भोपाल। जनहित से जुड़े बड़े मुद्दों पर लगातार प्रभावी और तथ्याधारित खोजी पत्रकारिता के लिए दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम के हेड हेमेन्द्र शर्मा को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित ‘भास्कर जर्नलिस्ट ऑफ द इयर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
उन्हें यह सम्मान 7 जून 2025 को प्रकाशित अपनी चर्चित इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी “यूके के स्क्रैप टायर मप्र में डंप; मुरैना और भोपाल समेत 27 जगह अवैध रूप से बन रहा तेल; हवा-पानी में घुल रहा जहर” के लिए प्रदान किया गया।
यह स्टोरी न केवल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई। ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क (GIJN) ने इसे वर्ष 2025 की बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी घोषित किया, जबकि प्रतिष्ठित मीडिया प्लेटफॉर्म The Reporters’ Collective ने फरवरी 2026 में इस विषय पर अपनी स्वतंत्र जांच प्रकाशित कर इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में आगे बढ़ाया।
वर्ष 2025–26 की प्रमुख इन्वेस्टिगेटिव स्टोरियां और उनका प्रभाव
मार्च 2025– सहारा जमीन सौदा मामला — “सहारा की 184 करोड़ की जमीन 14 करोड़ में बेची”
इस इन्वेस्टिगेशन में जमीन की वास्तविक कीमत और बिक्री मूल्य के बीच बड़े अंतर तथा भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया गया।
प्रभाव: संपत्ति सौदों में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों पर व्यापक चर्चा शुरू हुई।
अप्रैल 2025– गुजरात बॉर्डर शराब तस्करी नेटवर्क — “मप्र ने खोले शराब तस्करी के 7 कॉरिडोर”
इस रिपोर्ट में मध्यप्रदेश-गुजरात सीमा पर तस्करी के संगठित नेटवर्क और प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को नक्शे और डेटा के साथ उजागर किया गया।
प्रभाव: सीमा क्षेत्रों में आबकारी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
जुलाई 2025– आजीविका मिशन में गड़बड़ी — “पांच जिलों के 100 महिला स्व-सहायता समूहों की पड़ताल”
इस जांच में सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए समूहों में व्यापक अनियमितताओं और रोजगार के दावों की वास्तविक स्थिति सामने आई।
प्रभाव: योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता उजागर हुई।
अगस्त 2025– महिलाओं के फंड और बीमा में अनियमितता — “महिलाओं के बीमा के नाम पर 100 करोड़ के घोटाले का अंदेशा”
इस स्टोरी में अधिकारियों द्वारा ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाकर धन निकालने और फर्जी सदस्य बनाकर फंड उपयोग करने की प्रक्रिया का खुलासा हुआ।
प्रभाव: वित्तीय जवाबदेही और योजना प्रबंधन पर प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हुए।
अक्टूबर 2025– छिंदवाड़ा कफ सिरप मौत मामला — “बैन तो ठीक! इन मासूम मुस्कानों के हत्यारों को तलाशो”
इस रिपोर्ट में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही और दवा निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया गया।
प्रभाव: दवा सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हुई।
अनुवर्ती रिपोर्ट — “मप्र में हमारे 9 बच्चों की मौत, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं”
इस स्टोरी में कार्रवाई में देरी और स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही को तथ्यात्मक रूप से सामने लाया गया।
मार्च 2026– औद्योगिक निवेश और रोजगार के दावों की जांच — “75 फैक्ट्रियों तक पहुंचा भास्कर; 32 बंद या पुरानी मिली”
इस जांच में विधानसभा में प्रस्तुत निवेश और रोजगार के आंकड़ों की जमीनी स्तर पर सत्यता की पड़ताल की गई।
प्रभाव: सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता और औद्योगिक नीति की प्रभावशीलता पर व्यापक चर्चा शुरू हुई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली स्टोरी
“यूके के स्क्रैप टायर मप्र में डंप; 27 जगह अवैध रूप से बन रहा तेल” (जून 2025)
यह स्टोरी पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर खतरे को उजागर करने वाली रही।
मुख्य उपलब्धियां: GIJN द्वारा वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी घोषित
The Reporters’ Collective द्वारा फरवरी 2026 में फॉलो-अप जांच
पर्यावरणीय निगरानी और अवैध उद्योगों पर कार्रवाई की दिशा में प्रशासनिक पहल
उपलब्धि
- एक वर्ष में कुल 9 नेशनल मंथली अवार्ड
- जनहित से जुड़े मुद्दों पर निरंतर प्रभावी खोजी पत्रकारिता
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर ‘भास्कर जर्नलिस्ट ऑफ द इयर’ अवार्ड से सम्मानित होना हेमेन्द्र शर्मा की निरंतर, साहसिक और तथ्याधारित खोजी पत्रकारिता का प्रमाण है। उनकी रिपोर्टिंग ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और जनहित के मुद्दों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


