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अल्ट्रासाउंड सेंटर के चेंजिंग रूम में सीसीटीवी कैमरा! खबर सिर्फ ‘अजीत’ अखबार में, चैनल भी चुप

पंजाब के फिरोजपुर में शुक्रवार महिलाओं के शोषण का ऐसा गंदा मामला उजागर हुआ जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया। अरोड़ा अल्ट्रासाऊंड सैंटर, जिसे डा. विकास अरोड़ा पिछले करीब 20 साल से चला रहे हैं और इस सैंटर को शहर का सबसे विश्वसनीय अल्ट्रासाऊंड सैंटर माना जाता है, के चेंजिंग रूम में एक शादीशुदा महिला ने सीसीटीवी कैमरा लगा होने का खुलासा किया। उक्त महिला नगर के एक सीनियर वकील की बहन है और कुछ समय पहले उसकी नगर के एक सम्पन्न परिवार में शादी हुई है। महिला ने चेंजिंग रूम में कैमरा लगे होने के बारे में अपने परिवार वालों को बताया तो अल्ट्रासाऊंड सैंटर पर माहौल गर्म हो गया।

पंजाब के फिरोजपुर में शुक्रवार महिलाओं के शोषण का ऐसा गंदा मामला उजागर हुआ जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया। अरोड़ा अल्ट्रासाऊंड सैंटर, जिसे डा. विकास अरोड़ा पिछले करीब 20 साल से चला रहे हैं और इस सैंटर को शहर का सबसे विश्वसनीय अल्ट्रासाऊंड सैंटर माना जाता है, के चेंजिंग रूम में एक शादीशुदा महिला ने सीसीटीवी कैमरा लगा होने का खुलासा किया। उक्त महिला नगर के एक सीनियर वकील की बहन है और कुछ समय पहले उसकी नगर के एक सम्पन्न परिवार में शादी हुई है। महिला ने चेंजिंग रूम में कैमरा लगे होने के बारे में अपने परिवार वालों को बताया तो अल्ट्रासाऊंड सैंटर पर माहौल गर्म हो गया।

कुछ ही पलों में पुलिस और राजनीतिक असर रसूख रखने वाले लोग वहां जुड़ने शुरू हो गए। जब मेला जुड़ा हो तो मीडिया की गैर मौजूदगी हो ही नहीं सकती। जैसे जैसे सूचना मिलती गई तो लगभग सभी इलैक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार वहां आ गए। मामला बड़ा था इसलिए सभी चैनलों एवं अखबारों के जिला प्रमुखों सहित कई पत्रकार पहुँच गए। चार घंटे तक चले हाई प्रोफाईल ड्रामे के बाद डा. विकास अरोड़ा के रेडियोग्राफर अजय कुमार ने लिखित में माफी मांगी जिसके बाद महिला एवं उसके परिवार वाले शांत हुए।

हाई प्रोफाईल ड्रामे में सबसे अहम भूमिका राजनैतिक पार्टी के नेता टिड्‌डी मेहत्ता ने निभाई, जो अकसर बड़े मामलों में सरकार का आदमी बनकर राजीनामे करवाता है। पब्लिक ने किसी पॉकेटमार को पकड़ा हो या पुलिस ने किसी तस्कर को, कथित नेता टिड्‌डी के आगे पुलिस भी गिड़गिड़ाती है और मीडिया भी। और इस मामले में भी यही हुआ। जैसे तैसे अल्ट्रासाऊंड सैंटर का मामला शांत हो गया, किसी चैनल पर मामला नहीं दिखाया गया, लोगाों को उम्मीद थी कि सुबह प्रिंट मीडिया इसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा लेकिन लोगों के हाथ निराशा ही लगी।

किसी मीडिया ग्रुप ने महिलाओं के सरेआम हो रहे शोषण के विरूद्ध एक भी शब्द नहीं लिखा जबकि सिर्फ एक अखबार जालंधर से प्रकाशित अजीत पंजाबी ने हौंसला दिखाया और पूरी कहानी को बयां किया। अजीत अखबार के पत्रकार, जो कि खुद एक वकील हैं और रोजाना ऐसे मामलों से उनका पेचा पड़ता है, ने अपनी हिम्मत का जो सबूत दिया, वह अन्य मीडिया ग्रुप पर तमाचे के समान है। 19 मार्च 2016 के अजीत के पेज नंबर 11 पर प्रकाशित खबर दे रहा हूं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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