Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

नितिन गडकरी: RSS की प्रयोगशाला से निकला ‘हाईवे मैन’, जिसके रास्ते कारोबार तक जाते हैं! देखें वीडियो

नागपुर के महाल एरिया में जन्मे नितिन गडकरी बचपन से ही संघ के माहौल में पले। उनकी मां भानुताई जनसंघ से जुड़ी थीं और महज पांच साल की उम्र से वे पार्टी की बैठकों में जातीं थीं — गडकरी भी उनके साथ। आरएसएस के गढ़ नागपुर में जन्म और ब्राह्मण जाति से ताल्लुक — यही दो बातें गडकरी की राजनीति के शुरुआती इंजन बने।

19 साल की उम्र में वे एबीवीपी से जुड़ गए और 31 की उम्र में एमएलसी बन गए। धीरे-धीरे वे बीजेपी की राजनीति में संघ की पसंदीदा लाइन पर चलते रहे — 1995 में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बने और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स के कारण “फ्लाईओवर मैन” कहे गए।

गडकरी के लिए असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब आरएसएस के नए सरसंघचालक मोहन भागवत बने। नागपुर के रिश्तों ने गडकरी को दिल्ली की राजनीति के सबसे ऊँचे पद — भाजपा अध्यक्ष तक पहुंचा दिया। लेकिन यहीं से उनकी “राजनीतिक रफ़्तार” के साथ “विवादों का ट्रैफ़िक” भी शुरू हुआ।

पूर्ति समूह और अजय संचेती कनेक्शन

गडकरी का नाम पहली बार विवादों में आया पूर्ति ग्रुप से। यह वही कंपनी थी जिसे उन्होंने “गांवों में आत्मनिर्भरता” के सपने के साथ शुरू किया, लेकिन बाद में पता चला कि इसके पीछे कई फर्जी कंपनियों से आया पैसा लगा है। एनडीटीवी और द कारवां जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि पूर्ति ग्रुप में निवेश करने वाली कंपनियों के डायरेक्टर गडकरी के ड्राइवर, रिश्तेदार और स्टाफ थे। गडकरी के करीबी बिज़नेसमैन अजय संचेती को भी कोयला ब्लॉक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मिले फायदों को लेकर नामज़द किया गया।

आरएसएस की ढाल और दिल्ली की राजनीति

तमाम आरोपों के बावजूद गडकरी बच निकले — वजह थी नागपुर। आरएसएस ने पूरी ताकत से उन्हें बचाया, लेकिन मोदी की उभरती छवि ने उन्हें पीछे धकेल दिया। 2013 में भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा, और 2014 में वे पहली बार नागपुर से सांसद बने। मोदी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्रालय मिला, जहाँ उन्होंने “हाईवे मैन ऑफ इंडिया” की पहचान बनाई।

मंत्रालय और परिवार का बिज़नेस

गडकरी के मंत्रालय के फैसलों ने उनके परिवार के बिज़नेस को भी सीधा फायदा पहुंचाया। E-Rickshaw नीति (2014) — गडकरी ने बैन हटाकर “दीन दयाल योजना” के तहत ई-रिक्शा को बढ़ावा दिया। बाद में पता चला कि उनकी ससुराल पक्ष से जुड़ी कंपनी Purti Green Technologies को ई-रिक्शा मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस मिला।

Ethanol नीति (2018–2024) — गडकरी ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का सबसे बड़ा प्रचार अभियान चलाया, जबकि यह उनके मंत्रालय के अधीन नहीं था। दिलचस्प बात ये थी कि उनके दोनों बेटे — सारंग और निखिल गडकरी — दो बड़ी एथनॉल कंपनियाँ चलाते हैं — Manas Agro Industries और CIAN Agro Industries। मोदी सरकार की एथनॉल ब्लेंडिंग नीति से इन दोनों कंपनियों के मुनाफ़े में ज़बरदस्त उछाल आया। CIAN Agro के शेयर एक साल में 1000% तक बढ़ गए।

सत्ता, अहंकार और इशारे

बीते दो सालों में गडकरी के बयान लगातार चर्चा में रहे — “सत्ता से अहंकार आता है… जो दूसरों को मूर्ख बना सकता है, वही बड़ा नेता कहलाता है।”

ऐसे कई बयानों को मोदी पर इशारा माना गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी जीत का अंतर घटा, और नागपुर में लगे पोस्टरों से उनकी तस्वीरें गायब थीं।

इसके बाद गडकरी ने खुद खुलासा किया कि उन्हें “प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव” मिला था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका यह बयान और उसके बाद आरएसएस से उनकी नज़दीकी — दोनों ही संकेत देते हैं कि नागपुर से निकला यह ब्राह्मण आज भी भाजपा की भीतरी राजनीति में सबसे अहम मोहरा है।

नितिन गडकरी की कहानी सत्ता और संघ की गलियों से गुज़रती है — जहां सड़कें सिर्फ़ हाईवे तक नहीं, बल्कि रिश्तों, कारोबार और विचारधारा तक जाती हैं। वे भाजपा में मोदी के बाद सबसे लोकप्रिय मंत्री माने जाते हैं, पर उनकी लोकप्रियता और ईमानदारी की छवि के पीछे जो ताना-बाना है — वह बताता है कि गडकरी सिर्फ़ “सड़क बनाने वाले” मंत्री नहीं, बल्कि “सिस्टम समझने वाले” खिलाड़ी भी हैं।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन