रीजनल टीवी चैनलों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर खुल गया है। प्रसार भारती ने ‘डीडी फ्री डिश’ के नए टेस्ट स्ट्रीम टीएस#7 और टीएस#8 पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात यह है कि ये स्लॉट 31 मार्च 2026 तक बिल्कुल मुफ्त दिए जाएंगे—वह भी पूरी तरह पायलट आधार पर। देश के सबसे बड़े फ्री-टू-एयर प्लेटफॉर्म पर जगह पाने का यह मौका खासकर उन क्षेत्रीय चैनलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है जो अभी तक फ्री डिश पर मौजूद नहीं हैं।
रीजनल चैनलों को प्राथमिकता
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी राहत और अवसर रीजनल न्यूज चैनलों के लिए है। प्रसार भारती ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल उन्हीं उपग्रह टीवी चैनलों से लिया जाएगा जो क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारण करते हैं और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से वैध लाइसेंस प्राप्त हैं।
हिंदी और उर्दू चैनल इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।
प्राथमिकता उन भाषाई क्षेत्रों को दी जाएगी, जहां फ्री डिश की मौजूदगी कम है—जैसे कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम, बांग्ला, असमिया और ओड़िया। इन भाषाओं के न्यूज़ चैनलों को स्पष्ट प्राथमिकता मिलेगी।
रीजनल न्यूज इंडस्ट्री के लिए यह इसलिए भी बड़ा मौका है, क्योंकि कई भाषाई राज्यों में फ्री डिश की पहुंच ग्रामीण और अर्ध-शहरी दर्शकों तक बहुत प्रभावी रही है।
कड़ाई से लागू होंगे भाषा और जॉनर के नियम
आवेदन करने वाले चैनलों को अपने जॉनर और भाषा की एकदम स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी देनी होगी।
- घोषित भाषा और जॉनर में कम से कम 75% कंटेंट होना अनिवार्य है।
- एक महीने के प्रसारण के औसत में यह अनुपात 60% से नीचे नहीं होना चाहिए।
- विज्ञापन और प्रमोशन का समय इस गणना में शामिल नहीं होगा।
अगर कोई चैनल नियमों का पालन नहीं करता पाया गया तो उसकी प्रसारण रिकॉर्डिंग की समीक्षा होगी, और आवश्यकता पड़ने पर स्लॉट रद्द भी किया जा सकता है। चैनल को भाषा या जॉनर बदलने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन समयसीमा में अनुरोध न मिलने पर कार्रवाई तय है।
पहले स्लॉट पाने वाले चैनल आवेदन नहीं कर सकेंगे
प्रसार भारती ने साफ कर दिया है कि 2025–26 के किसी भी ई-ऑक्शन में स्लॉट जीत चुके चैनल इस फ्री स्लॉट प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। यह योजना पूरी तरह से उन रीजनल चैनलों के लिए है जिन्हें फ्री डिश पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका अभी तक नहीं मिल पाया।
31 मार्च 2026 तक की है फ्री सुविधा
इन नए स्लॉट्स को मुफ्त में उपलब्ध कराने की अवधि 31 मार्च 2026 तक ही सीमित होगी। यह पूरी योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की जा रही है, ताकि क्षेत्रीय भाषाई चैनलों की पहुंच और दर्शक आधार का व्यापक आकलन किया जा सके।


