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आज के अखबार : हादसे के तुरंत बाद विरासत संभालने की राजनीति का चेहरा फटे पर्दे के पीछे से दिखा रहे हैं

संजय कुमार सिंह

आज मेरे नौ अखबारों में दो, अमर उजाला और नवोदय टाइम्स की लीड बजट पेश किए जाने की खबर है। बाकी सात में सुनेत्र पवार के शपथग्रण की। एनसीपी के एक गुट के नेता अजीत पवार के विमान दुर्घटना में मारे जाने के बाद उनकी पत्नी सुनेत्र पवार को उनकी जगह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बनाए जाने और शपथ ग्रहण की खबर आज देशबन्धु में, ‘नम आंखों के साथ शपथ ली’ से है तो द टेलीग्राफ के शीर्षक में ‘टकराव के संकेत’ जैसी सूचना है। दुर्घटना के बाद शरद पवार ने कहा था, कृपया हादसे में राजनीति न लाएं। आज टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के शीर्षक में है, मुझसे ना पूछा गया ना बताया गया। अंग्रेजी में शीर्षक के संबंधित अंश का अनुवाद है, शरद पवार ने कहा लूप में नहीं हैं। दि एशियन एज ने बताया है कि महाराष्ट्र की पहली महिला उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड के शीर्षक में है, शपथ दिलाई गई, वित्त फडणविस (मुख्यमंत्री) को मिला। इंडियन एक्सप्रेस ने भी महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री होने का उल्लेख है। द हिन्दू के शीर्षक, सुनेत्र पवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई  में कोई राजनीति नहीं है। लेकिन उपशीर्षक है, एनसीपी के दिवंगत नेता अजीत पवार की विधवा राज्य में पद संभालने वाली पहली महिला बनीं। तीन पोर्टफोलियो संभालेंगी, परिवार से सलाह नहीं की गई, शरद पवार ने कहा कि दोनों गुटों के एकीकरण की चर्चा अंतिम चरण में थी।

दो हिन्दी अखबारों में जहां शपथग्रहण की खबर लीड नहीं है उनमें अमर उजाला का शीर्षक है, सुनेत्र पवार को मिली अजीत की विरासत महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं। इसके साथ छपी खबर का शीर्षक है, शरद समारोह में नहीं गए, कहा… एनसीपी की एकता में बाधा। एक और खबर का शीर्षक है, उत्पाद शुल्क, खेल और युवा विभाग मिले। इसका उपशीर्षक है, मुख्यमंत्री फडणवीस ने वित्त विभाग अपने पास रखा। अमर उजाला ने सुनेत्र पवार की बातों को भी मूल खबर के साथ सिंगल कॉलम में छापा है। उन्होंने कहा है, मैं अपने दिवंगत पति अजीत पवार की विरासत व आदर्शों को आगे बढ़ाऊंगी और कर्तव्य, संघर्ष व लोगों के प्रति समर्पण की उनकी सीख को मार्गदर्शक बनाऊंगी। उनके मूल्य, कर्तव्य भावना, संघर्ष की ताकत और लोगों के प्रति जवाबदेही मेरा सच्चा सहारा बनेंगे। न्यायपूर्ण, समान एवं विकसित महाराष्ट्र के उनके सपने को साकार करने के लिए मैंने अटूट ईमानदारी से काम करने का संकल्प लिया है। मैं उनके विचारों को जीवित रखते हुए नई उम्मीद के साथ आगे वढूंगी। परिवार वाद और वंशवाद का विरोधी होना प्रचारित करते रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सुनेत्र पवार अजीत पवार के विजन को पूरा करेंगी। नवोदय टाइम्स का इंट्रो है, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायक दल की नेता (भी) चुनी गईं। जाहिर है, अखबारों ने खबर से जुड़ी राजनीति को ठीक-ठाक महत्व दिया है। भले ही कुछ विशेष नहीं बताया गया है लेकिन जो है उसे ज्यादातर ने बता ही दिया है। यह अलग बात है कि हादसे से जुड़ी इस राजनीति का कारण किसी ने नहीं बताया है। द टेलीग्राफ का फ्लैग शीर्षक है, शपथग्रहण की जल्दबाजी के पीछे भाजपा का ‘हाथ’। इस तरह द टेलीग्राफ की खबर का पूरा शीर्षक है, पत्नी को अजीत पवार का पद मिला, टकराव के संकेत। फ्लैग शीर्षक है, शपथग्रहण की (इस) जल्दबाजी के पीछे भाजपा का ‘हाथ’।    

दि एशियन एज ने इसे आगे बढ़ाया है, अजीत गुट ने एनसीपी पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कदम उठाया। भले ही अब यह सूचना पुरानी हो गई है लेकिन यहां लीड के साथ सिंगल कॉलम की खबर है, अजीत ने 12 फरवरी को एनसीपी के विलय की योजना बनाई थी : शरद। इंडियन एक्सप्रेस का फ्लैग शीर्षक है, अजीत पवार के दो प्रमुख पोर्टफोलियो – वित्त व योजना फडणविस ने अपने पास रखे। उपशीर्षक है, सुनेत्र ने कहा – अजीत पवार के आदर्शों की विरासत को आगे ले जा रही हैं। शरद पवार और एनसीपी (एसपी) के नेता शपथग्रहण में शामिल नहीं हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर का शीर्षक है, एनसीपी (एसपी) के अनुसार विलय की चर्चा अब रुक जाने की आशंका है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह रेखांकित किया है कि सुनेत्र पवार पर 25 करोड़ के बैंक घोटाले में निगरानी चल रही है। अखबार ने इस खबर को अंदर पेज 13 पर होने की सूचना पहले पन्ने पर दी है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने शरद पवार के इस दावे को मूल खबर के साथ तीन कॉलम में जगह दी है कि, अजीत (पवार) एनसीपी को फिर से एक करने के पक्ष में थे और अब यह विलय टल गया है।

फोटो मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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