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काशी पत्रकार संघ चुनाव: जहां दोस्त बने दुश्मन और ऐरे-गैरे बने पत्रकार

वाराणसी। काशी पत्रकार संघ का चुनाव काफी दिलचस्प मोड़ पर है। ये चुनाव कई मायने में अलग है। इस चुनाव में कई दोस्त भी दुश्मन बन गये हैं। इनमें कुछ एसे भी हैं जो पहले तक एक-दूसरे के ऊपर जान छिड़कते और मरते-मिटने के लिए तैयार रहते थे। चुनाव में कई ऐसे लोग भी पदाधिकारियों को चुनेंगे, जिनका पत्रकारिता से कभी नाता ही नहीं रहा। फर्जी अभिलेखों और काशी पत्रकार संघ के निवर्तमान पदाधिकारियों की मेहरबानी से दर्जनों लोग सदस्य बने हैं।

वाराणसी। काशी पत्रकार संघ का चुनाव काफी दिलचस्प मोड़ पर है। ये चुनाव कई मायने में अलग है। इस चुनाव में कई दोस्त भी दुश्मन बन गये हैं। इनमें कुछ एसे भी हैं जो पहले तक एक-दूसरे के ऊपर जान छिड़कते और मरते-मिटने के लिए तैयार रहते थे। चुनाव में कई ऐसे लोग भी पदाधिकारियों को चुनेंगे, जिनका पत्रकारिता से कभी नाता ही नहीं रहा। फर्जी अभिलेखों और काशी पत्रकार संघ के निवर्तमान पदाधिकारियों की मेहरबानी से दर्जनों लोग सदस्य बने हैं।

काशी पत्रकार संघ का चुनाव रविवार को होना है। इसी दिन मतगणना भी होनी है। अध्यक्ष पद के लिए प्रमिला तिवारी मैदान में हैं तो कभी इनके खास माने जाने वाले सियाराम यादव भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। पहले ये दोनों पत्रकार एक-दूसरे के पर्याय माने जाते थे। न जाने एसा क्या हो गया कि ये एक दूसरे को पछाड़ने में एड़ी से चोटी का जोर लगा रहे हैं। इनके अलावा फोटो जर्नलिस्ट बीबी यादव और सुभाष सिंह भी अध्यक्ष पद के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं। अध्यक्ष पद की दावेदार प्रमिला तिवारी कहती हैं कि उन्हें नीचा दिखाने के लिए सियाराम यादव मैदान में उतरे हैं। आज तक कोई महिला संघ की अध्यक्ष नहीं बनी थी। श्री यादव ने खुद ही उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन संबंधों को ताक पर रखकर मैदान में उतर गये।

सुश्री तिवारी बताती हैं कि पत्रकारपुरम आवासीय योजना समित के अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने यादव का नाम सुझाया था। पत्रकारपुरम में रहने वाले सभी सदस्य उन्हें अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने यह कहकर कोई पदाधिकारी बनने से इनकार कर दिया था कि वह इस जिम्मेदारी नहीं उठा सकेंगे। वह सवाल उठा रही हैं कि श्री यादव जब समिति का अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं थे तो अब संघ के अध्यक्ष पद के लिए किस मुंह से चुनाव लड़ रहे हैं।

अध्यक्ष पद के लिए फोटो जर्नलिस्ट बीबी यादव और वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सिंह अपने समीकरणों पर मैदान पर हैं। दोनों का दावा है कि चुनाव में वे ही जीतेंगे। इनके मैदान में उतरने से मुकाबाला काफी दिलचस्प हो गया है। अध्यक्ष पद की दौड़ में ये दोनों दावेदार कहीं से पीछे नहीं हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए राधेश्याम कमल, वीरेंद्र श्रीवास्तव, कमल नयन मधुकर, जय प्रकाश श्रीवास्तव भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें से तीन दावेदार उपाध्यक्ष चुने जाएंगे।

मंत्री के दो पदों के लिए देव कुमार केसरी, आनंद कुमार मौर्य, उमेश कुमार गुप्ता अपना भाग्य आजमा रहे हैं। सीधा मुकाबला कोषाध्यक्ष पद के लिए हो रहा है। इस पद के लिए जाने-माने क्राइम रिपोर्टर पवन कुमार सिंह और रेलवे रिपोर्टर दीनबंधु राय के बीच चुनावी जंग हो रही है। इनके अलावा कार्यकारिणी के दस पदों के लिए चौदह सदस्य मैदान में हैं।

चुनाव में पत्रकार योगेश गुप्ता पप्पू ने अपना पैनल बनाया है। वे सतना से ही चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। खुद को जनवार्ता का पत्रकार बनाने वाले डॉ. राजीव रंजन की सदस्यता पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है। शहर के जाने-माने पत्रकार और कई सालों से संघ के सदस्य रहे एलबीके दास को संगठन से बाहर करने और सहारा के स्थानीय संपादक को सदस्यता न देने का मामला इस चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन गया है। संघ का चुनाव कराने और मतगणना करने वाले कुछ सदस्यों की नीयत पर भी सवालिया निशान लगने लगा है।

 

काशी पत्रकार संघ के एक सदस्य की रिपोर्ट।

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