दीन दयाल उपाध्याय का न तो राष्ट्र निर्माण में कोई उल्लेख करने लायक योगदान है और न ही उन्होंने कोई मौलिक दर्शन दिया!

मुगलसराय का नाम बदलने का औचित्य बताये योगी सरकार, कारपोरेट हितों के लिए कर्ज माफी से इंकार कर रही सरकार… मुगलसराय, 14 जून 2017 । योगी व मोदी सरकार को मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर करने का औचित्य जनता को बताना चाहिए। दीन दयाल उपाध्याय का न तो राष्ट्र निर्माण में कोई उल्लेख करने लायक योगदान है और न ही उन्होंने कोई मौलिक दर्शन ही दिया, उनका पूरा दर्शन गांधी व उपनिषद से लिया हुआ है। यह बातें मुगलसराय स्थित कार्यालय पर चंदौली, सोनभद्र व मिर्जापुर के कार्यकर्ताओं की बैठक को सम्बोधित करते हुए स्वराज अभियान के राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य श्री अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा द्वारा इतिहास के साथ छेड़छाड़ की कोशिश ठीक नहीं है, इतिहास में जो कुछ अच्छा है उसे स्वीकार करना होगा। महज मुगलों के इतिहास को खारिज करने के लिए नाम बदल रहे हैं तो उन्हें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन को भी खारिज करना पड़ेगा, क्योंकि 1857 की जंगे आजादी की लड़ाई तो मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में ही लड़ी गयी थी, क्या इसका साहस आरएसएस-भाजपा में है।

उन्होंने कहा कि देशी विदेशी कारपोरेट घरानों के मुनाफे के लिए मोदी सरकार किसानों के कर्ज माफी से इंकार कर रही है। सरकार एक तरफ 4 लाख 75 हजार करोड़ रूपए रेलवे स्टेशनों पर वाई फाई लगाने के लिए खर्च कर रही है और कारपोरेट घरानों के 55 लाख करोड़ रूपए टैक्स व कर्जे के माफ कर दिए वहीं किसानो की हजारों आत्महत्याओं और आंदोलनों के बाबजूद किसानों के महज ढाई लाख करोड के कर्जो को माफ करने को तैयार नहीं है। सरकार के वित्त मंत्री कह रहे है कि इससे वित्तीय घाटा बढ़ेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि वित्तीय घाटा उधार की अर्थव्यवस्था के कारण बढ़ता जा रहा है इसलिए वित्तीय घाटा रोकने के लिए आतंरिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। यह तभी सम्भव है जब देश में खेती किसानी को मजबूत किया और गांवस्तर पर सहकारी खेती को विकसित किया जाए।

उन्होंने नौगढ़ में वन भूमि पर पुश्तैनी बसे आदिवासियों और वनाश्रितों को उजाड़े जाने की कार्यवाही पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश ने उ0 प्र0 सरकार को स्पष्ट आदेश दिया था कि वनाधिकार कानून के तहत पेश दावों का निस्तारण करते समय विधिक प्रक्रिया का अनुपालन किया जाए। आज तक प्रशासन ने इस काम को नहीं किया और वनाधिकार कानून के तहत प्राप्त दावों का निस्तारण नहीं किया।

कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि दावों के निस्तारण के बिना बेदखली की कार्यवाही नहीं की जायेगी। इसलिए प्रशासन को अपनी उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना की विधि विरूद्ध कार्यवाही पर रोक लगानी चाहिए अन्यथा इसके खिलाफ जनांदोलन से लेकर न्यायालय से तक स्वराज अभियान लड़ेगा। बैठक को दिनकर कपूर, राजेश सचान, अखिलेश दूबे, अजय राय, रामनारायन, रामेश्वर प्रसाद, राम कुमार राय, धर्मेन्द्र सिंह एड0, कृपा शंकर पनिका, राजेन्द्र गोंड़, सीताराम विक्रान्त, राममूरत राजभर, दीनानाथ, सुरेश बिन्द, राममूरत पासवान, विरेन्द्र, रामकेश, सुनील, रहमुद्दीन ने सम्बोधित किया। संचालन जिला संयोजक अखिलेश दूबे ने किया।

भवदीय
(सुरेश बिन्द )
कार्यालय प्रभारी
स्वराज अभियान, चंदौली



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