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शर्मनाक : परिचित महिला का बयान रिकॉर्ड कर उसे मुरथल बलात्कार विक्टिम बताते हुए चला दी थी स्टोरी

पवन कुमार बंसल
मुरथल सामूहिक बलात्कार, मीडिया कवरेज और मैं :  आज मैं शर्मिंदा हूँ. चालीस वर्ष से पत्रकरिता में हूँ. जब गवर्नमेंट कॉलेज जींद में पड़ता था तभी इंडियन एक्सप्रेस अखबार का रिपोर्टर बन गया. इस दौरान हरियाणा की राजनीति पर दो किताब और खोजी पत्रकारिता पर एक किताब लिखी। स्वर्ण जयंती में ‘हरियाणा की राजनीति’ और ‘हरियाणा पुलिस : पर्दे के पीछे का सच’ नामक दो किताबे लिख रहा हूँ. ‘गुस्ताखी माफ़ हरियाणा’ नाम से व्हाट्सअप पोर्टल भी चला रखा है. अपने पेशे पर मुझे अब तक बहुत गर्व था। लेकिन आज मैं शर्मिंदा हूँ। कथित मुरथल बलात्कार कांड की कवरेज को लेकर. एक अंग्रेजी न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टर ने माना है कि उसने अपनी किसी परिचित महिला का बयान रिकॉर्ड कर उसे मुरथल की बलात्कार विक्टिम बता कर स्टोरी कर दी। सर शर्म से झुक गया। न्यूज़ पोर्टल ही बदनाम हो गए। वैसे जाने माने पत्रकारों द्वारा फर्जी स्टिंग आपरेशन करना और दूसरों की खबरों व लेखों को अपने नाम से छापना आम बात है। अंग्रेजी के एक प्रतिष्ठित अख़बार के सम्पादक ने कहीं से मैटर चुरा कर अपने नाम से छाप लिया था. एक हिंदी अख़बार के सम्पादक ने जो अब भाजपा का नेता है, किसी पत्रकार का लेख अपने नाम से छाप लिया था। मामला प्रेस कौंसिल तक गया था।

पवन कुमार बंसल
मुरथल सामूहिक बलात्कार, मीडिया कवरेज और मैं :  आज मैं शर्मिंदा हूँ. चालीस वर्ष से पत्रकरिता में हूँ. जब गवर्नमेंट कॉलेज जींद में पड़ता था तभी इंडियन एक्सप्रेस अखबार का रिपोर्टर बन गया. इस दौरान हरियाणा की राजनीति पर दो किताब और खोजी पत्रकारिता पर एक किताब लिखी। स्वर्ण जयंती में ‘हरियाणा की राजनीति’ और ‘हरियाणा पुलिस : पर्दे के पीछे का सच’ नामक दो किताबे लिख रहा हूँ. ‘गुस्ताखी माफ़ हरियाणा’ नाम से व्हाट्सअप पोर्टल भी चला रखा है. अपने पेशे पर मुझे अब तक बहुत गर्व था। लेकिन आज मैं शर्मिंदा हूँ। कथित मुरथल बलात्कार कांड की कवरेज को लेकर. एक अंग्रेजी न्यूज़ पोर्टल के रिपोर्टर ने माना है कि उसने अपनी किसी परिचित महिला का बयान रिकॉर्ड कर उसे मुरथल की बलात्कार विक्टिम बता कर स्टोरी कर दी। सर शर्म से झुक गया। न्यूज़ पोर्टल ही बदनाम हो गए। वैसे जाने माने पत्रकारों द्वारा फर्जी स्टिंग आपरेशन करना और दूसरों की खबरों व लेखों को अपने नाम से छापना आम बात है। अंग्रेजी के एक प्रतिष्ठित अख़बार के सम्पादक ने कहीं से मैटर चुरा कर अपने नाम से छाप लिया था. एक हिंदी अख़बार के सम्पादक ने जो अब भाजपा का नेता है, किसी पत्रकार का लेख अपने नाम से छाप लिया था। मामला प्रेस कौंसिल तक गया था।

चंडीगढ़ से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार ने मुरथल में सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाकर खबर और संपादकीय छापे थे। अब उन्हें इसकी नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए प्रमुखता से माफ़ी छापनी चाहिए। जब चौधरी चरण सिंह और देवीलाल का विवाद चल रहा था तब इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने गलत सूचना के आधार पर देवीलाल की कांग्रेस से सांठगाठ को लेकर गलत खबर छाप दी थी। लेकिन जब असली बात पता चली तब अरुण शौरी ने बाकायदा ‘शोरीस अपोलोजी’ नामक हैडिंग से माफ़ी मांगते हुए खबर छापी थी। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने बयान दिया था कि मामले में संज्ञान लेने वाले पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के जज न्यायमूर्ति संघी साहिब ने उन्हें कहा था के वे त्रिपुति यात्रा से वापिस आकर उन्हें मुरथल कांड के बारे में कई फैक्ट बातएंगे। यदि जज साहिब को कुछ पता था तो वे मंत्री को क्यों बताते,  मेरे तो समझ नहीं आ रहा। फिर यदि जज साहिब ने शर्मा जी को निजी बात में कुछ बता दिया था तो पंडित जी ने उसे सार्वजनिक क्यों किया. अब शर्मा जी भी माफ़ी मांगे।

जिन्हें पुलिस ने बलात्कार के आरोप में पकड़ा था,  उनका क्या होगा. उनसे कौन माफ़ी मांगेगा और क्या माफी मांगने से काम चल जायेगा. जाट समाज मांग कर रहा है कि उन्हें बदनाम करने के लिए मीडिया को जाट समाज से माफ़ी मांगनी चाहिए।  माफ़ी जाट समाज से ही क्यों। माफ़ी तो पूरे हरियाणा की जनता से मांगनी चाहिए जिसका नाम देश ही नहीं विदेश में भी बदनाम हुआ. आरक्षण में  हुई मौतें और प्रॉपर्टी को जलाना इसकी जुडीशियल जाँच होनी चाहिए. सरकार ने कैप्टन अभिमन्यु का मकान जलाने की जाँच तो सीबीआई को दे दी. बाकि मामलों की क्यों नहीं. मुख्यमंत्री मनोहर लाल
ने कहा कि वे रोहतक में फंसे जापान के नागरिकों को सुरक्षित निकालने को लेकर चिंतित थे। रोहतक के डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि वे सारी रात कैप्टन अभिमन्यु के परिवार को सुरक्षित रोहतक से  निकालने के लिए एयरपोर्ट से सम्पर्क करते रहे। भाई सरकार को जापान के नागरिकों और अभिमन्यु के परिवार की ही चिंता थी। क्या रोहतक के नागरिकों का कोई माई बाप नहीं था? रोहतक से विधायक जनाब मनीष ग्रोवर ने कहा कि गोधरा कांड के बाद नरेंद मोदी पन्द्रह साल गुजरात के चीफ मिनिस्टर रहे। अब मनोहर लाल भी पंद्रह साल चीफ मिनिस्टर रहेंगे। मनोहर लाल ने खुश होकर उन्हें मंत्री बना दिया।

Pawan Bansal
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