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छत्तीसगढ़

सरकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए घंटे भर में 83 महिलाओं की नसबंदी, सात की मौत

Vikram Singh Chauhan : छत्तीसगढ़ में सरकारी लक्ष्य पूरा करने की हड़बड़ी में केवल छह घंटे के भीतर बिलासपुर ज़िला अस्पताल के एक चिकित्सक ने अपने एक सहयोगी के साथ मिल कर 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी. इस सरकारी चिकित्सा शिविर में सात महिलाओं की मौत हो गई है. बिलासपुर के पेंडारी गांव में केंद्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत शनिवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था.

Vikram Singh Chauhan : छत्तीसगढ़ में सरकारी लक्ष्य पूरा करने की हड़बड़ी में केवल छह घंटे के भीतर बिलासपुर ज़िला अस्पताल के एक चिकित्सक ने अपने एक सहयोगी के साथ मिल कर 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी. इस सरकारी चिकित्सा शिविर में सात महिलाओं की मौत हो गई है. बिलासपुर के पेंडारी गांव में केंद्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत शनिवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था.

नसबंदी से पहले दवाई खाते ही महिलाओं को उल्टी शुरु हो गई लेकिन डाक्टर ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और महिलाओं की हालत बिगड़ती चली गई.राज्य में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी इसी तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी है. दो साल पहले मोतियाबिंद के ऑपरेशन में भी सैकड़ों की आँखों की रोशनी चली गई थी.देश का सबसे लचर स्वास्थ्य व्यवस्था छत्तीसगढ़ में ही है.यहाँ कागजों को दुरुस्त रखने लोगों को ऐसे ही मारा जाता है.अत्यंत दुखद. (स्रोत बीबीसी)

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छत्तीसगढ़ में एक नाबालिग मुस्लिम लड़की से दो बार गैंगरेप का मामला सामने आया है। पीड़िता जुबेदा तबस्सुम (बदला हुआ नाम ) मूलतः बिहार के वैशाली की रहने वाली है। वह पिछले कुछ माह से अपनी बहन लाड़ली खातुन कुम्हारी (दुर्ग) के घर ठहरी थी। यह परिवार कमाने खाने छत्तीसगढ़ आया हुआ है और मिस्त्री, रोजी मजदूरी का काम करता है। घटना 16/08/2014 की है जब रायपुर के चार लड़कों ने उनके साथ दुष्कर्म किया फिर उसे 18 /08 /2014 को बांधा मौदहा उत्तरप्रदेश ले जाकर वहां पांच लड़कों ने दुष्कर्म किया। पीड़िता बड़ी मुश्किल से आरोपियों के चंगुल से बच निकलने के बाद 23 /08 /2014 को रायपुर आमानाका में इसकी प्राथमिकी दर्ज कराई बावजूद इसके पुलिस ने आज तारीख तक इस मामलें में कोई कार्रवाई नहीं की, पुलिस उल्टे बाहरी बता पीड़िता के परिवार को जरूर धमका रही है। उत्तरप्रदेश पुलिस भी वहां के आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है। यह खबर भी किसी न्यूज़ चैनल और अख़बारों की सुर्खियां नहीं बनी है। पीड़िता दसवीं की छात्रा है और शारीरिक रूप से अब कमजोर हो गई है। मैं उन आंदोलनकारियों को और अख़बारों के पन्ने ढूढ़ रहा हूँ जिन्होंने निर्भया गैंगरेप में आवाज बुलंद की थी। आखिर आप कब एक मुस्लिम ,दलित और आदिवासी के साथ दुष्कर्म को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएंगे और कब इनके लिए कैंडल लेकर इंडिया गेट और जंतर मंतर पर जायेंगे ? और कब इसे टीवी चैनलों में बहस का मुद्दा बनाएंगे और कब अख़बारों का फ्रंट पेज न्यूज़ होगा? आखिर कब?

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यहाँ छत्तीसगढ़ के बस्तर में सेना आदिवासियों को नक्सली समझ मार देते है और वहां कश्मीर में युवकों को आतंकवादी समझ मार देते है! सोमवार रात मध्य कश्मीर के बड़गाम जिले में जांच नाके के पास सेना की गोलीबारी में दो युवक मारे गए थे जबकि 2 लोग घायल हो गए थे। सुरक्षाकर्मियों का कहना है उन्होंने ‘संदिग्ध आतंकियों’ पर गोली चलायी थी बाद में पता चला दोनों युवक स्टूडेंट थे। संदिग्ध बता न जाने कितने बेगुनाह आदिवासी ,मुस्लिम इनकी गोलियों के शिकार हुए है!

सोशल एक्टिविस्ट विक्रम सिंह चौहान के फेसबुक वॉल से.

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