हिंदी का एक शब्द है ‘प्राचीर’ जो हिंदी मीडिया द्वारा साल में केवल एक अवसर पर इस्तेमाल किया जाता है – जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री लाल क़िले से देश को संबोधित करते हैं।
इस बार भी 15 अगस्त को यह शब्द इस्तेमाल किया जाएगा। बल्कि कुछ साइटों पर तो इस्तेमाल होने भी लगा है मसलन News Nation की साइट पर लिखा है- लाल किले ‘की’ प्राचीर से प्रधानमंत्री करेंगे संबोधन।
इस हेडलाइन में कोई गड़बड़ी नहीं है सिवाय इसके कि प्राचीर स्त्रीलिंग नहीं, पुल्लिंग शब्द है। इसे लिखा जाना चाहिए – लाल किले ‘के’ प्राचीर से प्रधानमंत्री करेंगे संबोधन।
लेकिन हम इसके लिए न्यूज़ नेशन के कॉपी एडिटर को दोष नहीं दे सकते क्योंकि हिंदी की बड़ी-बड़ी वेबसाइटें ज़माने से इसे स्त्रीलिंग लिख रही हैं। प्रधानमंत्री की सरकारी वेबसाइट pmindia.gov.in पर भी ‘की’ प्राचीर ही लिखा जाता है। केवल दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स, जो भाषाई शुद्धता के मामले में बाक़ी से थोड़ा अधिक सजग हैं, उसे पुल्लिंग की तरह लिखते आए हैं। हो सकता है, इस बार भी वे उसे पुल्लिंग ही लिखें यानी ‘के’ प्राचीर, न कि ‘की’ प्राचीर।
वैसे मुझे लगता है कि जो कॉपी एडिटर इस तरह की ख़बरें बनाते हैं, उनको शायद मालूम ही न हो कि प्राचीर का मतलब क्या है। कारण, प्राचीर एक कठिन शब्द है और बहुत कम चलता है। दिक़्क़त यह है कि इसका अंग्रेज़ी पर्याय (RAMPARTS/रैंपार्ट्स) और भी कठिन है वरना हिंदी मीडिया कब का उसे अपना चुका होता।
‘प्राचीर’ संस्कृत का शब्द है। इसका मतलब है वह चहारदीवारी जो किसी क़िले या शहर की सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ़ बनाई जाती है। यह दीवार बहुत मोटी होती है और उसपर आसानी से चला जा सकता है। लाल क़िले की दीवार भी ऐसी ही है जहाँ से हर साल प्रधानमंत्री अपना भाषण करते हैं। इसीलिए कहा/लिखा जाता है लाल क़िले की/के प्राचीर से प्रधानमंत्री… देखते हैं, इस बार कितने संस्थान उसे स्त्रीलिंग लिखते हैं और कितने पुल्लिंग।
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