संजय कुमार सिंह
कथनी और करनी का अंतर अब दिखने लगा है। डबल इंजन वाले आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 12 बीमार हुए, चार बुजुर्गों की जान गई तीन बच्चों की हालत गंभीर। रेखा गुप्ता ने कहा है, 2047 तक दिल्ली का विकास ’24×7′ राजधानी की तरह करेंगे। इसका मतलब है, रेखा गुप्ता की डबल इंजन की सरकार को दिल्ली के लिए भी 2047 तक का समय चाहिए तो यह काम की रफ्तार पर गंभीर सवाल है। यह सब तब है जब 2014 चुनाव से पहले और बाद सपनों का भारत, स्मार्ट शहर और विदेश में रखा काला धन लाने के लिए समय तय अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन की होनी थी, किसानों की आय दूनी होनी, हर साल कई करोड़ रोजगार मिलने थे फिर कौशल विकास योजना में ही घोटाला हो गया।
आज मेरे दो अखबारों – अमर उजाला और हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की खबर है। तीन अखबारों – नवोदय टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू की लीड यह खबर है कि भारत ने अपनी पहली आतंकवाद विरोधी नीति की घोषणा की है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड बताती है कि 14,601 करोड़ के अघोषित विदेशी निवेश पर टैक्स वसूला गया है लेकिन मुकदमा चलाना और जुर्माना लगाना अभी बाकी है। द टेलीग्राफ की लीड देश में स्नातकोत्तर मेडिकल पढ़ाई की गुणवत्ता पर सवाल की खबर है और यह सुप्रीम कोर्ट का है। दि एशियन एज ने बताया है कि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का आकलन भारत सरकार ‘बहुत जल्दी’ करेगी और यह खबर वित्त मंत्री के हवाले से है। देशबन्धु की लीड, ईरान और अमेरिका में तनाव बढ़ने तथा इस कारण भारतीयों को ईरान छोड़ने की सलाह दिए जाने की खबर है। इनमें विमान दुर्घटना की खबर को हादसा ही मानें तो भी साफ है कि नागरिकों का क्या हाल है। कल आतंकी हमला और उससे हुए नुकसान की खबर थी। आज पता चल रहा है कि देश ने आतंकवाद पर अंकुश के लिए पहली नीति बनाई है। इससे पहले 2019 के चुनाव से पहले पाकिस्तान पर हवाई हमला (बालाकोट), घुस कर मारूंगा का प्रचार और फिर जम्मू कश्मीर चुनाव से पहले आतंकवाद खत्म करने का दावा सबको पता है। इसके बाद पहलगाम का हमला कैसे हुआ, आतंकी कैसे पहुंचे, अपराध कर कैसे फरार हो गए और लंबे समय बाद जब उन्हें मारे जाने का दावा किया गया तो पक्का नहीं है कि अपराधी वही थे और वही हों भी तो अपराध के बाद सीमा पार करने या मारे जाने से पहले महीने भर कैसे-कहां जिन्दा रहे समझ में नहीं आया। समझ में तो यह भी नहीं आया है कि पुलवामा के अपराधी कहां गायब हो गए।
यही नहीं, 5 जनवरी 2020 को जेएनयू पर हमला करने और कई छात्र-छात्राओं को घायल करने वालों में पहचानी गई नकाबपोश, कोमल शर्मा का भी आज तक पता नहीं चला है। लेकिन दिल्ली पुलिस शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले युवक कांग्रेस के 10-12 कार्यकर्ताओं के पीछे लगा दी गई है। जागरण डॉट कॉम की एक खबर के अनुसार, भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान युवा कांग्रेस के ‘शर्टलेस’ विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने इसे ‘बड़ी साजिश’ बताते हुए अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मात्र तीन दिनों में दो राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए अब तक सात गिरफ्तारियां की हैं। इस मामले में हर दिन और हर पल कुछ बड़े खुलासे हो रहे हैं, जो इसे संदिग्ध बनाते जा रहे हैं। जहां तक मेरी जानकारी है, सम्मेलन में प्रधानमंत्री की फोटोग्राफी के लिए जब हॉल खाली करा लिया गया था तब जो सामान गायब हुए थे उनका पता नहीं चला ना कोई खबर है ना किसी कार्रवाई की सूचना। हालांकि, सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ताओं में एक ने बाद में कहा कि उनका सामान बरामद हो गया था। लेकिन बाकी मामले में कोई कायदे की खबर ही नहीं मिली। डबल इंजन वाले आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 12 बीमार हुए, चार बुजुर्गों की जान गई तीन बच्चों की हालत गंभीर। सरकार बांग्लादेश सीमा से घुसपैठ को तो मुद्दा बनाती है पर करती वहां भी कुछ नहीं है। दस साल से भी ज्यादा में दोनों सीमा पर दोनों मामलों में क्या किया गया है वह पता नहीं है। सरकार ने तो कुछ नहीं ही बताया है। आज यह खबर सरकारी प्रचार की ही तरह छपी है और सत्तारूढ़ दल की नंगई पर बात होनी चाहिए तो न सिर्फ आंतकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार’ की घोषणा की गई है अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का आकलन ‘बहुत जल्दी’ करने की घोषणा की गई है। अब सबको पता है कि मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में था तब भी भारत सरकार या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से कहकर हेडलाइन मैनेजमेंट की जरूरत के अनुसार करार की घोषणा करवाई। भारत सरकार इसे माने या न माने, ट्रम्प ने यह बात सार्वजनिक तौर पर कहा है और भारत सरकार ने इसका भी खंडन नहीं किया है। जाहिर है, नरेन्द्र मोदी की सरकार नैरेटिव बनाने (या कहानी गढ़ने) के काम में लगी रही है, अभी भी यही कर रही है और नंगा होने तथा नंगई का नया मामला छेड़ा है। कांग्रेस ने इसका बाकायदा विरोध किया है और मोदी सरकार को हर तरफ से घेर लिया है उसकी खबर आज भी पहले पन्ने पर नहीं है।
इसकी खबर देशबन्धु में है। कांग्रेस ने कहा है कि युवक कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक है और मुद्दों पर आधारित था। यही नहीं, कांग्रेस ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार की दमनकारी कार्रवाई शर्मनाक है। समस्या यह है कि अदालतें भी अक्सर सरकारी कार्रवाई का समर्थन करती दिखती हैं या सरकार को लोकतांत्रिक व्यवहार करने के लिए मजबूर करने वाले आदेश देती नहीं दिखती हैं। ऐसे में आज एक खबर यह भी है कि तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं और एसआईआर के तहत वहां 97 लाख नाम हटाए गए हैं। मुद्दा यह है कि एसआईआर के तहत यह सुनिश्चित किया जाना था मतदाता सूची में उन्हीं का नाम रहे जो नागरिक हैं। इसमें 100-50 लोग रह जाते तो बात अलग थी। हालांकि पहचान उनकी भी जरूरी थी और विदेशी होते तो उनके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई होनी चाहिए थी या फिर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। यह इसलिए भी जरूरी है कि चुनाव आयोग हाल तक एक भी मतदाता छूटे ना के सिद्धांत पर काम करता था और इस लिहाज से उसे समावेशी होना था लेकिन वह मतदाताओं को डिजिटल डिसक्रिपेंसी के नाम पर बाहर कर रहा है और परेशान तो कर ही रहा है। आरोप है कि यह सब भाजपा के फायदे के लिए किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर चर्चा है गैर भाजपा शासित राज्यों में डबल इंजन वाली सरकार बनाने के लिए हिन्दुत्व का उभार हो रहा है और धार्मिक मामले चर्चा में लाए जा रहे हैं। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला इसमें शामिल है। इसकी चर्चा सुप्रीम कोर्ट में होनी है।
आइए, अब देखें की आज की खबरों के अनुसार डबल इंजन वाले राज्यों में क्या स्थिति है। दिल्ली का उदाहरण दि एशियन एज में है। आप जानते हैं कि यहां कांग्रेस की सरकार थी, भाजपा ने भरपूर विरोध किया लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और तब भाजपा इसका विरोध करती रही। इसमें मंत्रियों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले शामिल थे और पिछले चुनाव में भाजपा जीत गई। भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया है जिन्हें इस पद के लिए चुने जाने से पहले उनके चुनाव क्षेत्र और भाजपा के बाहर बहुत कम लोग जानते थे। दि एशियन एज के साथ बात-चीत में उन्होंने जो कहा उसपर आने से पहले यह बताना जरूरी है कि ना उन्होंने कहा, ना अखबार ने पूछा ना बताया है कि एक साल में भाजपा की सरकार ने दिल्ली में नया या विशेष क्या किया है या अपने चुनाव वादों को कितना पूरा कर दिया या कोई चुनावी वादा था ही नहीं। अखबार ने लिखा है, केंद्र सरकार के सक्रिय सहयोग से उनकी सरकार ने पॉलिसी पैरालिसिस खत्म कर दिया है। आतंकवाद पर केंद्र या भाजपा सरकार की नीति के बारे में आप ऊपर पढ़ चुके हैं। इस खबर का शीर्षक है – रेखा गुप्ता ने कहा, 2047 तक दिल्ली का विकास ’24×7′ राजधानी की तरह करेंगे। मुझे लगता है कि दिल्ली अभी ही 24×7 काम करती है और होना भी चाहिए। रेखा गुप्ता की डबल इंजन की सरकार को इसके लिए भी 2047 तक का समय चाहिए तो यह काम के रफ्तार पर गंभीर सवाल है और बातचीत प्रचार के लिए नहीं हो रही हो, कोई पत्रकार कर रहा हो तो यह सवाल होना ही चाहिए था लेकिन मुझे नहीं दिखा।
डबल इंजन वाले दिल्ली से लगे दूसरे राज्यों और एनसीआर के शहरों की बात करें तो नवोदय टाइम्स में टॉप पर चार कॉलम की खबर है, नोएडा में इंजीनियर की मौत से गाजियाबाद नगर निगम ने नहीं लिया कोई सबक। खुले नाले में गिरने से कारोबारी की मौत। आपने पढ़ा होगा, हाल में दिल्ली में पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर एक मोटरसाइकिल सवार की मौत के मामले में उप ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया गया था। कारण जो हो, मकसद कार्रवाई के नाम पर लीपा-पोती ही होती है। मुद्दा यह है कि सड़क खोदी जाएगी तो किसी के गिरने का खतरा रहेगा ही। इसके लिए सावधानी बरती जानी चाहिए, किसकी जिम्मेदारी है कौन क्या करेगा यह सब तय नहीं होगा तो यही होगा और अगर किसी भी तरह ठेकेदार जिम्मेदार हो सकता है तो ठेके शर्त में यह भी होना चाहिए कि वह ट्रैफिक की दिशा में प्रकाश की व्यवस्था करगा, रोशनी युक्त संकेतक लगाएगा, जो अवरोधक होंगे उनपर रिफ्लेक्टर भी होगा आदि। मेट्रो जैसे बड़े काम होते थे तो यह सब दिखता भी था। लेकिन कई बार लापरवाही होती है तो इसका कारण नियम स्पष्ट नहीं होना और उसका अनुपालन नहीं होना भी है। इसमें इस बात का कोई मतलब नहीं है कि गड्ढे को घेरा नहीं गया था या घेरा इतना कमजोर था कि टक्कर से टूट गया। क्योंकि घेरा मजबूत हो, टक्कर से न तो भी मौत हो सकती है। इसलिए कारण क्या है उसे देखना समझना होगा लेकिन हर कोई खुद को बचाना चाहता है और जो फंसता है उसे सजा न भी हो तो प्रक्रिया सजा से कम नहीं है। इसलिए, जब सरकारी आईआईटी, बांध बनाने की जरूरत नहीं रही तो इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए था पर सरकार ने इसका लाभ उठाया और जमानत नहीं मिलने पर पद जाने का नया कानून भी बनाना चाहती है। लोग मांग नहीं करें यह एक बात है लेकिन मांग करने, विरोध करने वालों को परेशान किया जाए यह बिल्कुल अलग है। और मोदी सरकार ऐसा करती हुई दिखने लगी है। काम जो हुए हैं जो नहीं हुआ हैं, उसपर चर्चा तो होती ही नहीं है।

फोटो मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


