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इजरायल में चापलूस अखबारों का आतंक बढ़ा, मीडिया का गला घोंटने की तैयारी

इजरायल में मीडिया के बुरे दिन शुरू हो गए हैं . मौजूदा प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू ने उन मीडिया संस्थानों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है जो उनकी जयजयकार नहीं कर रहे हैं. सरकार और उनके चापलूस अखबारों का आतंक इतना बढ़ गया है कि आम तौर पर इजरायल के शासकों का पक्ष लेने वाली विश्वविख्यात पत्रिका इकानामिस्ट ने भी इस गड़बड़ी को प्रमुखता देते हुए एक आइटम छापा है .

बताया गया है कि डेमोक्रेसी की जो परम्परा इज़रायल में है उसको सही तो नहीं माना जाता लेकिन जो भी है उसको बचाये रखने में इजरायली मीडिया बिलकुल स्वतंत्र है . इजरायल में आम तौर पर शासक पार्टी का समर्थन करने वाले पत्रकारों की इज्ज़त नहीं होती. शायद इसीलिये इजरायली मीडिया की विश्वसनीयता अमरीका और यूरोप के प्रबुद्ध वर्गों में बहुत ज़्यादा है .

इजरायली मीडिया ने कई बार भ्रष्ट और बेईमान सरकारों को गिराने में इजरायली अवाम की मदद की है .कई बार बदतमीज़ और बेईमान जनरलों को भी मीडिया में बताई जा रही सच्चाई के सामने हटने को मजबूर होना पडा है .१९७७ में प्रधानमंत्री यित्जाक रबीन की पत्नी के गैरकानूनी बैंक खातों की जानकारी जब मीडिया में उजागर हुयी तो प्रधानमंत्री महोदय को पैदल होना पडा था.

लेकिन लगता है कि अब इजरायली मीडिया की आत्म सम्मान की परम्परा ख़त्म होने वाली है .जब सरकार बनाने के लिए साथियों की तलाश शुरू हुई तो प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू गठबंधन सरकार में ऐसे ही लोगों को रख रहे थे जो मीडिया में बहुत बड़े सुधारों की उनकी लाइन का समर्थन करें . बिन्यामिन नेतान्याहू मीडिया से इतने आतंकित हैं कि उन्होंने मीडिया को सुधार देने वाली अपनी नीति को सभी राजनेताओं के साथ चर्चा का विषय बनाया और गठबंधन के समझौते में इसको लिखवाया .

यह भी जोर दिया कि जब संचार मंत्री इस तरह के सुधार लागू करने लगेगें तो गठबंधन को कोई भी साथी इसका विरोध नहीं करेगा . नेतान्याहू इतने से ही संतुष्ट नहीं हुए . उन्होंने संचार मंत्री का पोर्टफोलियो भी अपने पास ही रख लिया. एक जुएखाने का मालिक एक मुफ्त का अखबार छापता है और आजकल श्री नेतान्याहू उसकी हर बात को मान रहे हैं . आगे आगे देखिये होता है क्या ?

शेष नारायण सिंह के एफबी वाल से

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