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महाराष्ट्र

छात्रसंघ की मांग को लेकर महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) में विद्यार्थियों के छात्र संघ की मांग को लेकर मौखिक रुप से स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रोफेसर  गिरीश्वर मिश्र आश्वासन दिया है कि छात्र संघ से संबंधित निर्णय ले लिया गया है ।जिसके विषय में जल्द ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सूचना अपडेट करा दी जाएगी। ज्ञात हो की छात्र संघ की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों (आइसा, AISF, DISO आदि) ने विगत 6 माह से अलग अलग रूप से छात्रसंघ की मांग उठाई थी। बाद में सभी छात्र संगठनों और छात्र संघ का समर्थन कर रहे विद्यार्थियों ने मिलकर छात्र संघ चुनाव संघर्ष मोर्चा का निर्माण किया जिसके माध्यम से इस लड़ाई को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय का शिक्षक संघ भी छात्रसंघ की मांग को लोकतांत्रिक मानते हुए अपना लिखित समर्थन दिया है।

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महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) में विद्यार्थियों के छात्र संघ की मांग को लेकर मौखिक रुप से स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रोफेसर  गिरीश्वर मिश्र आश्वासन दिया है कि छात्र संघ से संबंधित निर्णय ले लिया गया है ।जिसके विषय में जल्द ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सूचना अपडेट करा दी जाएगी। ज्ञात हो की छात्र संघ की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों (आइसा, AISF, DISO आदि) ने विगत 6 माह से अलग अलग रूप से छात्रसंघ की मांग उठाई थी। बाद में सभी छात्र संगठनों और छात्र संघ का समर्थन कर रहे विद्यार्थियों ने मिलकर छात्र संघ चुनाव संघर्ष मोर्चा का निर्माण किया जिसके माध्यम से इस लड़ाई को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय का शिक्षक संघ भी छात्रसंघ की मांग को लोकतांत्रिक मानते हुए अपना लिखित समर्थन दिया है।

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छात्रसंघ के चुनाव को लेकर कुलपति, प्रतिकुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई जवाब ना  मिलने पर छात्रों द्वारा स्मरणपत्र भी दिया गया। जवाब फलस्वरूप बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का हवाला देते हुए छात्र संघ चुनाव की मांग को खारिज कर दिया। अंततः छात्र संघ  चुनाव संघर्ष मोर्चा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि एक विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से छात्र संघ चुनाव  कराने की मांग को और गति दी जाए। इसी मांग को लेकर 28 नवंबर को भारी संख्या में विद्यार्थी विश्वविद्यालय के साहित्य विद्यापीठ में 11:00 बजे एकत्रित हुए। वहां से विद्यार्थियों ने एक विरोध जुलूस निकाला जो विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्यापीठ से होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंचा। प्रशासनिक भवन पहुंच वहां जुलूस एक सभा का रुप ले लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि छात्र संघ की मांग हमारी लोकतांत्रिक मांग है।

छात्रों का प्रतिनिधित्व चुनाव प्रणाली पर आधारित होनी चाहिए ना कि चयन प्रणाली के आधार पर।  छात्र  प्रतिनिधि के नाम पर विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय चयन प्रणाली के आधार पर छात्र प्रतिनिधित्व करता आ रहा था जो कि एक अलोकतांत्रिक प्रणाली है। ज्ञात हो कि लिंगदोह समिति में सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों में चुनाव कराना अनिवार्य बताया है। जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार करते हुए 2005 में  निर्देश दिया है कि सभी संस्थानों में चुनाव कराए जाएं जिसके लिए  उसने कुछ गाइडलाइंस भीतर किया है।

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छात्रों का सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल कुलपति से मिलने गया और अपनी बात दोहराते हुए प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि छात्र संघ की मांग संवैधानिक है जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन को मानना चाहिए। अन्यथा विद्यार्थी  शांतिपूर्ण आन्दोलन  पर जाने को विवश होंगे। तत्पश्चात माननीय कुलपति ने छात्रसंघ की मांग  पर पुनर्विचार करते हुए इससे मान लिया और मौखिक रूप से आश्वस्त किया कि जल्द ही एक कमेटी गठित कर दी जाएगी जो छात्र संघ चुनाव का प्रारूप और तिथि तय करेगी। इस संबंध में जल्द ही एक सूचना विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जायेगा। कुलपति से मौखिक आश्वाशन मिलने के बाद के बाद तब कही विद्यार्थियों ने अपना आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।

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