‘दलित दस्तक’ मैग्जीन की वेबसाइट लांच

पत्रकारिता के क्षेत्र में दलित और वंचित तबके की आवाज बन चुके अशोक दास ने अपनी वेबसाइट लांच कर दी है। www.dalitdastak.com नाम से यह वेबसाइट 6 जुलाई को लांच हुई। अशोक दास जून, 2012 से दलित दस्तक के नाम से एक मासिक पत्रिका का संपादन/ प्रकाशन भी कर रहे हैं। इसी के विस्तार स्वरूप ऑन लाइन पाठकों तक पहुंचने के लिए इस वेबसाइट को लांच किया गया है।

वेबसाइट में पत्रिका की ऑनलाइन सदस्या लेने की सुविधा को भी जोड़ा गया है। साथ ही विडियो सेक्शन को भी शुरू किया गया है। गौरतलब है कि अशोक दास पिछले एक दशक से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न समाचार पत्रों में नौकरी करने के बाद उन्होंने 2012 में अपनी मंथली मैग्जीन को लांच किया। वेबसाइट को लेकर दलित दस्तक पत्रिका के पाठकों में काफी उत्साह है।

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Comments on “‘दलित दस्तक’ मैग्जीन की वेबसाइट लांच

  • दत्तू मेढ़े says:

    जय भीम
    में दलित दस्तक का बहुत बड़ा फेन रहा हु ।
    जिसे संपादित आपके द्वारा किया जाता था
    दलित दस्तक नाम बरकराल रखा ।उसके लिए धन्यवाद
    मध्य प्रदेश में दलित दस्तक में देखने केलिए इच्छुक हु।
    जय भीम
    :pजय भीम
    में दलित दस्तक का बहुत बड़ा फेन रहा हु ।
    जिसे संपादित आपके द्वारा किया जाता था
    दलित दस्तक नाम बरकराल रखा ।उसके लिए धन्यवाद
    मध्य प्रदेश में दलित दस्तक में देखने केलिए इच्छुक हु।
    जय भीम
    जय भीम
    में दलित दस्तक का बहुत बड़ा फेन रहा हु ।
    जिसे संपादित आपके द्वारा किया जाता था
    दलित दस्तक नाम बरकराल रखा ।उसके लिए धन्यवाद
    मध्य प्रदेश में दलित दस्तक में देखने केलिए इच्छुक हु।
    जय भीम

    Reply
  • vijay gautam says:

    Sir,
    Thanks for creating awareness amongst marginalised section of the society. one request sir,kindly launch a TV channel which will cover the dalit issues because in the absence of such TV channels the manuvadi channels have managed in creating nuisence and propagating misinformation amongst the masses. One Lord Buddha TV channel in marathi is already in place. my request is to launch hindi channel which would be purely Ambedkarite channel. Pls do let me know if I can be of any help.

    Reply
  • Er D Prakash Gautam says:

    *धर्मान्धता* के कारण जिस तथाकथित भगवान् या देवी-देवता को व्यक्ति स्वयं से भी ज्यादा ताकतवर समझता है, अपनी रक्षा की गुहार लगाने की खातिर जिसके दर्शन करने के लिए शारीरिक कष्ट सहते हुए धार्मिक यात्रा करते हुए गोलियों से या किसी दुर्घटना में लोग मारे जाते है, यदि उस तथाकथित भगवान् या देवी-देवता मे कोई ताकत है, तो वह उन मरने वालो को क्यों बचाने कभी नहीं आया और क्यों बचाने कभी नहीं आता ?
    इसका मतलब साफ़ है कि उसमे न तो कोई कोई ताकत है और न ही उसे किसी विशेष व्यक्ति से कोई लगाव है !
    हमारा मत है कि स्वयं पर भरोषा कर अपनी ताकत स्वयं बनो !
    यदि संभव हो सके तो कमजोरों की सहायता करो !
    याद रखिये आपकी स्वयं की ताकत उस तथाकथित अद्रश्य भगवान् या देवी-देवताओं से सदैव ज्यादा कारगर साबित होगी!
    जय भीम !
    *-इं० डी० प्रकाश गौतम*
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    *भारतीय मूलनिवासी संगठन।*

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  • jitendra bauddh says:

    Dear sir

    बहुत बहुत साधुवाद आगे बढ़ते रहे सुभ कामना। आप को।

    Reply

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