भास्कर में छपा ये विज्ञापन और अंधविश्वास-पाखंड बढ़ाते मीडिया घराने

दैनिक भास्कर अखबार के front page पर ये विज्ञापन छपा हैl एक ही एडिशन
की कीमत कम से कम डेढ़-दो लाख रूपये तो होगी, और ऐसे ना जाने कितने एडिशन
में ये विज्ञापन छपा हैl मेरी समझ में ये नहीं आ रहा कि इतने महान
बाबाओं के समागमों और प्रवचनों के बाबजूद भी देश में असमानता, हिंसक
वारदातें, अपराध, गरीबी लगातार बढ़ते ही जा रहे हैंl धर्म के नाम पर
लोगों को उल्लू बनाते रहो और अपनी दुकान चलाते रहोl

विज्ञापन में दिखाये गए ‘ब्रह्माण्ड रत्न’ को किसी गरीब झुग्गी बस्ती में ही दे देते
तो कितने गरीब लोगों का भला होताl राष्ट्रपति जी तो स्वयं ही देश के
सर्वोच्च पद पर आसीन हैं उन्हें किस बात की कमी? उन्हें इस ‘ब्रह्माण्ड
रत्न’ के क्या जरूरत? विज्ञापन में ये भी दावा किया गया है कि इस कथित
‘ब्रह्माण्ड रत्न’ को साक्षात श्री हरि ने देवराज इंद्र को प्रदान किया
थाl कहते हैं कि जिस देश की प्रजा जैसी होती है उसे वैसा ही राजा मिल
जाता हैl इसमें कमी हम भारतीयों की भी नहीं हैl

किसी गरीब ने 10 रुपये मांगे तो उसे मेहनत का पाठ पढ़ा देंगे लेकिन मंदिर –
मस्जिदों में, बाबाजी के समागमों में भले ही हज़ारों खर्च हो जाएँ.. कोई
चिंता नहींl कोई इन बाबाओं से ये पूछे कि तुमने इन तथाकथित ‘समागमो’ में
कितने गरीब / दिहाड़ी मजदूरों का भला किया है? या सारी सीटें केवल मोटी
फीस देने वालों के लिए ही रिजर्व की हुई हैं? कार्ल मार्क्‍स ने सही कहा
था धर्म वाकई जनता की अफीम हैl कभी कभी तो सोचता हूँ कि बाबाजी बन
जाऊं..ना टैक्स का लफड़ा, ना रजिस्ट्रेशन का झंझट, और एक से एक नेता,
अफसर, डॉन सब तुम्हारे चरणों मेंl मेरे ख्याल से सरकारों और
विश्विद्यालयों को नए कोर्स लांच करने चाहिए – ‘वन ईयर डिप्लोमा इन
बाबाजी’,  ‘डिग्री इन सम्पूर्ण साधू’, ‘मास्टर डिग्री इन अघोरी महात्मा’

लेखक लकी नरेश भरतपुर (राजस्थान) के रहने वाले हैं. उनसे संपर्क 09530404343 के जरिए किया जा सकता है.



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Comments on “भास्कर में छपा ये विज्ञापन और अंधविश्वास-पाखंड बढ़ाते मीडिया घराने

  • धीरज says:

    अखबारों और मीडिया से पुराना नाता है इनका.. पहले ये बाबाजी मोटापा कम करने की दवा बेचते थे अरिहंत क्लीनिक के नाम से.. तब इनका नाम डॉक्टर के कुमार होता था (हालांकि मेडिकल की पढ़ाई कभी नहीं की इन्होंने.. ये हनुमान नगर में वॉर्ड ब्वॉय हुआ करते थे) तब भी तमाम अखबारों में पूरे पन्ने या आधे पन्ने का विज्ञापन देकर ग्राहक फंसाया करते थे.. पत्रकारों को महंगे तोहफे भी देते थे.. अब बाबागिरी में तो अमेरिका और लंदन तक घुमा लाते हैं.. अरबों की कमाई है इनकी.. आपको बस एक पन्ने के विज्ञापन की कीमत दिख रही है?

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