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साहित्य

इंतज़ार हुसैन का इंतकाल उर्दू साहित्येतिहास के एक अध्याय की समाप्ति जैसा

मशहूर कथाकार इंतज़ार हुसैन का इंतकाल भारत-पकिस्तान की सरहदों के आर-पार फैले उर्दू साहित्येतिहास के एक अध्याय की समाप्ति जैसा है. कल 2 फरवरी को 92 साल की उम्र में लाहौर के एक अस्पताल में उनका निधन हुआ. बस्ती, आगे समंदर है और नया घर के रूप में भारत-पाक बंटवारे पर एक अविस्मरणीय उपन्यास-त्रयी लिखने वाले इंतज़ार हुसैन ने कुल पांच उपन्यास और सात कहानी-संग्रहों के अलावा सफ़रनामे, निबंध और अखबारों के स्तम्भ के रूप में प्रचुर लेखन किया.

मशहूर कथाकार इंतज़ार हुसैन का इंतकाल भारत-पकिस्तान की सरहदों के आर-पार फैले उर्दू साहित्येतिहास के एक अध्याय की समाप्ति जैसा है. कल 2 फरवरी को 92 साल की उम्र में लाहौर के एक अस्पताल में उनका निधन हुआ. बस्ती, आगे समंदर है और नया घर के रूप में भारत-पाक बंटवारे पर एक अविस्मरणीय उपन्यास-त्रयी लिखने वाले इंतज़ार हुसैन ने कुल पांच उपन्यास और सात कहानी-संग्रहों के अलावा सफ़रनामे, निबंध और अखबारों के स्तम्भ के रूप में प्रचुर लेखन किया.

वे 1947 में भारत से उखड़ कर पकिस्तान गए थे और बहुलता तथा सहिष्णुता के मूल्यों से बनी साझा जीवन-शैली वाला अतीत उनकी रचनाओं में बार-बार एक गहरी कसक के साथ उभरता रहा. उनके निधन के साथ हमने समकालीन उर्दू लेखन की सबसे बड़ी हस्ती को ही नहीं, भारत और पाकिस्तान के अवाम की एकता के एक समर्थ पैरोकार को भी खो दिया है. जनवादी लेखक संघ मर्हूम इंतज़ार हुसैन के प्रति अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है.    

मुरली मनोहर प्रसाद सिंह
(महासचिव)
संजीव कुमार
(उप-महासचिव)

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