
संजय कुमार सिंह
वैसे तो आज की सबसे बड़ी खबर ट्रम्प के टैरिफ आदेश पर रोक है। अमेरिकी अदालत ने कहा है कि वे अपने अधिकारों से आगे निकल गये हैं। लेकिन भारत के लिए प्रधानमंत्री का यह कहना सबसे बड़ी खबर है कि ऑपरेशन सिन्दूर अभी खत्म नहीं हुआ है। यह खबर आज नवोदय टाइम्स की लीड है। पर यह नहीं बताती है कि इसका क्या मतलब है या कि इसका मतलब यह है कि अब चुनाव मैदान में ऑपरेशन सिन्दूर खेला जायेगा। अगर ऑपरेशन सिन्दूर खत्म नहीं हुआ है और पाकिस्तान किसी भी समय जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ऐसे में वायु सेना प्रमुख का यह कहना बहुत महत्वपूर्ण है कि रक्षा उत्पादन की एक भी परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई। यह खबर भी आज नवोदय टाइम्स में सेकेंड लीड है। इसके अलावा, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया में यह सेकेंड लीड है। इंडियन एक्सप्रेस में यह लीड है। लेकिन अमर उजाला में यह लीड के साथ है। लीड का शीर्षक है, पीओके खुद कहेगा – मैं भारत ही हूं। यह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है और फ्लैग शीर्षक है, पीओके हमारा ही हिस्सा है, वहां के लोगों के हमसे गहरे रिश्ते हैं। अमर उजाला में इस लीड के साथ छपी खबर का शीर्षक है, रक्षा परियोजनाओं में देरी पर वायुसेना प्रमुख ने जताई चिन्ता, कहा… ऐसा वादा क्यों करें जो पूरा न हो सके। इसका फ्लैग शीर्षक है।
आप समझ सकते हैं कि आतंकवाद खत्म करने या पहलगाम में जो हुआ उसके लिये पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए ऑपरेशन सिन्दूर के नाम पर युद्ध छेड़ देने से पहले की तैयारियां नोटबंदी के समय की गई तैयारियों से अच्छी नहीं हैं और फिर ट्रम्प के नेतृत्व में युद्ध विराम की घोषणा और आज छपा प्रधानमंत्री का बयान। इसके अलावा यह तथ्य कि ऑपरेशन सिन्दूर को देश भर में भाजपा या नरेन्द्र मोदी की वीरता के रूप में भुनाया जा रहा है। लाइव हिन्दुस्तान डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार, मोदी के दौरे से पहले पटना में सिंदूर और मिट्टी वाला पोस्टर लगा था जिसपर लिखा था, ना देश झुकेगा, ना बिहार का विकास रुकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 35 दिन के अंतराल पर गुरुवार को बिहार दौरे पर थे। पहलगाम हमले के बाद हुए पिछले दौरे पर मोदी ने मधुबनी में कहा था कि आतंकियों को कल्पना से बड़ी सजा देंगे और मिट्टी में मिला देंगे। भाजपा दफ्तर पर इस बार दो तरह के पोस्टर लगे थे, एक पोस्टर में नारा है- ना देश झुकेगा, ना बिहार का विकास रुकेगा। दूसरे पोस्टर में लिखा है- जो सिंदूर मिटाने निकले थे, उन्हें मिट्टी में मिलाया है। पटना में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और रोड शो के बाद आज नवोदय टाइम्स की लीड से यह समझना मुश्किल है कि सरकार का अगला रुख क्या होगा।
यह अलग बात है कि नवोदय टाइम्स के पहले पन्ने की तीसरी प्रमुख खबर के अनुसार राहुल गांधी का पीएम से आग्रह किया है कि पाकिस्तानी गोलीबारी के पीड़ितों को राहत पैकेज दिया जाये। उल्लेखनीय है कि बता कर या बिना बताये छेड़े गये युद्ध में भारत ने पाकिस्तान का जो नुकसान किया वह अपनी जगह है पर पाकिस्तानी हमले से जम्मू में भारी नुकसान हुआ है। भारत सरकार ने अपने नुकसान नहीं बताये हैं और पाकिस्तान के नुकसान को बढ़ा-चढ़ा कर बता रही हो तो कोई नहीं जानता है। देश भक्ति का माहौल ऐसा बना दिया गया है कि जम्मू में हुए नुकसान की बात नहीं की जा रही है और राहुल गांधी उनकी बात कर रहे हैं तो उनके खिलाफ प्रचार और माहौल है। मेरा मुददा वह सब नहीं है लेकिन सरकार अगर इस रणनीति पर भी काम करना चाहती है तो जम्मू में जो नुकसान हुआ है उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिये। दिलचस्प यह है कि प्रधानमंत्री या सरकार की तरफ से पीड़ितों को भरोसा देने कोई नहीं गया है और अपने नुकसान की बात करना देश विरोधी होना भी हो गया है। फिर भी राहुल गांधी के जम्मू दौरे का वीडियो सार्वजनिक है और आप चाहें तो देख सकते हैं।
अखबारों की खबरों से मुझे लगता है कि सरकार ने युद्ध तो छेड़ दिया, सेना तैयार नहीं है। पाकिस्तान का चाहे जितना नुकसान हुआ जम्मू में नुकसान कम नहीं है और अगर सरकारी पैमाने पर बहुत कम भी है तो जिनका घर टूटा, जो मारे गये उनके लिए भारत सरकार को कुछ करना चाहिये। भारत में सरकार से कुछ मांगना और ध्यान में ला पाना उतना ही मुश्किल है जितना सरकार के खिलाफ बोल लेना और सुना जाना। मेरा मतलब है कि बोल तो कोई भी सकता है और उसे सुना ही नहीं जाये तो क्या लाभ है। स्थिति यह है कि जो बोल सकता है और सुना जाता है उसकी खबर पहले पन्ने पर शायद ही छपे। जो डर रहा, बोल ही नहीं रहा है उसका कुछ किया नहीं जा सकता है। जहां तक सरकार की बात है, उसे अपना काम स्वंय करना चाहिये और शिकायत का इंतजार नहीं करना चाहिये। उसके पास सूचनाओं का ऐसा तंत्र होना चाहिये कि जम्मू व कश्मीर में हुए नुकसान की जानकारी उसे हो और आवश्यक कार्रवाई बिना कहे की जाये। लेकिन यह सब तब होता जब सरकार के पास फुर्सत होती। वह तो बिहार चुनाव में व्यस्त है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को ‘निर्मम’ कहा है। द स्टेट्समैन ने इसे लीड बनाया है और शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने टीएमसी सरकार को निर्मम व्यवस्था कहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह हेडलाइन मैनेजमेंट का भाग है। इसके खिलाफ ममता बनर्जी ने भी सख्त बयान दिया है। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से बहुत निजी सवाल पूछा है और यह कहकर पूछा है कि आप मजबूर कर रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि ममता बनर्जी को वह प्रमुखता नहीं मिली है लेकिन प्रधानमंत्री अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। युद्ध उन्होंने छेड़ी और पीड़ितों का हाल जानने भी नहीं गये। ऐसा ही मणिपुर में हुआ है। संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग पर कोई सुनवाई नहीं है लेकिन चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं भी है।
राजनीति और शासन के इस घालमेल का लक्ष्य सत्ता में बने रहना है और नरेन्द्र मोदी के शासन की खासियत है कि इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी एक खबर के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकारी ने पत्रकार बनकर सीआरपीएफ के एक एएसआई से प्रमुख सूचनाएं प्राप्त की। अव्वल तो मुझे यकीन है कि यह सब इतना आसान है और सरकार की नाक के नीचे किया जा सकता है। पर खबर बताती है कि पत्रकार इसके लिये पैसे भी देता था। मेरी सामान्य बुद्धि कहती है कि पैसे देकर ली जाने वाली सूचना सामान्य नहीं हो सकती है और वह किसी एएसआई के पास सामान्य तौर पर नहीं होगी। अगर यह सब चल रहा था तो कोई बड़ा और ऊपर का भी भागीदार होगा या जासूसी की खबरों की आड़ में कुछ और छिपाने की रणनीति हो सकती है। पत्रकारों का काम है कि ऐसे मामलों में सतर्क रहें और जहां संभव हो गड़बड़ियों को इंगित करें उसके आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करें पर वह सब अब नहीं होता है। जैसा मैंने पहले कई बार लिखा है, 2020 में जम्मू कश्मीर पुलिस का एक अधिकारी आतंकवादियों के साथ पकड़ा गया था और तब उसने कहा था, खेल खराब मत कीजिये। आज तक उसके आगे के खेल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। सरकार ने अचानक आतंकवाद खत्म करने के लिए युद्ध छेड़ दिया और अचानक बंद कर दिया। उसका चुनाव प्रचार में उपयोग शुरू कर दिया। जाहिर है, सरकार जो कर रही है वह बहुत पारदर्शी नहीं है और जो नहीं कर रही है उसका कारण स्पष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री का नियुक्त किया चुनाव आयोग प्रधानमंत्री से सवाल नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, यू-ट्यूबर, लड़कियां और असंबद्ध लोग जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किये जा रहा है। जासूसी से उनका संबंध पर्याप्त खतरनाक हो सकता है लेकिन उसपर कोई खुलासा नहीं है। विपक्ष के नेता के सवाल और पीड़ितों को राहत दिलाने की बात को देश विरोध के रूप में पेश किया जा रहा है। युद्ध की इस स्थिति में वायु सेना प्रमुख कह रहे हैं कि कोई भी परयोजना समय पर पूरी नहीं हुई। कार्रवाई गुप्त सूचना पाकिस्तान को देने के लिए यूट्यूबर के खिलाफ हो रही है जिसके पास गुप्त सूचना आई कहां से – मुद्दा यह है। उसके लिए सरकार और प्रशासन जवाबदेह है लेकिन सरकार और प्रशासन से सवाल नहीं किये जा सकते हैं।
द टेलीग्राफ की आज की लीड ट्रम्प पर रोक की खबर है। दि एशियन एज ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन को निर्मम कहने और इस आरोप को लीड बनाया है। इसके साथ टीएमसी के पांच सवाल तो हैं पर ममता बनर्जी का यह प्रश्न नहीं है कि प्रधानमंत्री अपनी पत्नी को सिन्दूर क्यों नहीं भेज रहे हैं। द हिन्दू में ट्रम्प और भारतीयों को अमेरिकी वीजा का मामला लीड है। सिंगल कॉलम की एक खबर के अनुसार अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के खिलाफ आरोप बकवास हैं। नौकरशाहों के एक पूर्व समूह ने एक बयान में यह बात कही है। यहां कल मैंने लिखा था कि कैसे अमर उजाला ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खबर के रूप में पेश कर यह माहौल बनाने की कोशिश की थी कि सब सामान्य है। आज इस खबर से लगता है कि पूर्व नौकरशाहों का एक बड़ा समूह प्रोफेसर के सोशल मीडिया पोस्ट के लिए उनके खिलाफ एफआईआर कार्रवाई को सही नहीं मानता है। इसे अपमानजनक और बकवास कहा है पर आज यह खबर हिन्दी के मेरे दोनों अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। इस तरह सरकार के खिलाफ बोलने वाले पर हमला बोलने, परेशान करने की योजना पूरी हो गई। खेल खत्म।


