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‘गाँव कनेक्शन’ को मिला ‘रामनाथ गोयनका अवार्ड’

ramnath goenka award

नई दिल्ली। जिस अख़बार में किसी ने पैसे नहीं लगाए, जिस अख़बार को घर बेच कर शुरू किया गया, भारत के उसी, प्रथम ग्रामीण समाचार पत्र ‘गाँव कनेक्शन’ ने देश का प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मान ‘रामनाथ गोयनका अवार्ड’ जीता है। ‘गाँव कनेक्शन’ का प्रायोगिक दौर अब समाप्त हो रहा है, अख़बार अगले माह से 14 लाख पाठकों तक पहुंचने की तैयारी में है।

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नई दिल्ली। जिस अख़बार में किसी ने पैसे नहीं लगाए, जिस अख़बार को घर बेच कर शुरू किया गया, भारत के उसी, प्रथम ग्रामीण समाचार पत्र ‘गाँव कनेक्शन’ ने देश का प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मान ‘रामनाथ गोयनका अवार्ड’ जीता है। ‘गाँव कनेक्शन’ का प्रायोगिक दौर अब समाप्त हो रहा है, अख़बार अगले माह से 14 लाख पाठकों तक पहुंचने की तैयारी में है।

यह अवार्ड ‘गाँव कनेक्शन’ के पत्रकार नीलेश मिश्र और मनीष मिश्र को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने दिया। ‘गाँव कनेक्शन’ ने यह अवार्ड, ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ की श्रेणी में जीता इसमें अंग्रेजी, हिंदी व अन्य भाषाओं के समाचार पत्र शामिल थे।

02 दिसंबर-2012 को ‘गाँव कनेक्शन’ (www.gaonconnection.com) की स्थापना करने वाले नीलेश मिश्र भारत के मशहूर कहानीकार हैं। 92.7 बिग एफएम पर प्रसारित होने वाला उनका राष्ट्रीय रेडियो प्रोग्राम ‘यादों का इडियिट बॉक्स विद नीलेश मिश्र’ के देश भर में चार करोड़ श्रोता हैं। वह बॉलीवुड के मशहूर पटकथा लेखक, गीतकार और पत्रकार हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स के लिए उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से रिर्पोटिंग के लिए नीलेश मिश्र को पहले भी इसी श्रेणी में ‘रामनाथ गोयनका अवार्ड’ मिल चुका है। मनीष मिश्र गाँव कनेक्शन में सह सम्पादक हैं, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तृत रूप से रिपोर्टिंग की है।

‘गाँव कनेक्शन’ अब दैनिक अख़बार बनने के बड़े लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

‘गाँव कनेक्शन’ भारत के पत्रकारिता जगत में खाली स्थान को भरने की कोशिश कर रहा है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली करीब 68 प्रतिशत आबादी के लिए मुख्यधारा की पत्रकारिता में कोई अपनी आवाज नहीं थी। सीएसडीएस के भारत के मुख्यधारा के समाचार पत्रों के पांच वर्षों के अध्ययन के अनुसार इन अख़बारों में ग्रामीण भारत की ख़बरों को मात्र दो फीसदी ही स्थान मिल पाता है। गाँव कनेक्शन इस खाई को भर रहा है।

अख़बार की सबसे बड़ी मुश्किल समाचार पत्र को दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचाना रहा है। जहां या तो अखबार नहीं पहुंच पाते या फिर बहुत कम संख्या में ही दूर-दराज के बाज़ारों तक ही पहुंच पाते हैं। गाँव कनेक्शन की हेड ऑफ ऑपरेशंस, यामिनी त्रिपाठी कहती हैं कि ”सुदूर ग्रामीण इलाकों में पिछले 20 महीनों में हमने अख़बार वितरण के नए तरीके खोज कर इसे ग्रामीण इलाकों में पहुंचाया हैं। स्वयं सहायता समूह, किसान क्लब, स्कूल या कॉलेज के साथ जुड़कर हम वितरण के नए तरीके अपनाते रहे हैं। साथ ही, अख़बार के वितरण से जुड़े लोगों को रिपोर्टिंग के भी मौके दिए हैं।”

गाँव कनेक्शन ने मीडिया क्षेत्र में एक नए तरीके से ब्रांड की प्राथमिकता के हिसाब से अखबार के वितरण की शुरुआत की है। कई बड़े ब्रांडों की गाँवों की प्राथमिकता सूची के हिसाब से अख़बार का वितरण भी किया गया है।

गाँव कनेक्शन की प्रकाशित सामग्री में ग्रामीण रिपोर्टिंग (गाँव-चौपाल), खेती और इस क्षेत्र में नई खोज (खेती-किसानी), महिलाओं को समर्पित एक पेज (नारी-डायरी), कौशल और प्रेरणादायक (हुनर), अपने क्षेत्र के अनुभवी लेखकों का सम्पादकीय पेज, ग्रामीण भारत के बदलाव की जीवंत कहानियां (बदलता इंडिया) ब्यूटी टिप्स, मोबाइल फोन और इंटरनेट से लेकर स्वास्थ्य की सलाह तक (बात पते की) शामिल हैं।

गाँव कनेक्शन के संस्थापक नीलेश मिश्र ने कहा, ”हमें वास्तव में असाधारण समर्पण भाव रखने वाली अपनी छोटी टीम पर गर्व है, जिसने असंभव को संभव कर दिखाया है। हमारा उद्देश्य जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लगातार अच्छा काम करते रहना है।”

प्रेस विज्ञप्ति

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2 Comments

2 Comments

  1. Gaurav Gupta

    September 15, 2014 at 7:10 am

    An amazing feat for a self-funded newspaper. 🙂

  2. SHANKAR JALAN

    September 20, 2014 at 10:54 am

    SUBH KAMNA

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