गलगोटिया विश्वविद्यालय ने ₹2.5 लाख का एक रोबोट बाज़ार से खरीदा जो कि “Made in China” था। उसे अपना “Made in India” बनाया हुआ बताया और फिर उसे दिल्ली AI Summit में अपने ₹350 करोड़ के AI ecosystem का हिस्सा कहकर पेश भी कर दिया। इस एक झूठ की वजह से आज देश की अंतराष्ट्रीय स्तर पर बेइज्जती हो रही है… नीचे पढ़ें जरूरत से ज्यादा होशियार गलगोटिया वालों के लिए कौन क्या लिख रहा है-
अशोक कुमार पांडेय-
इसके पहले भी गलगोटिया में साड़ी की दुकानों पर लगने वाली एक मैनेकिन को खड़ा करके AI Robot टीचर बताकर वीडियो बनवाई गई। अब तो यह ऐसी हरकत है कि दुनिया भर में मज़ाक उड़ रहा है।
क्या प्रदर्शनी में शामिल करने से पहले जांच नहीं की गई? क्या इस यूनिवर्सिटी पर कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए?
सौमित्र राय-
दिल्ली में चल रहे एआई समिट में आयोजकों ने दुनिया भर में देश की नाक कटाकर रख दी है। कल महामानव ने शाम को आकर फोटूबाजी की और 56 कैमरों के सामने रील बनाई और बाकी लोग भूखे मरे। आज रील मंत्री खुद पहुंच गया।
इसके बाद चोरों की मंडली ने पूरे आयोजन स्थल पर नंगा नाच किया। कोई खटिया लेकर बैठा तो कोई कुछ। एआई के नाम पर क्या हो रहा है, इसका का प्रत्यक्ष उदाहरण देखें।
बीजेपी की गलगोशिया वॉट्सएप यूनिवर्सिटी ने चीन से एक रोबोट ढाई लाख रुपए में खरीदा। फिर इस रोबोट को समिट में लाकर दूसरी कंपनियों को चू@#* या बनाने के लिए अपना बता दिया। ठीक वैसे ही, जैसे गांव-देहात के मेले में ठग किया करते हैं।
भैया ऐसे ही अपना 350 करोड़ का एआई इकोसिस्टम खड़ा करना है तो पकौड़े की दुकान खोल लो। या फिर अपने डैडी नचनिया को डांस करने बुला लो। नॉन बायोलॉजिकल बापजी तुमको ज्यादा कमाकर देंगे। जिस देश में एक पाखंडी बाबा गौमूत्र से कैंसर के इलाज का दावा करता हो, वहां एआई की क्या जरूरत?
चीनी रोबोटिक कुत्ते के गले में बीजेपी का पट्टा बांधकर अपना नाम देने की खबर एक घंटे में चीन तक पहुंच गई। चीन ने भी समझ लिया कि भूखे–नंगे भारतीय जन्मजात चोर हैं। जब डैडी ही वोट चोर हों तो औलादें कुत्ता चोर ही बनेंगी। का है गलगोशिया वाले चोरों? मज़ा आया कि नहीं?

शीतल पी सिंह-
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की हालिया घटना ने सोशल मीडिया पर काफी हंगामा मचा दिया है। AI इम्पैक्ट समिट 2026 में, जो दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ, उन्होंने अपना “₹350 करोड़+ का AI इकोसिस्टम” दिखाया। इसमें ORION नाम का एक रोबोटिक डॉग (Robot Dog) का लाइव डेमो था, जिसे उन्होंने “AI में ब्रेकथ्रू” और “ओरिजिनल इनोवेशन” बताया। DD न्यूज़ ने भी इसे कवर किया और बताया कि यूनिवर्सिटी ने NVIDIA-पावर्ड सुपरकंप्यूटिंग, जेनरेटिव AI रिसर्च, सेमीकंडक्टर लैब, ड्रोन इंटेलिजेंस आदि पर इतना बड़ा निवेश किया है – ये भारत के किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी का सबसे बड़ा AI निवेश माना जा रहा है।
लेकिन हकीकत सामने आई तो लोगों को झटका लगा। ये रोबोट Unitree Go2 है – चीन की कंपनी Unitree Robotics का कमर्शियल प्रोडक्ट! ये ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध है।
- कीमत: बेसिक मॉडल (Go2 Air) लगभग $1,600 (₹1.3-1.5 लाख), Pro/एडवांस्ड वर्जन $2,800 (लगभग ₹2.3-2.5 लाख) तक। भारत में भी Robu.in, IndiaMART जैसी साइट्स पर ₹3-5 लाख में मिल जाता है।
- स्पेसिफिकेशन्स (Unitree Go2 के मुख्य फीचर्स):
- क्वाड्रुपेड (चार पैर वाला) रोबोट, जो कुत्ते जैसा दिखता और चलता है।
- 4D Ultra-wide LiDAR सेंसर: 360° × 96° रेंज में ऑब्जेक्ट डिटेक्शन, बहुत कम ब्लाइंड स्पॉट (0.05m से शुरू)।
- मैक्स स्पीड: 2.5-3.5 m/s (तेज दौड़ सकता है)।
- पेलोड: 7-10 kg तक कैरी कर सकता है।
- AI-पावर्ड: GPT जैसे बड़े मॉडल से इंटेलिजेंट डिसीजन लेता है, जैसे ऑब्स्टेकल क्रॉसिंग, बैकफ्लिप, कार्टव्हील, इनवर्टेड वॉकिंग, एडाप्टिव रोल-ओवर।
- बैटरी और मटेरियल: अल्यूमिनियम अलॉय + हाई-स्ट्रेंथ प्लास्टिक, 15 kg वजन (बैटरी सहित)।
- इस्तेमाल: रिसर्च, एजुकेशन, इंडस्ट्रियल इंस्पेक्शन, सिक्योरिटी, एंटरटेनमेंट में पॉपुलर।
X (ट्विटर) पर लोग इसे खुलकर “स्कैम”, “शर्मिंदगी”, “एम्बैरसमेंट फॉर इंडिया” बता रहे हैं। कई पोस्ट्स में लिखा है:
- “₹350 करोड़ में क्या खरीदा? एक ₹2.5 लाख का चाइनीज रोबोट!”
- “ये कैसे चीन-अमेरिका को चैलेंज करेंगे? पहले अपना ओरिजिनल बनाओ।”
- “गोदी मीडिया ने हाइप किया, लेकिन रियलिटी चेक हो गया।”
- कुछ ने मजाक में कहा – “Modi Ji ने पढ़ाना शुरू कर दिया क्या?” या “PowerPoint में गोल्ड मेडल जीत लिया।”
रोबोटिक्स में भारत अभी बहुत पीछे है, लेकिन ऐसे हाइप और फेक इनोवेशन दिखाने से क्रेडिबिलिटी कम होती है। असली प्रोग्रेस के लिए:
- ओरिजिनल R&D पर फोकस।
- स्टूडेंट्स को रियल प्रोजेक्ट्स दें (जैसे Unitree Go2 को बेस बनाकर कस्टम AI ट्यूनिंग करना)।
- ट्रांसपेरेंसी रखें – निवेश कहाँ गया, क्या आउटपुट आया, ये बताएं।
AI और रोबोटिक्स अच्छी चीजें हैं, लेकिन हाइप से ज्यादा हकीकत जरूरी है। भारत में टैलेंट है, बस सही दिशा में लगाओ। सतर्क रहें, और ऐसे मामलों पर सवाल उठाते रहें – तभी रियल इनोवेशन आएगा!


खुशदीप सहगल-
गलगोटिया ने AI का गला घोंट दिया?
दिल्ली में AI समिट बड़े ज़ोरशोर से चल रहा है. यहां एक रोबोटिक डॉग ने हर जगह फज़ीहत करा दी है. आरोप है कि ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीन में बने रोबोट को भारतीय इनोवेशन बताकर दिल्ली एआई समिट में पेश किया. ऑनलाइन ये रोबोटिक डॉग 2800 डॉलर (2.53 लाख रुपए) में कोई भी खरीद सकता है…
DD न्यूज समेत कई मीडिया संगठन में इस पर रिपोर्ट भी की.देखते ही देखते यूनिवर्सिटी का ‘लाइसेंस रद्द हो’ जैसी मांग सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी और विश्वविद्यालय को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा. वहीं रिपोर्ट करने वाले मीडिया संगठनों को वीडियो डिलीट करना पड़ा…
AI समिट के दौरान एक चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग पर लोगों की नज़र पड़ी. सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह रोबोट गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है और इसे ‘Orion’ नाम से प्रदर्शित किया गया. जांच-पड़ताल में सामने आया कि यह रोबोटिक डॉग चीन की ग्लोबल रोबोटिक्स कंपनी Unitree का मॉडल Unitree Go2 है. सवाल उठने लगे कि अगर रोबोट विदेश से मंगाया गया था, तो उसे यूनिवर्सिटी के छात्रों की इंडियन इनोवेशन की तरह क्यों दिखाया गया…
सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की. कुछ यूजर्स ने इसे छात्रों के भविष्य से जोड़ते हुए सवाल किया कि जो संस्थान इतने बड़े मंच पर भ्रम फैला सकता है, वह युवाओं को कैसी शिक्षा देगा…
एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द होने चाहिए?
एक यूज़र ने लिखा, ”ये रोबोटिक डॉग चीन में पैदा हुआ, गलगोटिया यूनिवर्सिटी और दूरदर्शन ने इसे भारतीय आविष्कार बताने में कोई कसर नही छोड़ी. अभी अंतरराष्ट्रीय मंच और भद्द पिटवाना बाकी है?…”
आलोचकों का कहना है कि पारदर्शिता सबसे जरूरी है. अगर तकनीक आयातित है, तो उसे उसी रूप में पेश किया जाना चाहिए. AI समिट जैसे मंच पर किसी भी तरह की गलतफहमी देश की तकनीकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है…
यह पूरा विवाद सिर्फ एक रोबोटिक डॉग तक सीमित नहीं है. यह सवाल उठाता है कि भारत में AI और इनोवेशन को लेकर ईमानदारी और पारदर्शिता कितनी जरूरी है…
लगातार आलोचना के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 17 फरवरी की रात आधिकारिक बयान जारी किया. यूनिवर्सिटी ने साफ कहा कि उसने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोटिक डॉग उसी ने बनाया है…
विश्वविद्यालय ने बयान में कहा, यह रोबोट छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल है, जिसे शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए खरीदा गया है. बयान में कहा गया, “हम रोबोट नहीं, बल्कि ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो भविष्य में भारत में इस तरह की तकनीक को डिजाइन, इंजीनियर और मैन्युफैक्चर करेंगे…”
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का कहना है कि इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती और सीखने का नजरिया वैश्विक होना चाहिए. उनका तर्क है कि अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसी जगहों की एडवांस टेक्नोलॉजी से छात्रों को रूबरू कराना भविष्य की तैयारी है…
बहरहाल इस तरह की घटना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या संदेश गया होगा, समझा जा सकता है…


