझे लगता है कि चुनाव प्रचार मना है तो यह फोटो भी आज नहीं होनी चाहिये थी, सोशल मीडिया तो पिछले दरवाजे से प्रचार ही है। उससे भी बचना चाहिये था, कम से कम प्रधानमंत्री को। गली-मोहल्ले के नेता की बात अलग होती है।
नवोदय टाइम्स में ध्यान, साधना …. शीर्षक से तस्वीर है। कैप्शन खबर की तरह डेटलाइन के साथ है। कन्याकुमारी (तमिलनाडु) समेत। हालांकि ना खबर या कैप्शन का स्रोत है और ना ही फोटो का। खबर इस प्रकार है, विवेकानंद रॉक मेमोरियल में शुक्रवार को ध्यान साधना में लीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। करीब तीन महीने के लंबे चुनाव प्रचार और करीब 206 रैलियों-सभाओं के बाद कन्याकुमारी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रार को अपनी ध्यान साधना के दूसरे दिन विवेकानंद रॉक मेमोरियल में सूर्योदय के दौरान सूर्यअर्घ्य भी दिया। … इसके बाद वही सब है जो पहले लिख चुका हूं। लगता है विज्ञप्ति का हिस्सा है। प्रज्वल रेवन्ना की गिरफ्तारी की खबर दो कॉलम में फोटो के साथ है। शीर्षक है, प्रज्वल रेवन्ना सात दिन की पुलिस हिरासत में।
हिन्दुस्तान टाइम्स में शीर्षक है मोदी का आध्यात्मिक एकांतवास जारी। यहां फोटो और कैप्शन का श्रेय एएनआई को दिया गया है। शुक्रवार को कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। यहां उन्होंने 30 मई की शाम ध्यान की शुरुआत की और एक जून की शाम इसे पूरा करना निर्धारित है। प्रज्वल की खबर यहां पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। अखबार की आज की खबर जीडीपी बढ़ने की है। फोटो लीड के बराबर में तीन कॉलम में है।
इंडियन एक्सप्रेस में ध्यानमग्न प्रधानमंत्री की फोटो दो कॉलम में और उसके साथ प्रज्वल की गिरफ्तारी की खबर दो कॉलम में बिल्कुल बराबर में है। यहां फोटो का नहीं, कैप्शन का शीर्षक है और यह भी एएनआई का है। कन्याकुमारी दूसरा दिन शीर्षक के तहत लिखा है, कन्याकुमारी में शुक्रवार को विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान लगाये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। लीड चुनाव प्रचार खत्म हुआ है। इसके अलावा, मेरे तीन अखबारों – टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू और द टेलीग्राफ में प्रधानमंत्री के ध्यान लगाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू में प्रज्वल रेवन्ना को हिरासत में भेजे जाने की खबर फोटो के साथ चार कॉलम में है। इसमें उन्हें वापस लाने के लिए पासपोर्ट रद्द किये जाने जैसी कोई सूचना नहीं है और खबर से लगता है कि वे स्वयं वापस आये हैं, संभवतः वकीलों की सलाह पर। लेकिन आज यह खबर छपना, जब प्रधानमंत्री के लिए वोट पड़ना है, हेडलाइन मैनेजमेंट का भाग हो सकता है। यह समझने की चीज है इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है और यह संपादकीय स्वतंत्रता तथा विवेक का मामला भी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज आधे पन्ने में ऊपर से नीचे तक चार कलम का विज्ञापन है। आधे में प्रधानमंत्री की फोटो नहीं है, प्रज्वल की खबर सिंगल कॉलम में है। सिंगल कॉलम में टॉप की खबर है, प्रधानमंत्री के रूप में मेरी पसंद हमारे योग्य नेता राहुल गांधी हैं। आज जीडीपी बढ़ने की खबर खूब छपी है। कहीं लीड कहीं सकेंड लीड। टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर आज के मतदान से संबंधित विवरण दिया है।
द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर एक ही विज्ञापन है, पर्याप्त जगह है लेकिन ध्यान की खबर या फोटो नहीं है। जीडीपी बढ़ने की प्रचारनुमा खबर नहीं है और अंतिम चरण के मतदान की खबर का शीर्षक है, 1952 के बाद सबसे लंबे चुनाव के लिए उल्टी गिनती मोड। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, एक्जिट पोल के नतीजे आज शाम 6.30 बजे से जारी किये जा सकते हैं। प्रज्वल की खबर यहां फोटो के साथ चार कॉलम में है – प्रज्वल पहुंचा और गिरफ्तार कर लिया गया।
नवोदय टाइम्स में एक खबर है, बाजार को भी उम्मीद, ‘आएंगे तो मोदी ही’…. बाजार में बहार और पिछले छह महीने में निफ्टी से बेहतर रहा पीएसयू स्टॉस का प्रदर्शन के साथ इस चुनाव मौसम में सात लाख करोड़ बढ़ गई पीएसयू स्टॉक्स के निवेशकों की संपत्ति और 10 माह में 82 प्रतिशत बढ़ा पीएसयू का सूचकांक जैसी सूचनाएं आज के अखबारों में पहले पन्ने पर होने का मतलब है और आप उसे समझ सकते हैं।



