रवीश कुमार-
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद गौतम अदाणी के पद त्याग की ख़बर दूसरी ऐसी रहस्यमयी घटना हो गई है जिसके कारणों की जानकारी किसी के पास नहीं है। कारपोरेट जगत में यह एक दुर्लभ घटना होगी जब कोई अपनी ही कंपनी के सबसे प्रभावशाली पद को छोड़ कर ग़ैर-कार्यकारी पद ग्रहण कर ले। गौतम अदाणी के पद त्याग पर तमाम तरह की थ्योरी चल रही है।
अमेरिका में गौतम अदाणी के ख़िलाफ़ चल रहा भ्रष्टाचार का मामला एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। मीडिया में एक थ्योरी चल रही है कि अगर जाँच के कारण गौतम अदाणी पर प्रतिबंध लग गया तो कंपनी के लिए मुश्किल हो जाएगी और इसीलिए उन्होंने पद त्याग किया है।
कुछ समय पहले ख़बर आई थी कि अदाणी समूह इस मामले के वापस लिए जाने के लिए ट्रंप प्रशासन से मुलाक़ात कर रहा है। क्या पद त्याग की ख़बर इस ओर इशारा कर रही है कि अदाणी को कार्रवाई की आशंका हो गई है?
आदेश रावल-
आज कहानी थोड़ी लम्बी है। राहुल गांधी बोल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का जवाब नहीं दे रहे हैं।
दरअसल राहुल गांधी के इस आरोप में कई कहानियाँ है।राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई हथियार है।गौतम अड़ानी के खिलाफ DOJ की जाँच चल रही है।
डोनाल्ड ट्रंप जानते हैं कि इस मामले को लेकर अड़ानी समूह प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव डाल रहे हैं।
गौतम अड़ानी ने पोर्ट और SEZ से इस्तीफ़ा देने के पीछे भी एक कहानी है। रूस और ईरान से तेल आयात पर अमेरिकी रोक के बावजूद अड़ानी पार्ट का इस्तेमाल किया गया है। जिसका प्रभाव DOJ की जाँच पर पड़ सकता है। ट्रंप यह भी जानते हैं कि भारत और रूस यानि दो सरकारों के बीच तेल की डील हुई थी और मुकेश अम्बानी समूह इस तेल को मुनाफा कमाने के लिए अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बेच रहा है।ट्रंप यह बता रहे हैं कि उन्हें पता है कि मुकेश अम्बानी और __ तेल बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।
सुप्रिया श्रीनेत-
गौतम अडानी ने अडानी पोर्ट्स और विशेष आर्थिक क्षेत्र (APSEZ) के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह क्यों महत्वपूर्ण है
APSEZ भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह संचालक है, जो भारत के कुल बंदरगाह व्यापार का लगभग 28% हिस्सा संभालता है।
APSEZ अडानी ग्रूप की सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनी है। कानूनी उथल-पुथल के बीच इस्तीफा।
अमेरिका द्वारा जांच हो रही है कि क्या अडानी कंपनियों ने मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ईरानी LPG आयात किया, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है।
हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा उठाए गए 250 मिलियन डॉलर के रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप, जिनकी अब अमेरिकी SEC जांच कर रही है।
अडानी समूह पर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह कर फंडिंग हासिल करने और अरबों डॉलर के ऊर्जा अनुबंध हथियाने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप हैं।
वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव
- केन्या सरकार ने अडानी के 2.6 बिलियन डॉलर के दो इन्फ्रास्ट्रक्चर सौदों को रद्द कर दिया है
- अमेरिका स्थित इंस्टिट्यूशनल निवेशक अडानी समूह में अपनी हिस्सेदारी का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं
- श्रीलंका ने अडानी समूह से बिजली खरीदने का सौदा रद्द कर दिया है
- ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और ईरान में अडानी के खिलाफ जाँच और विरोध प्रदर्शन जारी हैं


