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सुख-दुख

दिग्गज पत्रकार प्रवीणचंद्र छाबड़ा को जीवन गौरव पुरस्कार मिला है!

ओम थानवी-

म उन्हें आदर से प्रवीणजी भाईसाहब कहते हैं। प्रवीणचंद्र छाबड़ा। दिग्गज पत्रकार। राजनीति के क़िस्सों की खान। गांधी-विचार को जीने वाले। शतायु होने की देहरी पर।

उन्हें जीवन गौरव पुरस्कार मिला है। सुबह मैंने फ़ोन किया कि घर आता हूँ आशीर्वाद लेने। उन्होंने कहा, तुम बाद में आना। अभी मैं आ रहा हूँ। और वे चले आए।

वे पिंकसिटी (जो कहीं से ‘पिंक’ नहीं) प्रेस क्लब गए थे। आज वहाँ चुनाव हैं। वोट डालकर आए। मैं तो कभी किसी प्रेस क्लब का सदस्य बना नहीं। वे बोले — अच्छा किया!

भाईसाहब सुनते कुछ कम हैं, पर स्मृति हरी है। ख़ुद कहते हैं, पुरानी बातें याद हैं। नई भूल जाता हूँ।

ख़ूब सक्रिय हैं। कल सनी सेबास्टियन की किताब के लोकार्पण में आए थे। उनके भी कुछ संस्मरण किताब में हैं।

अगले महीने उनकी अपनी किताब ‘निज से निज को’ का लोकार्पण होगा। नंदकिशोर आचार्य करेंगे। न्यायविद् विनोदशंकर दवे की अध्यक्षता में। कहते हैं, मुझे भी बोलना होगा। क्यों नहीं।

हाल में मैंने न्यायमूर्ति पानाचंद जैन (98) के साथ मिलापचंदजी डांडिया (94) के घर जलेबी खाई। प्रवीणजी भाईसाहब (95) के साथ आज चूरू के पेड़े का सेवन हुआ। शाम को वरिष्ठ पत्रकार एफ़सी जैन (86) के घर भोजन है। दिल्ली में हों तो शाम अशोक वाजपेयी (85) के सान्निध्य में गुज़रेगी ही, या आइआइसी के लॉन में प्रयाग शुक्ल (86) से बतियाते हुए।

हम कितने ख़ुशनसीब हैं कि गुणी बुज़ुर्गों की क़रीबी छाया हमें नसीब है।

तो हमें ओल्ड-एज कहने वाले ख़बरदार। सत्तर के भी नहीं हुए। बुज़ुर्गों की छाया में तो समझिए अभी लड़कपन में हैं!

(फ़ोटो : ऋजु अनिमेष)

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