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सुख-दुख

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की आत्मकथा में मोदी का ये प्रसंग चर्चा में आया

नीरेंद्र नागर-

हामिद अंसारी जब 2007 में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति बने तो उनसे मिलने वालों में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे। हामिद अंसारी पहले अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके थे और उनके दिमाग़ में भी वे सवाल थे जो हम जैसे कई लोगों के दिमाग़ में हैं। उन्होंने मोदी से पूछा कि उन्होंने क्यों 2002 के दंगों को होने दिया।

मोदी ने कहा कि लोग तस्वीर का केवल एक पहलू देखते हैं और जो अच्छे काम उन्होंने शुरू किए हैं, ख़ासकर मुसलमान लड़कियों की शिक्षा को लिए, उनकी तरफ़ ध्यान नहीं देते।

उपराष्ट्रपति इस जानकारी से ख़ुश हुए और कहा कि मैं इसके बारे में विस्तार से जानना चाहता हूँ। साथ ही उन्होंने सुझाव भी दिया कि आपको तो इसका प्रचार करना चाहिए।

मोदी बोले, ‘नहीं, राजनीतिक तौर पर वह मेरे लिए उपयुक्त नहीं होगा।’

यह घटना उपराष्ट्रपति ने अपनी हाल ही में जारी आत्मकथा में बयाँ की है।

यह एक प्रसंग आज के प्रधानमंत्री की ‘मानसिकता’ को समझने के लिए काफ़ी है। यह बताता है कि अगर उन्हें गुजरात दंगों के लिए बाद में कभी अफ़सोस हुआ भी होगा तो वे इसे कभी ज़ाहिर नहीं करेंगे क्योंकि इससे उन्हें ‘राजनीतिक तौर पर नुक़सान’ हो सकता है। हिंदू हितों के रक्षक की अपनी छवि को वह कभी ‘दाग़’ नहीं लगने देंगे।

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