अनिल जैन-
दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे की कथित अप्रकाशित किताब प्रसारित करने के खिलाफ केस दर्ज किया है।
इस सिलसिले में किताब के प्रकाशक ‘पेंगुइन’ ने सफाई दी है या यूं कहें कि उससे ‘सफाई’ दिलवाई गई है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
इस मामले में राहुल गांधी ने सबूत दिया है कि खुद जनरल नरवणे ने अपनी किताब के प्रकाशित होने की सूचना ट्वीट की थी।
जनरल नरवणे ने 2023 में ट्विटर पर पोस्ट किया था, “हैलो दोस्तों, मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें। पढ़ने का आनंद लें।”
राहुल गांधी का कहना है, “या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मैं पूर्व सेनाप्रमुख पर विश्वास कर रहा हूं। क्या आप नरवणे के बजाय पेंगुइन पर विश्वास करेंगे?”
सवाल यह है कि पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब से सरकार क्यों डर रही है?
नवीन कुमार-
पेंगुइन प्रकाशन भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे को झूठा बोल रहा है? कह रहा है कि हमने उनकी किताब की एक भी प्रति छापी ही नहीं है। न तो इसकी कोई डिजिटल कॉपी है। जबकि जनरल नरवणे ने ख़ुद 2023 में ट्वीट किया था कि मेरी किताब उपलब्ध है और पाठक इसे ख़रीदकर पढ़ सकते हैं। उन्होंने इसका लिंक भी दिया था।
ख़ुद पेंगुइन रैंडम हाउस ने दावा किया है कि जनरल नरवणे की किताब “फ़ोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” की अनाधिकारिक प्रतियां लीक हो चुकी हैं और उसका सर्कुलेशन हो रहा है।
अब कमाल की बात है कि एक तरफ़ तो पेंगुइन ख़ुद कह रहा है हमने किताब छापी ही नहीं। न प्रिंट न डिजिटल। और दूसरी तरफ़ वो ख़ुद ही बोल रहा है कि हमारी किताब लीक हो गई है। इससे भी कमाल की बात ये है कि इसे लेकर दिल्ली पुलिस ने झटपट FIR भी कर डाली। अब ये साबित करने की तैयारी है कि राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की फर्जी किताब की प्रति संसद भवन में लहराई।
पेंगुइन ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि फ़ोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी की कोई भी कॉपी, पूरी या कुछ हिस्सा, प्रिंट में या ऑनलाइन, कहीं भी मिलता है तो उसे कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा। इसपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस देश में पहली बार एक प्रकाशन समूह लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को अपनी किताब को लेकर अदालत में घसीटने की तैयारी कर रहा है।
SHAME SHAME!!!




