सुना है जनसत्ता अखबार में सकारात्मक बदलाव का दौर आ गया है…

Ambrish Kumar : जनसत्ता के ज्यादातर साथी कह रहे है अखबार में सकारात्मक बदलाव का दौर आ गया है. नये संपादक ने भी कहा है कि अब इसे ख़बरों का अख़बार बनाया जायेगा. अगस्त से यह सब शुरू हो जायेगा. ऐसा होता है तो स्वागत किया जाना चाहिये.

इंडियन एक्सप्रेस. वह समूह जिसका कभी साथ नही छूटता. प्रभाष जोशी निधन से ठीक एक दिन पहले जब लखनऊ में एक्सप्रेस के दफ्तर मुझसे मिलने आये तो दो घंटा बैठे. जनसत्ता, एक्सप्रेस और फाइनेंशियल सभी के लोग थे. जब उठे तो सामने खडी मौलश्री की तरफ मुखातिब होकर ऊपर हाथ उठाकर बोले, ऊपर भी मेरा घर एक्सप्रेस परिवार में ही होगा. उस एक्सप्रेस के बारे में कल से जो सुन रहा था उससे तकलीफ हो रही थी. कल संस्थान के एक निर्णायक अधिकारी से बात हुई तो उन्होंने कहा यह गलत खबर है. आज विवेक गोयनका के उद्बोधन के बाद उम्मीद है इस पर विराम लग जाना चाहिये. इस समूह से अभी भी बहुत उम्मीद है.

जनसत्ता अखबार से रिटायर हो चुके वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार के फेसबुक वॉल से.



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