महिला पत्रकार ने अपने स्टेट हेड पर लगाए कई गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में चैनल और अखबार बने उगाही का जरिया… न्यूज चैनल /अखबारों के रिपोर्टर व पत्रकार हो रहे शोषण के शिकार… पत्रकार संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल..

स्टेट हेड/ एडिटर की आड़ में न्यूज चैनल करते हैं उगाही… छत्तीसगढ़ बना चारागाह… छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के जनसम्पर्क विभाग से डीपीआर लेने के फेर में छत्तीसगढ़ में कुकुरमुत्ते की तरह न्यूज चैनलों की बाढ़ आ गई है. न तो अधिकतर चैनल प्रदेश में सभी जगह दिखाई देते हैं न ही चैनल में कार्य करने वाले जिला रिपोर्टरों एवं ब्लॉक के स्ट्रिंगरों को मानदेय मिलता है. ये रिपोर्टर और स्ट्रिंगर प्रदेश की पल-पल की घटनाओं को ब्रेकिंग, स्क्रॉल, एंकर विसुसल, बाइट के माध्यम से भेजते हैं. विभिन्न ब्रेकिंग न्यूज के ग्रुपों एवं एफटीपी के माध्यम से चैनल के इनपुट तक पहुंचाते हैं. मेल से खबरों को भेजते हैं. लेकिन क्या वो सभी खबरे चलती हैं? नहीं. आखिर क्यों नहीं चलती हैं?

ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कार्य करने वाले रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों को चैनल दुर्घटना बीमा का लाभ तक नहीं देते हैं. स्ट्रिंगरों और रिपोर्टरों को खबरों के बदले कोई पारिश्रमिक सैलरी नहीं दिया जाता है. एक-दो चैनलों को छोड़ दें तो बाकी सभी चैनल शोषण, उत्पीड़न और उगाही का अड्डा हैं. ये लोग न रिपोर्टरों को मोबाईल एलाउंस देते हैं न ही पेट्रोल एलाउंस, न ही वीडियो कैमरा, न ही किसी प्रकार की कोई सैलरी. लेकिन जब उन रिपोर्टरों से कोई खबर चूक जाये या किसी कारण से कोई फोन अटेंड नही कर पाए तो तुरंत चैनल हेड / एडिटरों का फोन आते ही रिपोर्टरों एवं स्ट्रिंगरों से ऐसे बात किया करते हैं जैसे वो उनके बंधुआ मजदूर हों। यदि कोई खबर किसी बड़े नेता / मंत्री या उद्योगपतियों से जुडी हो तो फिर पूछिए मत. आपसे फोनों के लिए सम्बंधित व्यक्ति अथवा नेता / अधिकारी का नम्बर मंगाया जायेगा. फिर आप टीवी के स्क्रीन पर समाचार का इंतिजार करते हुए बैठे रहिये. आपका समाचार चलेगा ही नहीं. लेकिन दिनभर मेहनत करके आपके द्वारा भेजे गई खबर को नहीं चलने का कारण आप पूछ भी नहीं सकते. यदि आपने पूछ भी लिया तो आपको कोई सन्तुष्टिजनक जवाब नहीं मिलेगा.

स्टेट हेड एवं एडिटर रायपुर में बैठ के लगा रहे आईडी की बोली… हालाँकि सुनने में ये बात थोड़ी अजीबो गरीब लगेगी लेकिन रायपुर में बैठे चैनल के ठेकेदार आपके जिला में स्थित उद्योगों एवं आर्थिक स्थिति के अनुसार आपसे आईडी का सौदा करेंगे. जिला रिपोर्टर बनना है तो 50 हजार… ब्लॉक रिपोर्टर बनना है तो 20 से 30 हजार रुपया… ये पैसे बाकायदा आपसे डोनेशन के तौर पर लिया जायेगा… पहले तो आपको यह राशि कार्य छोड़ने के वक्त वापसी की बात की जायेगी… लेकिन भला अख़बार या चैनल से किसी को पैसा वापस मिला है किसी को… इतना ही नहीं, आई डी एवं पीआरओ लेटर जारी करते ही आपका शोषण प्रारम्भ हो जाता है.. फिर शुरू होता है टारगेट का खेल…. 26 जनवरी, 15 अगस्त, दीपावली, नेताओं की जयंती, पुण्य तिथि, मंन्त्री मिनिस्टरों के आगमन… इन सभी अवसर पर उन्हें चाहिए विज्ञापन. भले ही आपका समाचार चले न चले, चैनल दिखे न दिखे, लेकिन आपको विज्ञापन देना ही पड़ेगा.

रायपुर से बैठ के होता है खबरों का सौदा… जी हां सुनने में थोड़ा अजीब लगे लेकिन रायपुर में बैठे चैनल हेड/ एडिटर खबरों के ठेकेदार अपने नफा नुकसान के आधार पर खबरों का चयन एवं सौदेबाजी करते हैं… यदि खबर मंत्री जी से जुडी कुनकुनी 300 एकड़ आदिवासी भूमि घोटाले की हो, खनन माफियाओं से जुडी खबर हो, भ्रष्ट अधिकारियो से जुडी खबर हो या फिर देश के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया ग्रुप डी बी पॉवर से जुडी आदिवासी भूमि घोटाला की खबर जिस पर प्रधानमंत्री कार्यलय से कार्यवाही का आदेश हो… इसे रोक करके उल्टे दलाली की जाती है… ऐसे ही मामले में एक जिले की महिला रिपोर्टर आरती वैष्णव को धमकी देते हुए चैनल से निकाले जाने एवं आईडी जमा करने की बात कहता है साधना चैनल का स्टेट हेड आरके गांधी. साधना न्यूज छत्तीसगढ़ के स्टेट एडिटर आरके गांधी की पोल जब महिला पत्रकार ने खोल दी तो महिला पत्रकार को बदनाम करने के लिए खनिज माफियाओं से कर लिया सांठगांठ.

श्री माँ प्रकाशन की आड़ में पूरे छत्तीसगढ़ को लूटा… जी हां अपने आपको स्टेट हेड बताने वाले दलाल श्री आर के गांधी ने श्री माँ प्रकाशन के नाम से मुझसे लिया विज्ञापन… 25 हजार नगद एवं 25 हजार का स्टेट बैंक खरसिया का चेक लिया… अंबिकापुर, बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग, जाजंगिर, कोरिया सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से जिला रिपोर्टर के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये लिए. संभाग हेड के लिए 1 लाख से 5 लाख तक लिए… ब्लॉक स्तर के लिए 30 हजार की राशि स्ट्रिंगरों से वसूल किया गया… बदले में श्री माँ प्रकाशन का आईडी एवँ पीआरओ जारी किया गया… अब जबकि श्री माँ प्रकाशन का अनुबंध साधना न्यूज से समाप्त हो गया है तो लोगों को उनका डिपॉजिट वापस करने में आनाकानी किया जा रहा है…

डीबी पावर प्रिंट मीडिया समूह द्वारा खरसिया तहसील जिला रायगढ के विभिन्न ग्रामों में गरीब आदिवासियों की जमीन कब्जाने की खबर का प्रसारण करने के बजाय उल्टे डीबी पॉवर के जीएम धनंजय सिंह के साथ सांठ गांठ करके मुझे मोबाईल में तत्काल चैनल छोड़ने एवं आईडी जमा करने की धमकी आर के गांधी द्वारा दी गई. मेरे द्वारा जमा डिपॉजिट वापस मांगने पर बदनाम करने एवं कैरियर खराब करने की धमकी दिया गया है. आर के गांधी द्वारा आज भी श्री माँ प्रकाशन के नाम से आईडी एवं पीआरओ को बेचा जा रहा है.

विज्ञापन प्रसारित किये बिना बिल की मांग एवं प्रत्येक महीना वसूली करके कभी 30 हजार कभी 50 हजार देने का दबाव बनाया जाता है. ऐसे में भला कोई व्यक्ति कैसे कार्य करेगा… आर के गांधी के इस अपमान जनक बातों एवं अवैध उगाही के कारण छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज अपनी पहचान खो चुका है…

अब एक बार फिर से नई नियुक्ति के नाम से रिपोर्टरों से वसूली की तैयारी आर के गांधी द्वारा की जा रही है. किसी भी रिपोर्टर को सैलरी तो दूर, साल भर कार्य करने के बाद भी प्रेस कार्ड तक जारी नहीं किया गया है… आज छत्तीसगढ़ में साधना न्यूज के पतन का मुख्य जिम्मेदार आर के गांधी ही है… ऐसा दलाल जो रायपुर में बैठकर आई डी बेच रहा है और रिपोर्टरों को धमकाता है… हर माह पैसे देने को कहता है…. रिपोर्टर को बंधुवा मजदूर की तरह समझता है…  ऐसा व्यक्ति है ये दलाल आर के गांधी… कई प्रताड़ित पत्रकार उक्त मामले में जल्द ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण में जाने को तैयार हैं…

सुनिए दलाल आरके गांधी से मेरी बातचीत… इस टेप से समझ में आ जाएगा कि जो मैंने आरोप लगाए हैं वो निराधार नहीं हैं…

आरती वैष्णव
जिला रिपोर्टर
साधना न्यूज
रायगढ़

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नई दुनिया, बस्तर के ब्यूरो प्रमुख भंवर बोथरा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

बस्तर छत्तीसगढ़ में नई दुनिया के ब्यूरो प्रमुख भंवर बोथरा के खिलाफ जगदलपुर के सिटी कोतवाली में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में इनके परिवार की चार महिलाओं और चार पुरुषों को आरोपी बनाया गया है। थाना प्रभारी बी एस खूंटिया ने बताया कि इस मामले में बलदेव बोथरा बिल्डर्स के मुख्य कर्ताधर्ता भंवर बोथरा समेत कुल पंद्रह लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें नगर पालिक निगम जगदलपुर के आयुक्त रमेश जायसवाल, कार्यपालन अभियंता एसबी शर्मा, नगर एवं ग्राम निवेश (टाऊन प्लानिंग) के सहायक संचालक एस आर असगरा और पटवारी सत्यनारायण सेठिया शामिल हैं। 

बस्तर महाराजा दलपत देव भंजदेव ने करीब 600 वर्ष पूर्व इस ऐतिहासिक तालाब का निर्माण करवाया था। उस समय इसका रकबा 1000 एकड़ था। अब यह रकबा सिमट कर 300 एकड़ तक पहुँच चुका है। नई दुनिया के ब्यूरो प्रमुख भंवर बोथरा ने तालाब के कैचमेन्ट एरिया की भूमि को अपनी कंपनी बलदेव बोथरा डेवलपर्स के नाम करवाया। करीब सात एकड़ भूमि पर आठ मंज़िला कॉलोनी बनाने की तैयारी शुरू की गई। शासन के नियमानुसार आठ मंज़िला कॉलोनी के लिए साठ फीट चौड़ी सड़क का होना अनिवार्य है। इस अनिवार्यता को पूरा करने राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई। फ़र्ज़ी तरीके से नक़्शे में कूटरचना कर सड़क प्रदर्शित कर नक्शा स्वीकृत करवाया गया।

तालाब को पाटते हुए नगर निगम ने 3 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का ठेका भी भंवर बोथरा की कंपनी को दे दिया। अर्थात सरकारी पैसों से निजी कॉलोनी की सड़क बनने लगी वो भी ऐतिहासिक धरोहर को मिटाते हुए। शहर के 75 वर्षीय समाजसेवी मदन दुबे ने दलपत सागर बचाओ आंदोलन की शुरुवात की। अतिक्रमण के साक्ष्य पुलिस को देकर एफ आई आर दर्ज करने का निवेदन किया गया। बिल्डर अखबार की आड़ लेकर लगातार बचता गया। फिर जगदलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश भदौरिया ने मदन दुबे की तरफ से जगदलपुर न्यायलय में परिवाद पेश किया।

चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट विजय कुमार साहू ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश 30 दिसंबर को जारी किया। न्यायालयीन आदेश के बाद जगदलपुर पुलिस ने 3 जनवरी को मामला कायम कर लिया है। भा .द. वि. की धारा 409, 420, 467, 465, 471 और 120 (बी) के तहत सभी के खिलाफ नामजद मामला कायम कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख दैनिक अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है। नई दुनिया अखबार ने हमेशा ही इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है और इस मामले में भी ब्यूरो चीफ की खबर न छाप कर अपनी तथाकथित विश्वसनीयता में थोड़ा और इज़ाफ़ा कर लिया है।

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सरकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए घंटे भर में 83 महिलाओं की नसबंदी, सात की मौत

Vikram Singh Chauhan : छत्तीसगढ़ में सरकारी लक्ष्य पूरा करने की हड़बड़ी में केवल छह घंटे के भीतर बिलासपुर ज़िला अस्पताल के एक चिकित्सक ने अपने एक सहयोगी के साथ मिल कर 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी. इस सरकारी चिकित्सा शिविर में सात महिलाओं की मौत हो गई है. बिलासपुर के पेंडारी गांव में केंद्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत शनिवार को नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था.

नसबंदी से पहले दवाई खाते ही महिलाओं को उल्टी शुरु हो गई लेकिन डाक्टर ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और महिलाओं की हालत बिगड़ती चली गई.राज्य में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी इसी तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी है. दो साल पहले मोतियाबिंद के ऑपरेशन में भी सैकड़ों की आँखों की रोशनी चली गई थी.देश का सबसे लचर स्वास्थ्य व्यवस्था छत्तीसगढ़ में ही है.यहाँ कागजों को दुरुस्त रखने लोगों को ऐसे ही मारा जाता है.अत्यंत दुखद. (स्रोत बीबीसी)

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छत्तीसगढ़ में एक नाबालिग मुस्लिम लड़की से दो बार गैंगरेप का मामला सामने आया है। पीड़िता जुबेदा तबस्सुम (बदला हुआ नाम ) मूलतः बिहार के वैशाली की रहने वाली है। वह पिछले कुछ माह से अपनी बहन लाड़ली खातुन कुम्हारी (दुर्ग) के घर ठहरी थी। यह परिवार कमाने खाने छत्तीसगढ़ आया हुआ है और मिस्त्री, रोजी मजदूरी का काम करता है। घटना 16/08/2014 की है जब रायपुर के चार लड़कों ने उनके साथ दुष्कर्म किया फिर उसे 18 /08 /2014 को बांधा मौदहा उत्तरप्रदेश ले जाकर वहां पांच लड़कों ने दुष्कर्म किया। पीड़िता बड़ी मुश्किल से आरोपियों के चंगुल से बच निकलने के बाद 23 /08 /2014 को रायपुर आमानाका में इसकी प्राथमिकी दर्ज कराई बावजूद इसके पुलिस ने आज तारीख तक इस मामलें में कोई कार्रवाई नहीं की, पुलिस उल्टे बाहरी बता पीड़िता के परिवार को जरूर धमका रही है। उत्तरप्रदेश पुलिस भी वहां के आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है। यह खबर भी किसी न्यूज़ चैनल और अख़बारों की सुर्खियां नहीं बनी है। पीड़िता दसवीं की छात्रा है और शारीरिक रूप से अब कमजोर हो गई है। मैं उन आंदोलनकारियों को और अख़बारों के पन्ने ढूढ़ रहा हूँ जिन्होंने निर्भया गैंगरेप में आवाज बुलंद की थी। आखिर आप कब एक मुस्लिम ,दलित और आदिवासी के साथ दुष्कर्म को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएंगे और कब इनके लिए कैंडल लेकर इंडिया गेट और जंतर मंतर पर जायेंगे ? और कब इसे टीवी चैनलों में बहस का मुद्दा बनाएंगे और कब अख़बारों का फ्रंट पेज न्यूज़ होगा? आखिर कब?

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यहाँ छत्तीसगढ़ के बस्तर में सेना आदिवासियों को नक्सली समझ मार देते है और वहां कश्मीर में युवकों को आतंकवादी समझ मार देते है! सोमवार रात मध्य कश्मीर के बड़गाम जिले में जांच नाके के पास सेना की गोलीबारी में दो युवक मारे गए थे जबकि 2 लोग घायल हो गए थे। सुरक्षाकर्मियों का कहना है उन्होंने ‘संदिग्ध आतंकियों’ पर गोली चलायी थी बाद में पता चला दोनों युवक स्टूडेंट थे। संदिग्ध बता न जाने कितने बेगुनाह आदिवासी ,मुस्लिम इनकी गोलियों के शिकार हुए है!

सोशल एक्टिविस्ट विक्रम सिंह चौहान के फेसबुक वॉल से.

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