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आज के अखबार : नहीं बता रहे कि मुख्यमंत्रियों का चयन नहीं हुआ, प्रधानमंत्री विदेश गये, यहां क्या चल रहा है

संजय कुमार सिंह

आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीत लिया है। उसे प्रचंड जीत कहा जा रहा है और उसे दिल्ली में सरकार बनानी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेश दौरे पर हैं। नरेन्द्र मोदी के नाम पर और नेतृत्व में चुनाव लड़ने वाली भाजपा ने इस बार मुख्यमंत्री के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी और ना ही मणिपुर में उसके पास कोई विकल्प था। इसलिए अब जब एन विरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है तो भाजपा अभी तक कोई नाम तय नहीं कर पाई है। यही हाल दिल्ली का है। नवोदय टाइम्स ने भले लिखा है कि पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे, ‘प्रवेश वर्मा और उभरे’ लेकिन भाजपा ने अभी तक कोई नाम तय नहीं किया है और अखबारों ने यह बात सीधे नहीं बताई है। अखबारों ने यह जरूर बताया है कि राष्ट्रपति भी संगम में आस्था की डुबकी लगा आईं। भारी भीड़ के कारण आम लोगों को अगर मजबूरन वापस लौटना पड़ रहा है तो सरकार उनके लिए कोई व्यवस्था करने की बजाय वीआईपी व्यवस्था कर पा रही है। कुम्भ का राजनीतिक मकसद स्पष्ट है और इसीलिये राष्ट्रपति भी हो आईं और आज उसकी खबर पहले पन्ने पर है।

नवोदय टाइम्स ने लंबे जाम की तस्वीर के साथ लिखा है, महकुंभ : प्रयागराज से जबलपुर तक जाम ही जाम। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि प्रयागराज के चारो ओर तीन सौ किलोमीटर तक जाम ही जाम है। लेकिन  सरकारी स्तर पर किसी ने कहा हो या कोई अपील की गई हो कि व्यवस्था नहीं है, मत आइये तो वह मुझे नहीं दिखा। उल्टे मोहल्ले में, कुम्भ चलें का पोस्टर लगा हुआ है। दो महिलाओं की बात-चीत में एक ने कहा कि उसने कुम्भ जाने की योजना रद्द कर दी है तो दूसरी आश्चर्य कर रही थी कि रद्द क्यों कर दिया, कुछ दिन बाद चली जाती। यह सब तब है जब प्रयागराज के लोग कह रहे हैं कि वे घरों में कैद हो गये हैं और न तो शहर में निकल सकते हैं और ना शहर से बाहर जा सकते हैं। निश्चित रूप से इसे ठीक किया जाना चाहिये पर ऐसी कोई कोशिश नहीं है और ना ऐसी कोई खबर कि कोशिश नहीं है या ऐसी जरूरत है।  

आइये, पहले देख लें कि ऐसी हालत में आज के अखबारों की लीड क्या है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप होगा तैयार। उप शीर्षक है, पेरिस पहुंचे प्रधानमंत्री, आज एआई पर शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक, पहले बता चुका हूं, प्रवेश और उभरे, महिला को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चा। कहने की जरूरत नहीं है कि यह भाजपा की घोषणा नहीं, अटकल है। टेलीग्राफ की लीड का फ्लैग शीर्षक है, सेना प्रमुख और वायु सेना प्रमुख की संयुक्त उड़ान ने चौंकाया। मुख्य शीर्षक है, प्रमुखों ने संयुक्त उड़ान भरकर सुरक्षा का उल्लंघन किया। नई दिल्ली डेटलाइन से इमरान अहमद सिद्दीकी की बाई लाइन वाली खबर है, सैन्य दिग्गजों ने सोमवार को कहा कि रविवार को एक लड़ाकू विमान में सेना और वायु सेना प्रमुखों की संयुक्त उड़ान, इसपर केंद्रित तमाम प्रचार के बावजूद, सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। सेना के दिग्गजों ने सोमवार को यह बात कही। पूर्व लेफ्टिनेंट-जनरल एचएस पनाग ने एक्स पर पोस्ट किया, अच्छी तस्वीरों का मौका था पर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 1963 से लागू नियमों का उल्लंघन था। इसके अनुसार सेना प्रमुखों को तो छोड़िये, वरिष्ठ अधिकारियों को भी एक साथ नहीं उड़ान भरना चाहिये। ये नियम तब बनाये गये थे जब एक पायलट के अलावा दो लेफ्टिनेंट जनरल, एक मेजर जनरल, एक एवीएम (एयर वाइस मार्शल) और एक ब्रिगेडियर की जान चली गई थी। उन्होंने 23 नवंबर 1963 को पुंछ में हुई एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा। इसमें कोई भी जीवित नहीं बचा था।” वे जिस नियम की बात कर रहे थे वह तभी बनाए गए थे।

खबर के अनुसार, एयर चीफ मार्शल, एपी सिंह और जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बेंगलुरु में एयरो इंडिया शो 2025 की पूर्व संध्या पर देश में बने हल्के लड़ाकू विमान तेजस में 45 मिनट तक उड़ान भरी थी, जो इतिहास में पहली बार हुआ। इसपर प्रतिक्रिया जताते हुए रिटायर कर्नल अमित कुमार ने व्यंग किया, “नियम मूर्खों के लिए हैं सर… ऐसी मानसिकता वाले लोग हमारे देश में प्रगति कर रहे हैं।” एक पूर्व ब्रिगेडियर ने द टेलीग्राफ को बताया, “सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, दोनों प्रमुखों को एक ही वाहन में जमीन पर एक साथ यात्रा करने की भी अनुमति नहीं है।” रविवार की साझा उड़ान के बाद, जब वायु सेना प्रमुख ने सेना प्रमुख को अपने यात्री के रूप में लेकर तेजस उड़ाया, तो जनरल द्विवेदी ने इसे अपने जीवन का “सर्वश्रेष्ठ क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि अनुभव के बाद उन्हें वायुसेना में शामिल न होने का पछतावा हुआ। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी लीड से बताया है कि प्रधानमंत्री ने दो देशों, फ्रांस और अमेरिका की यात्रा शुरू की। मुख्य शीर्षक है, ट्रम्प ने स्टील, एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी, डंपिंग की चिन्ता बढ़ी। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, ट्रम्प के टैरिफ से बचने की कोशिश में भारत हाल की शुल्क कटौतियों का उल्लेख करेगा।

हिन्दू की लीड का शीर्षक है, बिरेन के इस्तीफे के बाद भाजपा मणिपुर में नए मुख्यमंत्री की तलाश में। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने फ्रांस, अमेरिका का दौरा शुरू किया तो एआई, संबंधों पर फोकस। दि एशियन एज का शीर्षक है, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की संभावना क्योंकि भाजपा सहमति से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं ढूंढ़ पाई। आप जानते हैं कि मणिपुर के हालात कई दो साल से खराब चल रहे हैं। भाजपा की सरकार स्थिति सुधारने के लिए कुछ नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री तक नहीं बदला और प्रधानमंत्री मणिपुर गये भी नहीं। ऐसे में पार्टी की प्रशासनिक क्षमता और योग्यता का मुद्दा अपनी जगह है। अब जब विकल्प नहीं मिल रहा है तो भी इसकी चर्चा होनी चाहिये पर मीडिया यह सब नहीं करता है और भाजपा नरेन्द्र मोदी की प्रचारित छवि तथा 56 ईंची के सीने जैसे  दावे पर चुनाव जीत जाये तो मुख्यमंत्री पद के लिए लोग नहीं हैं। महाराष्ट्र में भी मुख्यमंत्री चुनने में कई दिन लगे थे। अखबारों में यह सब नहीं बताया जाता है और भाजपा के दावों को चुनौती भी नहीं दी जाती है। कहने की जरूरत नहीं है कि जो खबरें हैं वो भी दी नहीं गई हैं, संवाददाताओं की अटकल ज्यादा हैं।

भाजपा या सरकार के प्रचार के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट के तहत अगर खबरें दी गई हों तो जो छपी हैं उनमें, परीक्षा पे चर्चा मुख्य है। अमर उजाला में एक खबर है, आयुर्वेदिक दवा के भ्रामक विज्ञापन पर आंध दिल्ली के मुख्य सचिव तलब। सुप्रीम कोर्ट ने किया है। कहा है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बतायें कि दिशा निर्देशों के  पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। वैसे तो यह काम सरकार का है और सरकार नहीं करती है तो लोगों को अदालत में जाना पड़ता है। दूसरी ओर, सरकार दावा करती है कि भ्रष्टाचार हुआ ही नहीं है। वह छप जाता है।

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