जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में पहलगाम आतंकी हमले को एक “सुरक्षा चूक” स्वीकार करते हुए उसकी पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है। उन्होंने कहा कि “जो कुछ भी पहलगाम में हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। मासूम नागरिक मारे गए। मैं इस चूक की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।”
मनोज सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान प्रायोजित साजिश थी और यह मान लेना गलत होगा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति फिर से पहले जैसी अस्थिर हो गई है।
इंटरव्यू के मुख्य बिंदु:
हमला और चूक: एलजी ने बताया कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वहां नियमित रूप से सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं थी और न ही वहां सुरक्षा के स्थायी इंतज़ाम थे। यही इस हमले की बड़ी कमजोरी बनी।
पाकिस्तान को चेतावनी: उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि किसी भी आतंकी हमले को अब ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा। पाकिस्तान की एयरबेस और आतंकी ठिकानों पर भारत की कार्रवाई ने एक कड़ा संदेश दिया है।
स्थानीय आतंकियों की भूमिका: एलजी सिन्हा ने बताया कि इस साल सिर्फ एक स्थानीय युवक आतंकी संगठन में भर्ती हुआ है, जबकि पहले यह संख्या 150-200 हुआ करती थी। हालांकि यह भी स्वीकारा कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क अब भी हमलों की योजना बना रहे हैं।
पर्यटन पर असर और सुधार: उन्होंने कहा कि हमले के बाद पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन बाबा बर्फानी (अमरनाथ यात्रा) और सरकारी प्रयासों की बदौलत अब स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक लौट रहे हैं।
पर्यटन स्थलों को दोबारा खोलने की योजना: उन्होंने बताया कि कुछ बंद किए गए पर्यटन स्थलों को दोबारा खोल दिया गया है और बाकी को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा, जिसमें हर स्थल के लिए एक मज़बूत सुरक्षा योजना बनाई जा रही है।




