
संजय कुमार सिंह
जम्मू कश्मीर और हरियाणा में चुनाव चल रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार हरियाणा में मतदाता कहते हैं कि कांग्रेस आगे है लेकिन भाजपा मुकाबले से बाहर नहीं है। भाजपा केंद्र में सत्ता में है और खुद को सबसे योग्य बताने के लिए दूसरे दलों के लोगों को भ्रष्ट साबित करने की कोशिशें छोड़ नहीं रही है। अमर उजाला में टॉप पर छपी दो खबरों के अनुसार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर लोकायुक्त पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है जबकि जमीन के बदले नौकरी मामले में ईडी ने लालू यादव को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, लोकायुक्त ने एफआईआर में सिद्धरमैया को आरोपी नंबर वन बनाया है। वैसे, दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रित करने और पराली जलाना रोकने जैसे मामलों में सब कुछ हवा में है यह शीर्षक अमर उजाला का है तथा नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “प्रदूषण पर सब हवाबाजी” है।
अंग्रेजी अखबारों – द हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी लीड तथा हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड से बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को फटाकारा। कहने की जरूरत नहीं है कि विपक्षी नेताओं को भ्रष्ट बताने का भाजपाई आधार हाईकोर्ट का आदेश है जबकि वोट मांगने के लिए 10 साल में क्या किया, बताने के लिए कुछ नहीं है। कश्मीर में 370 हटाने के लिए भी वोट नहीं मांग रहे हैं क्योंकि उससे कोई फायदा तो हुआ नहीं है। ऐसे में आज अकेले द टेलीग्राफ में सुप्रीम कोर्ट की ‘समस्या’ लीड है। अखबार ने हाईकोर्ट के जजों की हाल की तीन टिप्पणियों का जिक्र किया है जिनकी आलोचना सुप्रीम कोर्ट ने की है। यह खबर लीड है।

यही नहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर एक खबर छापी है जिसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के गंभीर आरोपों की जांच की जायेगी। प्रवर्तन निदेशालय और छत्तीसगढ़ सरकार ने आरोप लगाये हैं कि नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले के आरोपी, पूर्व नौकरशाह, अनिल के टुटेजा और आलोक शुक्ला ने अग्रिम जमानत प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट के एक जज को प्रभावित किया।
केंद्र सरकार जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अपनी राजनीति और ईमानदारी चमकाने की कोशिश में है तब इस बात के भी उदाहरण हैं कि भ्रष्टाचार के आरोपी नेताओं पर दबाव डालकर उन्हें भाजपा में शामिल किया गया है। इसके बाद उनके खिलाफ मामले या तो खत्म हो गये या ठंडे बस्ते में हैं। ऐसे में भाजपा की हालत पर आपने इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक ऊपर पढ़ लिया। अब आज के एक और दिलचस्प शीर्षक का उल्लेख करना चाहूंगा जो मेरे सात अखबारों से अलग, दि एशियन एज में लीड है। फ्लैग शीर्षक है – गृह मंत्री ने कहा, कांग्रेस किसान विरोधी, दलित विरोधी, आरक्षण विरोधी है।
मुझे लगता है कि भाजपा नेता और गृहमंत्री बनाने के लिए चुने गये और ‘चाणक्य’ कहे गये अमित शाह ऐसा कहने की हिमाकत कर रहे हैं तो यह लीड ही बननी चाहिये। मुख्य शीर्षक है, सेना के अपमान के लिए अमित शाह ने कांग्रेस की आलोचना की और एमएसपी को लेकर राहुल पर तंज कसा। खबर के अनुसार, उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि वे एमएसपी का फुल फॉर्म जानते भी हैं कि नहीं। यही नहीं, उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राहुल गांधी जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 वापस लाना चाहते हैं। यह सब भाजपा के चुनाव प्रचार के उदाहरण हैं। कांग्रेस के चुनाव प्रचार में जीएसटी का सरलीकरण करने की घोषणा शामिल है लेकिन वह मेरे किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू ने अंदर के पन्ने पर होने की सूचना दी है।
जम्मू और कश्मीर के साथ हरियाणा चुनाव के लिए भी भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। उम्मीद है, कश्मीर में मतदान पूरा हो जाने के बाद एक से पांच के बीच मांस, मछली, मुसलमान जैसे मुद्दे आएं। बहुतों का मानना है कि इसीलिए ऐन चुनाव के समय पुरानी प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर तिरुपति मंदिर के प्रसाद और लड्डू में मिलावट का हंगामा खड़ा किया गया। इसमें कोई मुसलमान नहीं था इसलिए मामला ना टिका ना ही अपेक्षित परिणाम मिला। दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को तिरुमाला का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया।
आज यह खबर अलग-अलग शीर्षक से छपी है। द हिन्दू की खबर के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अपनी पाप प्रक्षालण यात्रा के भाग के रूप में तिरुपति जाने वाले थे और नहीं जाने से तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) और जिला पुलिस को राहत मिली है। वे मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के कथित पाप के लिए माफी मांगना चाहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने गलत कहानी फैलाई थी कि लड्डू बनाने में जानवर की चर्बी का उपयोग किया गया था। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सिंगल कॉलम में जगन मोहन रेड्डी की फोटो के साथ है। शीर्षक है, “लड्डू को लेकर विवादों के बीच जगन तिरुपति यात्रा रद्द करने के लिए मजबूर हुए”।
टाइम्स ऑफ इंडिया में शीर्षक है, “लड्डू विवाद के बीच जगन ने तिरुपति दौरा रद्द किया”। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर चार कॉलम में है – “आस्था पर सवाल उठने के बाद, जगन ने तिरुपति दौरा रद्द किया, नायडू की आलोचना की : क्या लोगों को पता नहीं है”। जनसत्ता की खबर के अनुसार, जगन मोहन रेड्डी ने कहा, “मैं अपने घर की चारदीवारी के अंदर बाइबिल पढ़ता हूं और बाहर मैं हिंदू धर्म, इस्लाम और सिख धर्मों का सम्मान करता हूं। क्या लोग मेरे धर्म को नहीं जानते? सीएम के तौर पर मैंने भगवान वेंकटेश्वर को पवित्र वस्त्र अर्पित किए हैं। किसी ने कभी मेरे धर्म और आस्था पर सवाल नहीं उठाया। टीडीपी और गठबंधन के नेताओं की हिम्मत कैसे हुई कि वे मुझसे मंदिर न जाने के लिए कहें?”
उन्होंने आगे कहा कि टीडीपी, जेएसपी और बीजेपी के नेता शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने पूछा, “क्या आप ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द का मतलब जानते हैं। धर्म के नाम पर गंदी राजनीति न करें। मैं वाईएसआरसीपी के सभी नेताओं से आग्रह करता हूं कि वे मंदिरों में जाएं और लोगों को बताएं कि यह चंद्रबाबू नायडू ही हैं जिन्होंने भगवान वेंकटेश्वर मंदिर और तिरुपति लड्डू की पवित्रता का अपमान करके गलत काम किया है।” अमर उजाला में खबर है, जगन को तिरुपति जाने की इजाजत नहीं। खबर के अनुसार, उन्होंने कहा – पुलिस ने मंदिर यात्रा को लेकर राज्य भर के वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेताओं तो नोटिस जारी किया है।
द एशियन एज की खबर के अनुसार, विवादों के बीच जगन ने तिरुपति मंदिर की यात्रा टाली। इस खबर में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के अनुसार किसी ने उन्हें मंदिर जाने से नहीं रोका है। ऐसा ही हिमाचल प्रदेश के भोजनालयों में मालिकों का नाम लिखने के संबंध में है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर कहती है कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। दि एशियन एज में संबंधित खबर का शीर्षक है, हिमाचल प्रदेश में विवाद को लेकर कांग्रेस ने मंत्री को चेतावनी दी, पार्टी के आदर्शों पर कायम रहिये। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम में है, “हिमाचल प्रदेश के भोजनालयों में नाम लिखने की योजना लटक गई क्योंकि कांग्रेस आलाकमान ने मंत्री की खिंचाई की”।


