सत्ता के हाथों बिक चुके हिंदी के इन बड़े अखबारों के संपादकीय विवेक पर थूकें!

अधिकारियों की पिटाई के दो मामले और अखबारों की खबरें… तेलंगाना में महिला अधिकारी की पिटाई की खबर छापने वाले अमर उजाला ने जवाबी कार्रवाई की खबर नहीं छापी

आज नवभारत टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर फोटो के साथ एक अच्छी खबर है। अफसोस, यह दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। अखबार ने इसे टॉप पर तीन कॉलम में छापा है और संबंधित खबर अंदर भी है। खबर के मुताबिक, महिला फॉरेस्ट अफसर को जिस जमीन पर नेता ने पीटा, वहीं जुटे वन अधिकारी और हजारों पौधे लगाए। यह तेलंगाना के आसिफाबाद जिले के सरसला गांव का मामला है। वहां वन अधिकारियों ने कल हजारों पौधे लगवाए जबकि एक दिन पहले इस सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा चाहने वालों ने यहां पेड़ लगाने गई महिला वन अधिकारी को पीट कर घायल कर दिया था। महिला अफसर सी. अनीता को पीटने का एक वीडियो भी सामने आया था।

मैंने कल लिखा था कि तेलंगाना में महिला अधिकारी को पीटने की खबर दिल्ली के कुछ अखबारों में पहले पन्ने पर छपी थी। विधायक के भाई (जो तेलंगाना राष्ट्र समिति के हैं) ने अधिकारी को पीटा और गिरफ्तार हुए तो खबर पहले पन्ने पर छप गई। यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया (सिंगल कॉलम), नवभारत टाइम्स (सिंगल कॉलम), अमर उजाला (डीसी फोटो के साथ डबल कॉलम खबर) और राजस्थान पत्रिका (डीसी फोटो के साथ डबल कॉलम खबर) में थी। अब आप सोचिए कि इंदौर की ऐसी ही खबर अगर दिल्ली में पहले पन्ने पर नहीं छपे और तेलंगाना की छपे तो कारण क्या हो सकते हैं। निश्चित रूप से यह संपादकीय विवेक का मामला है पर उसके पीछे तर्क तो होगा ही। आप जानते हैं कि इंदौर में अधिकारी को बल्ले से पीटने वाले विधायक के भाई नहीं स्वयं विधायक है और बंगाल भाजपा के प्रभारी महासचिव के बेटे हैं।

आज खबर है कि सीनियर विजयवर्गीय ने जूनियर विजयवर्गीय और बेटे के शिकार बने इंदौर नगर निगम के अधिकारी को “कच्चा खिलाड़ी” कहा है। आज मैं उसपर नहीं लिख रहा। पर यह तथ्य है कि हिन्दी पट्टी की दिल्ली के करीबी शहर की खबर छोड़कर तेलंगाना की खबर पहले पन्ने पर छपी थी तो कोई कारण जरूर होगा। और आज पहली नजर में कल वाली खबर से अलग और महत्वपूर्ण लग रही खबर फिर भी दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। इसे सिर्फ नवभारत टाइम्स ने पहले पन्ने पर छापा है। खबर के मुताबिक महिला अधिकारी की पिटाई के बाद उसी 20 हेक्टेयर जमीन पर सोमवार को हजारों पौधे लगाए गए। महिला अफसर सी. अनीता के समर्थन में कई फॉरेस्ट अफसरों की मौजूदगी में यह प्लांटेशन हुआ। पिटाई के कारण अनीता को फ्रैक्चर हुआ है।

इस मामले में दो पुलिसवाले सस्पेंड हुए हैं। पिटाई के मुख्य आरोपी टीआरएस विधायक के भाई समेत 14 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। केंद्र ने घटना का नोटिस लिया। तेलंगाना की इस घटना के मुकाबले इंदौर की जर्जर घोषित बिल्डिंग गिराई नहीं जा सकी है और बल्लामार विधायक को अपने किए का अफसोस नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में सोमवार को प्रकाशित जूनियर विजयवर्गीय से बातचीत के अनुसार इंदौर नगर निगम की योजना आज उस बिल्डिंग को गिराने की है और इस बारे में पूछने पर विधायक ने कहा था, अभी तक मेरे पास आधिकारिक पुष्टि नहीं है जब होगी तो आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। …. विजयवर्गीय जूनियर ने यह भी कहा है, मुझे अफसोस नहीं है पर मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि कि मुझे फिर ऐसा कुछ करने का मौका मिले। भविष्य में मैं गांधी जी के रास्ते पर चलना चाहता हूं। हालांकि, उनके समर्थक उन्हें चौकीदार बता रहे हैं।

नवभारत टाइम्स ने आज तेलंगाना की महिला अफसर से बाचतीच कर खबर छापी है। वैसे ही जैसे इंदौर के विधायक की रिहाई वाले दिन इंडियन एक्सप्रेस ने छीपी थी। पता नहीं, इंदौर में विधायक के शिकार अधिकारी से किन अखबारों ने बात की। दिल्ली में मुझे पहले पन्ने पर खबर तो नहीं दिखी। सी अनीता से यह बातचीत एनबीटी ने आखिरी पन्ने पर छापी है। शीर्षक है, “तेलंगाना की महिला अफसर बोलीं, ऐसे कोई जानवर को भी नहीं मारता”। तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस के विधायक के. कोनप्पा के भाई के हमले के बाद वन अधिकारी सी. अनीता ने सोमवार को हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यह हमला वर्दी पर हुआ है। हम जनता के सेवक हैं और अपना काम कर रहे थे। इस तरह से कोई जानवर को भी नहीं मारता। पार्टी को भी विधायक के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

अमर उजाला में कल छपी खबर (बाएं)। आज नवभारत टाइम्स में छपी खबर जो अमर उजाला में नहीं है।

मैंने कल ही अखबारों में खबरों का फॉलो अप नहीं होने की बात लिखी थी और बताया था कि हिन्दुस्तान टाइम्स ने पुणे में दीवार गिरने से 15 लोगों की मौत के मामले में फॉलो अप किया है। यह दिलचस्प है कि इंदौर में अधिकारी को पीटे जाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं छापने वाले अमर उजाला ने तेलंगाना में महिला अधिकारी को पीटे जाने की खबर तो पहले पन्ने पर छापी पर आज उस घटना का फॉलो अप पहले पन्ने पर नहीं छापा। मुझे यह अटपटा लगा और पुष्टि करने के लिए मैं इंटरनेट पर दिल्ली वाले ई पेपर को पूरा अखबार पलट गया। कल खबर इसी में थी। पर आज मुझे खबर नहीं दिखी। अमर उजाला में पेज 12, देश विदेश की खबरों के पन्ने पर एक खबर, तेलंगाना के पुलिस प्रमुख तलब – जरूर दिखी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिला वन अधिकारी की ड्यूटी की दौरान पिटाई किए जाने पर चिन्ता जताई है और इस मामले में पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट मांगी है। इस खबर में नवभारत टाइम्स की दूसरी खबर का शीर्षक है पर खबर नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

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One comment on “सत्ता के हाथों बिक चुके हिंदी के इन बड़े अखबारों के संपादकीय विवेक पर थूकें!”

  • विद्या नन्द मिश्रा says:

    संपादकीय बस एकमात्र खानापूर्ति रह गया है हालांकि अब इस पृष्ठ पर विश्लेषणात्मक तो नहीं लेकिन गुणगान अवश्य प्रतीत होता है।

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