एक बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उस पत्रकार का घर बुलडोज़र से ढहा दिया गया, जो लगातार गरीबों और वंचितों की आवाज़ उठा रहा था। यह कार्रवाई न सिर्फ उनके व्यक्तिगत जीवन पर गहरा आघात है, बल्कि सच बोलने वालों के मनोबल पर भी बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
पत्रकारिता जगत में इस घटना की तीखी प्रतिक्रिया है। कई वरिष्ठ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि—
“जो पत्रकार दूसरों के हक़ के लिए लड़ रहा था, आज वही खुद उत्पीड़न का शिकार हो गया। यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।”
इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम पत्रकार को चुप कराने की कोशिश तो नहीं? मामले की निष्पक्ष जांच और पत्रकार को न्याय दिलाने की मांग लगातार तेज हो रही है।
इस मसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता गुफ्तार अहमद लिखते हैं-
It is deeply tragic & unfortunate that the journalist, who was raising the voice of the poor, has himself become a victim with his home now bulldozed. This act not only causes immense personal suffering but also represents a devastating blow against those who speak truth.
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने ट्वीट किया है-
कल से देख रहा हूँ। कोर्ट से लेकर मीडिया और समाज। मालूम नहीं किसी को दुख भी हुआ या नहीं। ऐसी बर्बरता के साथ लोग राम राज पर भाषण कैसे देते हैं? उन्हें क्या यह सब नहीं दिखता है?
कविश अजीज-
ये जम्मू के पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग हैं। अरफ़ाज़ उन खबरों को लोगों तक पहुंचाते थे जो मेन स्ट्रीम मीडिया छुपाता था।
एक सच्चा पत्रकार जो मजलूम और सच्ची खबरें करता था। जब उसको खरीद नहीं पाए, उसको डरा नहीं पाए तो बिना किसी नोटिस के उसका घर गिरा दिया गया।
दूसरों के घर के बुलडोज होने की खबरें दिखाने वाले अरफ़ाज़ अपने घर की खबर भी दिखा रहे हैं।
एक जर्नलिस्ट हूँ, बिना नोटिस कैसे घर तोड़ सकते है, ये अल्फ़ाज़ है जम्मू के पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग का जो मजलूम लोगों की सच्ची खबरें करता था। दूसरों के घर के बुलडोज होने की खबरें दिखाने वाले अरफ़ाज़ अपने घर की खबर भी नही दिखा पा रहे हैं!
-मोहम्मद कामरान


