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जागो कर्मचारियों, अखबारमालिक किसी के सगे नहीं

नई दिल्ली। आदरणीय साथियों, पिछले डेढ़ वर्ष से मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर प्रिंट मीडिया संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी अखबार मालिकानों के घोर अत्याचार के बावजूद अपना जायज हक़ लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अखबार मालिकान ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चलकर कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने को तैयार नहीं हैं। देश भर के अखबारों में कार्यरत साथियों, ये अखबार मालिकान किसी के सगे नहीं हैं। हर वह शख्स इस बात को जानता है जो प्रिंट मीडिया संस्थानों में काम कर चुका है। हालांकि, सभी ऐसे नहीं हैं और कुछ मालिकानों ने अपने कर्मचारियों को आगे बढ़कर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ दिया है। ऐसा करके उन्होंने कर्मचारियों का दिल जीत लिया है।

नई दिल्ली। आदरणीय साथियों, पिछले डेढ़ वर्ष से मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर प्रिंट मीडिया संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी अखबार मालिकानों के घोर अत्याचार के बावजूद अपना जायज हक़ लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अखबार मालिकान ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चलकर कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने को तैयार नहीं हैं। देश भर के अखबारों में कार्यरत साथियों, ये अखबार मालिकान किसी के सगे नहीं हैं। हर वह शख्स इस बात को जानता है जो प्रिंट मीडिया संस्थानों में काम कर चुका है। हालांकि, सभी ऐसे नहीं हैं और कुछ मालिकानों ने अपने कर्मचारियों को आगे बढ़कर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ दिया है। ऐसा करके उन्होंने कर्मचारियों का दिल जीत लिया है।

लेकिन बाकियों ने तो गुंडागर्दी की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। इनमें दैनिक जागरण सबसे ऊपर है, जिसने अपना हक़ मांगने पर 350 कर्मचारियों को संस्थान से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भाइयों, आपसे अपील है कि अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरो, अखबार के मालिकान और उनके गुर्गों से दो-दो हाथ करो। आप दूसरों को इन्साफ दिलाने की बात अखबार में लिखते हो, मेहनत करते हो लेकिन आज जब सुप्रीम कोर्ट से आपको इन्साफ मिल चुका है तो उसके बाद भी आप आखिर चुप क्यों हो। आखिर कब तक अखबार के मालिकान हमें बेवकूफ बनाकर हमारा हक़ हमसे छीनते रहेंगे।

गोरखपुर, बनारस, रांची, पटना, कानपुर, आगरा, लखनऊ, अलीगढ़, अम्बाला, भागलपुर, मेरठ व अन्य कई शहरों में जागरण के कर्मचारी आंशिक रूप से सक्रिय हैं। अपने साथियों के निलंबन और बर्खास्तगी के बाद भी आप क्यों चुप बैठे हो। आखिर क्यों, कौन है जो आपको आपका हक़ लेने से रोक रहा है। आदरणीय साथियों, कृपया विचार करें कि ऐसी स्थिति क्यों है, अखबारकर्मियों की आर्थिक स्थिति कब सुधरेगी। निवेदन है उन सभी लोगों से जो प्रिंट मीडिया संस्थानों के अंदर बैठकर अन्याय का साथ दे रहे हैं। बाहर निकलिए, मालिकानों से अपना हक़ छीनिए। अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़िये, अपने साथियों का साथ दीजिये। जो फैसला आपके पक्ष में आ चुका है उसे पाने में देरी क्यों। उन हज़ारों लोगों का साथ दीजिये जिनका जीवन मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू होने के बाद सुधर जायेगा। उम्मीद है कि आप सब अपना हक़ पाने के लिए संघर्ष कर रहे अपने भाइयों का साथ देंगे। जय हिन्द।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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1 Comment

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  1. shalendra

    October 31, 2015 at 9:03 pm

    आपको किसने रोका है ? पत्रकारों का खून पानी हो गया या फिर चापलूसी कर अपनी नौकरी या प्रमोशन के जुगत में और साथियों का गला काट रहे हो । मैं एक ऐसे पत्रकार को जनता हूँ। वह दैनिक भास्कर कोटा संस्करण में है। हेमंत शर्मा नाम के इस पत्रकार ने भी हमारे साथ ही मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर केस किया था। इसके साथ १०/१२ और भी साथियों ने केस किया। परन्तु स्टेट एडिटर ओम गौड़ के कहने पर न केवल खुद ने बल्कि बाकी साथियों से भी २०जे के फार्म पर साइन करा दिए। कम्पनी ने इस पत्रकार को न केवल प्रमोशन दिया बल्कि इन्क्रीमेंट भी अच्छा दिया। अब बताओ ऐसे गद्दार को आप क्या कहेंगे। यह ऐसा व्यक्ति है जिसने हमेशा अपने ही साथियों के साथ गद्दारी की है। अब न्यूज़ एडिटर बन गया है।

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