छत्तीसगढ़ के दो पत्रकारों को विशेषाधिकार हनन नोटिस, एक का विधानसभा दर्शक दीर्घा का पास भी छिना

छत्तीसगढ़ में पत्रकारों के खिलाफ लगातार विद्वेषपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर तक के पत्रकार इसके शिकार हो रहे हैं। अब तो छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भी पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इसका ताजा उदाहरण चार दिन के शीतकालीन सत्र में देखने मिला। जिसमें सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़ के पत्रकार शशांक तिवारी और संपादक को विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी कर दिया गया। इतना ही पत्रकार शशांक तिवारी पत्रकार दीर्घा का पास छीन लिया गया।

चर्चा है कि विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने यह कार्रवाई अखबार के एक चुटीले कॉलम ‘राजपथ-जनपथ’ में लिखी टिप्पणी के आधार पर की है। इसमें लिखा गया था कि विधानसभा का सत्र 18 दिसंबर यानी गुरू घासीदास की जयंती के दूसरे दिन बुलाया गया, जिससे दूर दराज के विधायक चुनावी साल में समाज के कार्यक्रम में शिरकत करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। बताया जाता है कि इस कॉलम में लिखी बातों से विधानसभा अध्यक्ष इतने नाराज हो गए कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के बीच आधी रात डेढ़ बडे कार्रवाई का आदेश दे दिया।

गौर करने लायक बात यह है कि कॉलम में लिखने वाले का नाम नहीं जाता। इसे संपादक से लेकर हर बीट के रिपोर्टर और डेस्क के लोग लिखते हैं। इसे पत्रकार शशांक तिवारी ने लिखा भी नहीं है। इन पर यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि वे विधानसभा की रिपोर्टिंग करते हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका है जब इस तरह एकतरफा कार्रवाई की गई है। संसदीय परंपराओं के अनुसार कार्रवाई करनी से पहले संबंधित को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाता है, लेकिन यहां सीधे कार्रवाई कर दी गई।

रायपुर प्रेस क्लब की इस मुद्दे पर शनिवार को एक बैठक भी हुई। इसमें इस कार्रवाई का विरोध करने का फैसला लिया गया। बैठक में तय किया गया कि विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने भी विधानसभा अध्यक्ष से बात करके इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।

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