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उत्तर प्रदेश

यूपी में अधिकतर पुलिस अफसरों के फोन उनके PRO अटेंड करते हैं, क्या इसीलिए यह व्यवस्था लागू की गई थी? – सुलखान सिंह

जनशिकायतें सुनते पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह 2017

सुलखान सिंह-

जनता से मुलाकात

आज वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी श्री नवनीत सिकेरा ने, वर्ष 2017 की यह फोटो भेजी। यह फोटो मेरे पुलिस महानिदेशक कार्यकाल का है जिसमें कार्यालय कक्ष में लोग बैठे हैं, खड़े हैं और अपनी समस्याएं बता रहे हैं। मैंने प्रतिदिन 11 बजे से 1 बजे तक, जनशिकायतें सुनने का समय नियत कर रखा था। इस दौरान कोई भी मिल सकता था।

लेकिन आजकल बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण खबरें सुनने में आ रही हैं। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसी से मिलते ही नहीं हैं। लोग समझते हैं कि यदि मैं कह दूंगा तो अधिकारी मिल लेंगे पर ऐसा भी नहीं हो रहा है। कुछ गिनती के अधिकारी हैं जो फ़ोन उठाते हैं अथवा अपनी ओर से मिलाकर बात कर लेते हैं वरना अधिकांश अधिकारी बार-बार फ़ोन मिलाने पर भी बात नहीं करते।

अभी दो-तीन दिन पहले, प्रयागराज से एक वकील साहब ने मुझे कहा कि मैं पुलिस आयुक्त प्रयागराज से कह दूं कि वे उनसे मिल लें। मैंने पुलिस आयुक्त को फ़ोन मिलाया तो उनके पीआरओ ने उठाया। उसने मुझे कहा कि वे उधर से फोन मिलाकर बात करा देंगे लेकिन आजतक पुलिस आयुक्त प्रयागराज ने बात नहीं की। यही हाल अधिकतर पुलिस आयुक्तों का है। पता नहीं, पुलिस आयुक्त व्यवस्था क्या इसीलिए लागू की गई थी?

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