लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार की घटिया हरकत!

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी,
5-कालिदास मार्ग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश।

महोदय,
आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैं राजेश कुमार 8 अप्रैल 2021 को सिविल हॉस्पिटल में जांच कराया और 9 अप्रैल 2021 शाम तकरीबन 8:00 बजे मुझे पता चला कि मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है। मैंने तत्काल अपने ऑफिस में सूचना दी उसके बाद मैंने अपनी पत्नी को बताया, मेरी पत्नी ने जब यह सूचना मकान मालिक, जो पत्रकार भी हैं, श्रवण कुमार शुक्ला को बताई तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। मेरी पत्नी से शुक्ला ने कहा कि मैं उसे घर में नहीं घुसने दूंगा जहां जाना है जाए, उसके आधे घंटे बाद मैंने श्रवण शुक्ला को फोन किया, तो उन्होंने मुझे कहा कि देखिए राजेश तुम कोरोना पॉजिटिव हो इसलिए मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूंगा। हॉस्पिटल में एडमिट होना है तो जाओ या कहीं होटल में रहना है रहो लेकिन मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूंगा।

एक तो मेरे ऊपर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने का तनाव और ऊपर से इनका इस तरीके से मुझसे बात करना मैं बहुत तनाव में था, फिर मैं रात कहीं और किसी तरह से गुजारी और सुबह होते ही पैसे और कपड़े मैंने किसी मित्र के थ्रू अपनी पत्नी से मंगवाया। फिर मैं अगले दिन अपने गांव चला गया। वहां होम आइसोलेशन में रहा। फिर श्रवण कुमार शुक्ला मेरी पत्नी को फोन करते हैं कि तुम्हें घर नहीं घुसने दूंगा जब तक तुम लोग जांच रिपोर्ट नहीं दिखाओगे।

इस तरीके से इन्होंने मेरी पत्नी को तनाव दिया व परेशान किया, जबकि मेरे दोनों बच्चे लखनऊ के चौक में ही है, परंतु मेरा होम क्वारन्टीन पूरा हुआ ही नहीं। 19 अप्रैल 2021 को श्रवण शुक्ला का फिर फोन आता है और मेरे प्रति जितना उनको भड़ास निकालनी थी जितना मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करनी थी वह सारा किया। उन्होंने यह भी कहा कि मेरा घर 3 दिन में खाली कर दो। ऐसी स्थिति में बार-बार तनाव देना मुझे बहुत ही कष्ट व पीड़ा दिया और मेरे परिवार को तितर-बितर कर दिया तथा लखनऊ में जो होम आइसोलेशन की सुविधा मिलनी थी जांच दवा उन सब से वंचित रह गया। अपने पैसे से दवा खरीदी। श्रवण कुमार शुक्ला ना तो अपनी जांच कराई ना मेरे बच्चों की जांच होने दी। सिर्फ अपनी ज़िद पर अड़ा रहा।

श्रवण शुक्ला का कहना है कि कोरोनावायरस से अगर मैं बच गया तो मैं अमर हो जाऊंगा, फिर मेरी किसी चीज से मृत्यु नहीं हो सकती है। मैं यह कहना चाहता हूं कि यह बीमारी बहुत डरावनी है लेकिन इतनी भी नहीं है कि इससे ठीक ना हुआ जाए। यदि धैर्य और संयम से इलाज किया जाए तो सब संभव है। मगर जब ऐसे लोग कोरोनावायरस का भय फैलाएंगे और शोषण करेंगे तो जिसे नहीं मरना होगा वह भी मर जाएगा।

माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे निवेदन है कि ऐसे लोगों के प्रति कठोर से कठोर कार्रवाई करवाएं, मैं बहुत परेशान हूं यदि और मेरा शोषण किया गया तो इसके जिम्मेदार श्रवण कुमार शुक्ला होंगे, क्योंकि इन्होंने फोन करके हमको नौकरी से हटवा देने की, प्रदेश में रहने नहीं देंने की धमकी दी है। शुक्ला ने कहा है कि 1 मिनट में फोन करके नौकरी ले लेंगे, 1 मिनट में फोन करके क्या हश्र करूंगा यह तुम जानते नहीं हो, ऐसा कह रहे हैं। मेरा सारा सामान और मेरे दो बच्चे 414/151 सराय मालिखा लखनऊ के मकान में रह रहे थे, लेकिन 4 अप्रैल 2021 की रात 1:00 बजे मुझे उनकी प्रताड़ना के चक्कर में घर छोड़ना पड़ा और आज मैं रोड पर खड़ा हूं। ना मुझे कोई किराए का मकान मिल रहा है ना रहने की कोई जगह है ऐसे में इस इंसान की क्रूरता लोगों तक पहुंचनी चाहिए।

माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे इतना ही निवेदन है कि मैं प्रदेश का एक नागरिक हू, कई वर्षों से प्रतिष्ठित चैनलों में वीडियो जर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हूं, यह मेरी पीड़ा है जो मेरे साथ घटी है, दिल से निकली हुई यह कोई कहानी नहीं है यह वह सत्य है जिसे हर आम आदमी तक पहुंचना चाहिए। जिनको कोविड-19 हो जाता है उनके प्रति पढ़े लिखे लोगों का क्या नजरिया है यह बयां कर रहा हूं। लेकिन वह भूल गए हैं हाथी कितना भी बलवान क्यों ना हो चींटी अगर हाथी के कान में घुस गई तो हाथी को तिलमिलाने के अलावा कुछ नहीं बचता।
घटना से जुड़े सारे तथ्यों सबूत मेरे पास हैं, वक्त आने पर सोशल मीडिया पर शेयर करूंगा।

अपने आपको पत्रकार कहने वाले की सोच इतनी घटिया है इसका प्रमाण मेरे साथ की घटना बयां करता है।

मैं इस घर में कई वर्षों से किराए पर रह रहा था। मुख्यमंत्री जी आपसे एक बार पुनः निवेदन करता हूं कि इनके ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, इन्होंने हमारा शोषण किया है, हमारे परिवार का प्रताड़ना किया है और उन्होंने कोविड-19 प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया है। आपसे न्याय की उम्मीद करता हूं।

प्रार्थी-
राजेश कुमार,
सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट
414/151 सराय माली खा चौक,
लखनऊ, यूपी।

दिनांक 05-05-2021


इस पूरे प्रकरण पर श्रवण की तरफ से वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू ने पक्ष भेजा है, कृपया इसे भी पूरा पढ़ें-

लखनऊ के पत्रकार श्रवण शुक्ल पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और एकपक्षीय हैं!

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Comments on “लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार की घटिया हरकत!

  • govind pant raju says:

    भड़ास में सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट राजेश कुमार द्वारा वरिष्ठ पत्रकार श्रवण शुक्ल पर लगाए गए आरोपों के बारे में पढ़ा। ये आरोप पूरीतरह निराधार व् एकपक्षीय हैं। सच्चाई यह है कि राजेश कई वर्ष पूर्व श्रवण के पुश्तैनी घर में घरेलू नौकर की तरह आया था। श्रवण के पिताजी के बाद वह श्रवण की दो बहनों के घर पर भी रहकर काम करता रहा। बाद में श्रवण जब लखनऊ में ईटीवी के ब्यूरो प्रमुख थे तब उन्होंने राजेश को अपने दफ्तर में कार्यालय सहायक के तौर पर रह लिया। उन दिनों भी राजेश उन्ही के साथ उनके घर में ही रहता था।जब ईटीवी का विस्तार होना शुरू हुआ तो श्रवण ने पहले अपने घर पर काम करने वाले श्रवण वर्मा को कैमरा सिखवा कर कैमरामैन रखवा दिया। इसके बाद उन्होंने कम पढ़ा लिखा होने के बावजूद राजेश को भी कैमरा सिखवा कर उसे भी कैमरामैन बनवा दिया। इस दौरान आठ वर्ष से भी अधिक की अवधि तक राजेश श्रवण के घर पर ही रहता रहा। उसके खाने कपड़े आदि की जिम्मेदारी शुक्ल परिवार ही उठाता रहा।

    इसके बाद राजेश का तबादला आगरा हो गया। आगरा में बहुत परेशनियों का सामना करने के बाद श्रवण ने ही राजेश को फिर से लखनऊ बुलवा लिया। इस बीच श्रवण खुद लखनऊ छोड़ चुके थे लेकिन आगरा से वापस आने के बाद उन्होंने राजेश को अपने सराय माली खां वाले घर में रहने की जगह दे दी ,यह घर उन दिनों खाली था।इसके बाद पिछले पांच साल से राजेश इसी घर में रह रहा था।

    राजेश का यह आरोप बिलकुल बेबुनियाद है कि वह श्रवण शुक्ल के घर पर किराएदार की हैसियत से रहता था। उसे तो परिवार से पुराने संबंधों के कारण खाली पड़े घर में रहने की जगह दी गयी थी।बाद में श्रवण स्वयं भी परिवार सहित इसी घर में रहने के लिए आ गए थे और अभी भी वहीँ रह रहे हैं।

    जहाँ तक 8 अप्रैल वाली घटना की बात है वह भी राजेश ने अपने शिकायती पत्र में पूरी तरह झूठ और तथ्यों को तोड़मरोड़ कर लिखी है। श्रवण शुक्ल के अनुसार , ” उस दिन की घटना कुछ इस तरह से हुयी थी : 7 अप्रैल को राजेश ऑफिस से जल्दी घर आ गया था और बिना कुछ बात किये सीधा ऊपर चला गया। अमूमन ऐसा होता नहीं था कि राजेश थोड़ी देर बात किये बिना ऊपर चला जाता हो । रात में मैंने जब उससे बुलाया तो उसने कहा भय्या पेट ख़राब था इसीलिये ऑफिस से चला आया ।मैंने जब उसकी आँखें देखी तो वे लाल थी। मैंने उसको बोला बेटा आप तुरंत कल अपना टेस्ट करवायें , ये सब कोरोना के लक्षण लग रहे हैं।

    8 अप्रैल को में अपने एक दोस्त डॉ शरद झिंगरन, डेंटल सर्जन, गुवाहाटी के साथ माँ विध्यवासिनी देवी के दर्शन को मिर्ज़ापुर गए थे। दोनों लोग 9 अप्रैल को लगभग 7 बजे शाम को लौटे। 8 बजे के करीब राजेश का फ़ोन आया की वह कोरोना पॉजिटिव हो गया है। इस पर उसकी वाइफ भागते हुए नीचे आई और मेरे दोस्त, दो बेटों और मेरे नौकर धर्मपाल के सामने कहती हैं कि भैय्या उनसे कह दीजिये यहाँ न आयें। यहाँ हमारे और आपके बच्चे हैं ,सबको कोरोना हो जायेगा। कह दीजिये घर चले जायें । मैंने यही राजेश को बोला कि तुम्हारी पत्नी ऐसा कह रही हैं। आप बेटा या तो अस्पताल में भर्ती हो जाओ, मैं बेड का इंतज़ाम करता हूँ। राजेश ने कहा कि भैय्या इन्फेक्शन माइल्ड है। मैं घर (गाँव ) चला जाता हूँ । मैंने उससे कहा कि जो पैसे या किसी और चीज की जरूरत हो तो बता देना । इसके कुछ दिन बात राजेश की पत्नी पंचायत चुनाव के लिए बच्चों को लेकर गांव चली गयी थी।

    इस बात के चार गवाह हैं और दो फ़ोन कॉल जो अपनी जांच में स्थानीय पुलिस निकलवा सकती है।जिससे इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि घर न आने की बात राजेश की पत्नी ने कही थी न कि मैंने। दरसल राजेश इन दिनों ए एन आई में कैमरामैन के पद पर है और ए एन आई उत्तर प्रदेश सरकार की अधिकृत न्यूज एजेंसी के रूप में काम करती है। राजेश भी प्रायः मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में कैमरामैन के तौर पर मौजूद रहता है। सम्भवतः इसी वजह से उसे यह गलतफहमी हो गयी है कि वह जो चाहे करवा सकता है। राजेश कई साथी कैमरामैनों से यह भी कहता था कि वो ये घर नहीं कभी छोड़ेगा क्योंकि उसकी पहुंच महाराज जी (चीफ मिनिस्टर) तक है। ”

    जो तस्वीरें राजेश ने भड़ास न्यूज़ में भेजी हैं वो पांच साल पहले की हैं जब वो आगरा से लखनऊ फैमली को शिफ्ट कर रहा था और उस समय श्रवण ने उसे अपने घर में रहने की जगह दी थी।इन तस्वीरों में जो फर्नीचर ,कूलर आदि चीजें दिख रहीं हैं वह भी श्रवण के घर की हैं कि राजेश की । राजेश के सामन में तो सिर्फ गठरियाँ हैं। श्रवण के घर में CCTV लगे हैं, वो खुद घर छोड़ कर गया लेकिन ट्विस्ट ये दिया कि उसे और उसकी फैमली को घर से निकाला गया। CCTV फुटेज में सब साफ़ हैं। ये सारी बातें उसने इन्क्वायरी अफसर के सामने भी स्वीकार की हैं।

    चूँकि अब इस मामले में पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है इसलिए सच सामने आ ही जाएगा। लेकिन इस तरह के आरोपों से श्रवण शुक्ल की छवि को चोट पहुंचाने की जो घटिया कोशिश की गयी है वह बहुत घृणित है। श्रवण लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और पत्रकार के रूप में उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इण्डिया से लेकर टीवी और डिजिटल मीडिया में अच्छा ख़ासा नाम कमाया है। उनकी छवि एक पेशेवर और प्रतिबद्ध पत्रकार की रही है। लखनऊ के तमाम पत्रकार जानते हैं कि वे लोगों की मदद में किस तरह सबसे आगे रहते हैं।

    ( राजेश के घर छोड़ कर जाते समय का cctv फुटेज संलग्न है। )

    गोविन्द पंत राजू

    Reply
    • भलाई का ज़माना नहीं है। जिस पत्तल में खाओ उसी में छेद करो।
      श्रवण जी पर इस तरह आरोप लगाने से पहले उसको सोचना चाहिए कि जिस आदमी ने उसको शरण दी। घर में बच्चे की तरह रखा, उसके साथ ऐसा व्यवहार। ये घोर कलियुग है, इससे पता चलता है।
      इतना कुछ होने के बाद राजेश को वहां बिल्कुल नही रहने देना चाहिए। हालांकि मुझे उसके बच्चों से सहानुभूति है।

      Reply

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