सुशील शुक्ला–
शाहजहांपुर – फाइलेरिया जैसी कष्टदायक बीमारी से मुक्ति के लिए सरकार के द्वारा व्यापक अभियान चलाकर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में उस समय अजीबोगरीब स्थित उत्पन्न हो गई जब मीडिया कार्यशाला में रीसेन्टली न्यूज़ के द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी जवाब नहीं दे सके और शर्मसार हो कर माफी मांगते हुए मीडिया वर्कशॉप से भाग गए।
सरकार के द्वारा चलाए जा रहे आइडीए अभियान को सफल बनाने के लिए शाहजहांपुर के स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मीडिया वर्कशॉप शहर के नामी गिरामी होटल में आयोजित की गई। वर्कशाप का उद्देश्य था कि फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए किये जा रहे प्रयासों से मीडिया को अवगत कराना। 10 फरवरी से 28 फरवरी तक चलने वाला फाइलेरिया अभियान 12 विकास खंडो सहित नगर क्षेत्र में चलाया जाएगा। जिसमें फाइलेरिया रोधी दबाएं एल्बेंडाजोल आइवरमेक्टिन प्रत्येक व्यक्ति को खिलाना है।
लेकिन मीडिया वर्कशॉप में उस समय हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो गई जब मीडिया को संबोधित करने आए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विवेक कुमार मिश्रा रीसेंटली न्यूज़ के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। सीएमओ के पास ना तो 5 वर्षों में फाइलेरिया के मरीजों के आंकड़े थे न ही उनको पिछले वर्ष फाइलेरिया के मरीजों का तुलनात्मक प्रतिशत का ज्ञान था।
एक भी प्रश्न का उत्तर ना दे पाने पर सीएमओ को पत्रकारों के सामने न केवल फजीहत झेलनी पड़ी बल्कि डायस पर आकर माफी भी मांगनी पड़ी और अपनी अक्षमता से लज्जित होकर वर्कशॉप से भाग खड़े हुए।
गौरतलब है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी विवेक कुमार मिश्रा जब से शाहजहांपुर जनपद में आए हैं, स्वास्थ्य विभाग की सेहत दिनों दिन खराब होती जा रही है सीएमओ मिश्रा को ना तो विभागीय कार्य प्रणाली की जानकारी है और ना ही प्रशासनिक चुस्ती है, नतीजा यह है की पूरा विभाग राम भरोसे चल रहा है सीएचसी पीएचसी में चिकित्सा अधिकारी अक्सर नदारत रहते हैं तो कहीं-कहीं बाहरी व्यक्ति इलाज करते हुए भी दिखाई पड़ जाते हैं।
पिछले दिनों ही विधायक कटरा ने एक स्वास्थ्य केन्द्र पर बाहरी व्यक्ति को इलाज करते हुए पकड़ा था ऐसे हालातों में न जाने कितने लोग जिंदगी मौत के बीच में तड़पते रहते हैं और कितने गरीब प्राइवेट नर्सिंग होम में जाने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन सीएमओ विवेक मिश्रा को इससे क्या मतलब.. वे तो मलाई खाने और अनियमित तरीके से लग्जरी सुख सुविधा में मस्त हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण सीएमओ ऑफिस का नवीनीकरण है जिसे बिना बजट और बिना अनुमति के कराकर सीएमओ साहब चटकारे ले रहे हैं।


