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आज के अखबार : राहुल-तेजस्वी के आरोप या अमेरिकी टैरिफ से नुकसान की कोई खबर ढूंढ़ते रह जाओगे

संजय कुमार सिंह 

सरकार और उसके समर्थक प्रचारक जब चुनाव आयोग और मतदाता सूची से संबंघित गड़बड़ियों पर राहुल गांधी के आरोपों को नजरअंदाज कर रहे हैं, सीएसडीएस के संजय कुमार की माफी की आड़ में उनकी जांच और नतीजों पर सवाल कर रहे हैं तब चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के खिलाफ (अभी तक) कोई कार्रवाई नहीं की है। राहुल गांधी के बाद उनके जैसे ही आरोप लगाने वाले अनुराग ठाकुर को शपथ पत्र देने का कोई नोटिस दिये जाने की खबर नहीं है। तेजस्वी यादव को दो एपिक कार्ड रखने के आरोप में दिये गये नोटिस का क्या हुआ पता नहीं है तब राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भाजपा में मिलीभगत का आरोप लगाया है। देशबन्धु में आज पहले पन्ने की लीड के अनुसार उन्होंने यह भी कहा है कि एसआईआर में जो 65 लाख नाम कटे हैं उनमें एक भी भाजपा का नहीं है। मेरा मानना है कि अगर कुछेक हों भी तो मतदाता सूची में नाम को लेकर भाजपा में कोई चिन्ता नजर नहीं आ रही है। उससे संबंधित कोई खबर या सक्रियता दिख नहीं रही है। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह आरोप है कि चुनाव आयोग मोदी आयोग हो गया है। यह तब है जब चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस दे रखा है। देशबन्धु में इस (राहुल और तेजस्वी के नये आरोपों) पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जरूर कहा है कि राहुल तेजस्वी बेशर्मी से झूठ बोल रहे हैं। खबर में मिलीभगत के बारे में कुछ नहीं है लेकिन उन्होंने यह कहा बताते हैं कि राहुल गांधी हर संवैधानिक संस्था पर बेशर्मी से आरोप लगाते हैं। लेकिन उनके इस बयान से चुनाव आयोग का बचाव करने की उनकी बेशर्मी साबित हो रही है यह मुद्दा नहीं है। मिलीभगत और मोदी का आयोग कहे जाने के बाद इस पलटवार में कोई दम नहीं है। वैसे भी यह पलटवार चुनाव आयोग को करना चाहिये। बीजेपी या उसके नेता क्यों कर रहे हैं।

दूसरी ओर, यह खबर दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। दूसरे शब्दों में इस खबर को दूसरे अखबारों ने महत्व नहीं दिया है। आज कई अखबारों की लीड गगन की ओर बढ़े सधे कदम (नवोदय टाइम्स) जैसी खबर है। इसका उपशीर्षक है, इसरो ने गगनयान पैराशूट प्रणाली के लिए पहला एयर ड्रॉप परीक्षण पूरा किया। एक और खबर है – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में नये अध्याय का प्रतीक। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, हवाई हमले नाकाम करेगी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली, परीक्षण सफल। उपशीर्षक है, ऑपरेशन सिन्दूर के साढ़े तीन महीने बाद भारत ने दिखाई ताकत… ओडिशा तट पर परीक्षण। एक और खबर है, समुद्र में उतरा अंतरिक्ष से वापसी का क्रू मॉड्यूल। जाहिर है कि यह सरकार के प्रचार की खबर है और इससे आम आदमी को या देश को कोई फायदा नहीं होने वाला है। इससे सीमा जरूर सुरक्षित होगी पर सीमा की रक्षा के लिए अग्निवीर जैसी नौकरी और सेवा शर्तें इसी सरकार की हैं। जहां तक विदेश संबंध का मामला है मैंने कल लिखा था, “इंडियन एक्सप्रेस की खबर इस प्रकार है, रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के खिलाफ मास्को से डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन पर निशाना साधने के कुछ ही दिनों बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोहराया कि अमेरिकी टैरिफ गैरवाजिब और अनुचित है। उन्होंने कहा कि इसे तेल से संबंधित मामले के रूप में गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भारत कभी भी किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा करने से समझौता नहीं करेगा। स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी चलाये जा रहा है और अखबार यह बता रहा है कि विदेश मंत्री ने पहले भी निशाना साधा था और अब फिर कहा है। दूसरी ओर, अमेरिका जो कर रहा है  भारत उसे झेलने को मजबूर है, कह रहा है कुट्टी नहीं हुई है, वार्ता चल रही है पर नतीजा कुछ नहीं निकला है।”

आप समझ सकते हैं कि अखबार और उनके लिए काम करने वाले लोग सरकार की सेवा या प्रचार करने के लिए कितने व्यग्र हैं। दूसरी ओर, खबरों से सरकार की चाहे जितनी सेवा हो बहुत सारे अनुत्तरित सवाल रह जाते हैं जिनका जवाब नहीं मिलता। आज के समय में खबरों से अगर आपको किसी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है तो आप सोशल मीडिया पर जवाब ढूंढ़ सकते हैं। मुझे अक्सर जवाब नहीं मिलते हैं। उदाहरण के लिए हाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से संबंधित एक खबर थी, 1.6 लाख बूथ एजेंट…. एसआईआर पर सिर्फ दो आपत्तियां, सुप्रीम कोर्ट हैरान। सच्चाई यह है कि बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) न तो सरकारी पद है और न ही वह राजनीतिक दलों का मुलाजिम होता है। मतदान या चुनाव में सहयोग के लिए पार्टी की ओर से चुना या बनाया गया बीएलए जिसे पोलिंग एजेंट भी कहा जाता है, सरकारी या चुनाव आयोग का काम क्यों करे? वैसे भी वह पार्टी के कर्ता-धर्ता के अनुसार बदलता रहेगा। उम्मीदवार तो बदल ही सकता है। चुनाव आयोग को उनकी सेवाओं की जरूरत थी तो एसआईआर शुरू करने से पहले राजनीतिक दलों से इस बारे में बात की जानी चाहिये थी। ऐसी कोई खबर तो नहीं है पर बाद की खबरों से लगा कि चुनाव आयोग इनकी आपत्तियों पर आश्रित होता है और इनकी आपत्ति नहीं आने पर प्रारूप मतदाता सूची में गलतियां सुधारने की उसके पास कोई व्यवस्था नहीं है और उसका तर्क यही रहा कि कोई शिकायत नहीं आई थी इसलिए सब ठीक या तब शिकायत नहीं की तो अब क्यों?  

कहने की जरूरत नहीं है कि सरकारी खर्च से बनने वाली मतददाता सूची को दुरुस्त होना चाहिये और नहीं होने का मतलब है सरकारी धन की बर्बादी और सरकारी काम ढंग से नहीं करना। इसके बावजूद गलतियों पर ना शिकायत करने वालों का, ना आरोप लगाने वालों का ना समाज, मीडिया या सुप्रीम कोर्ट का रुख सवाल करने वाला था। बिहार के एसआईआर में आखिर गलतियों की भरमार क्यों है? पुरानी को संशोधित किया गया होता तो माना जा सकता था कि गलतियां पहले से चली आ रही हैं। पर खबरों के अनुसार एसआईआर के तहत मतदाता सूची नये सिरे से बन रही है। उसमें गलतियां हैं, 65 लाख नाम गलत ढंग से हटा दिये गये हैं (पता नहीं कहां से कैसे) जैसी खबरों के बीच आज इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार में एसआईआर के दूसरे चरण में 98 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज मिल गये हैं। निश्चित रूप से यह इन शिकायतों और शंकाओं को गलत बताने के लिए है कि बिहार में लोगों के पास मांगे गये दस्तावेज नहीं हैं। इससे यह भी साबित होता है कि लोगों ने हार मान ली और उन्हीं ने आवेदन किया है जिनके पास दस्तावेज हैं। एक सवाल यह भी बनता है कि दूसरे चरण में 98 प्रतिशत दस्तावेज आये हैं तो पहले चरण में कितने थे और इतनी गलतियां क्यों हैं। खबर में ही कहा गया है कि चुनाव आयोग के पास इसका विवरण नहीं है कि मांगे गए 11 दस्तावेजों में से कौन से जमा कराये गये हैं।  

खबरों से लग यही रहा है कि एसआईआर या मतदाता सूची में नाम लिखने-लिखवाने के लिए कोई मानक प्रक्रिया नहीं है, ना किसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। संभव है मुझे ऐसा गलत खबरें पढ़ने के कारण लगता हो या मैंने सही खबरें नहीं पढ़ी हो। यह भी संभव है कि सभी अखबार ऊल-जलूल लिख रहे हों पर सही सूचना कहां है, या चुनाव आयोग की साइट पर ही है यह भी तो अभी तक नहीं कहा गया है। फिर भी खबरें जो छप रही हैं वो आप पढ़ ही रहे होंगे। इन सबके बावजूद इंडियन एक्सप्रेस में जानकारी बढ़ाने या चुनाव आयोग की छवि ठीक करने वाली खबर नहीं है। चार कॉलम की फोटो (और इतनी ही बड़ी खबर)  के जरिये बताया गया है कि डीआरडीओ ने उड़ीशा में इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम का परीक्षण किया। यह सब तब है जब रफाल विमान खरीदने के समय उसकी कीमत बढ़ने का कारण नहीं बताया गया था उसकी विशेषताएं नहीं बताई गई थीं। आपको याद होगा, तब कहा गया था कि यह डील “इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट” के तहत है ताकि वायुसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसलिए कुछ शर्तों को बदला गया और कीमतें बढ़ सकती थीं। सरकार ने दावा किया कि जो राफेल विमान भारत को मिले हैं, वे “बेस मॉडल” नहीं हैं, बल्कि भारतीय जरूरतों के अनुसार अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, सेंसर और कस्टमाइजेशन के साथ हैं। आज यह बताया जाना चाहिये था कि राफेल ऐसे एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली से सुरक्षित हैं या नहीं और आपरेशन सिन्दूर के दौरान गिराये गये थे या नहीं तब इनका उपयोग किया गया था या नहीं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में ये खबरें नहीं हैं या छोटी हैं पर चुनाव आयोग और 98.2 प्रतिशत दस्तावेज के साथ आवेदन मिलने की खबर जरूर है। एशियन एज में सरकारी प्रचार के साथ राहुल गांधी का यह दावा है कि विपक्ष एकजुट है और बिहार में वोट चोरी नहीं होने देगा। तमाम विषयों पर संसद में बहस नहीं कराने और इस कारण विरोध तथा इसी की वजह से संसद की कार्यवाही नहीं चल पाना सर्वविदित होने के बावजूद अमित शाह ने कहा है और दि एशियन एज ने पहले पन्ने पर दो कॉलम की खबर और तीन कॉलम के शीर्षक से बताया है कि राजनीतिक लाभ के लिए संसद की कार्यवाही रोकना ठीक नहीं है। यह इस तथ्य के बावजूद है कि वोट चोरी पर संसद में चर्चा नहीं हुई या नहीं कराई गई। निर्वाचित जनप्रतिधियों को आरोपों की जांच के नाम पर जेल में रखा गया, जो पहले से आरोपी थे उन्हें (या उनमें से कइयों को) भाजपा में शामिल कर लिया गया। इसके बावजूद ऐसा विधेयक पेश करने की हिमाकत की गई कि कोई महीने भर जेल में रह जाये तो पद चला जायेगा। कहने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके घेरे में प्रधानमंत्री को भी होना चाहिये लेकिन इस बात पर चर्चा नहीं हो रही है कि प्रधानमंत्री की एंटायर पलिटिकल साइंस की डिग्री का क्या मामला है या प्रधानमंत्री के कार्यालय से चलने वाला पीएम केयर्स आरटीआई से मुक्त कैसे है। चर्चा नहीं हुई यह तो सरकारी काम था लेकिन अखबारों ने खबर भी नहीं लिखी या जो लिखी वह नहीं के बराबर है।

द हिन्दू में चुनाव आयोग की खबर तो है ही, भाजपा का यह दावा भी है कि आधार अकेले वैध सबूत नहीं है। अगर यह वैध सबूत नहीं है तो इसकी जरूरत क्या है और इसे लाया किसलिये गया था यह पता नहीं चला। जो भी हो, भाजपा ने कहा है तो खबर है ही पर मैं खबरों के चयन की बात कर रहा हूं और यह तथ्य है कि राहुल गांधी या तेजस्वी यादव का आरोप पहले पन्ने लायक नहीं माना गया है। हिन्दू में रक्षा मंत्री की प्रचार वाली खबर उनकी फोटो के साथ है और कहने की जरूरत नहीं है कि भारत सरकार ने अगर सीमा की रक्षा के लिए इन उपलब्धियों की व्यवस्था की है तो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्र में क्या किया है और जो किया है वह ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर भी है कि नहीं उसकी चर्चा ना संसद में ना मीडिया में है। यहां मई में सु्प्रीम कोर्ट से रिटायर हुए न्यायमू्र्ति अभय एस ओका से बातचीत के आधार पर एक खबर है जो बताती है कि न्यायमूर्ति ओका की राय में कुत्तों वाले मामले को दूसरी पीठ के पास भेजने से गलत संकेत गये हैं। उन्होंने कहा है कि कोई भी पीठ अपने फैसले पर पुनर्विचार कर संशोधित कर सकती है लेकिन मुख्य न्यायाधीश किसी पीठ से यह नहीं कह सकते हैं कि आदेश को संशोधित किया जाये। अगर मामले को बड़ी पीठ के पास भेजना था तो पहले वाली पीठ में नए जजों को शामिल किया जा सकता था। या जिस पीठ के पास भेजा जाता तो उसे मामला पहले सुनने वाले दो जजों की पीठ का विस्तार होना चाहिये था। मुझे लगता है कि कुत्तों के लिए समय निकाल लेना और उसे संशोधित भी कर देना, बिहार एसआईआर पर कई बार सुनाई करने का असर यह हुआ है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित विवाद के शीघ्र निपटान के लिए कोई मांग नहीं की जा सकी है।

इन और ऐसी खबरों के बीच द टेलीग्राफ ने आज बताया है कि ट्रम्प के टैरिफ के कारण मुरादाबाद से निर्यात बाधित हुआ है, रोजगार संकट में हैं और तीसरी पीढ़ी के पीतल व्यावसायी तथा निर्यातक सचिन चड्ढा ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एकतरफा दोस्ती ने मुरादाबाद के प्रमुख पीतल व्यवसाय को मुश्किल में डाल दिया है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि प्रधानमंत्री ने स्वदेशी पर जोर बढ़ा दिया है। द हिन्दू में आज आधे पन्ने से ज्यादा का विज्ञापन है। फिर भी जो खबरें पहले पन्ने पर हैं वो बता चुका। लीड हिन्दुस्तान टाइम्स में विज्ञापन कम होने के बावजूद सिंगल कॉलम में है और आधार कार्ड पर भाजपा का ज्ञान तो पहले पन्ने पर नहीं ही है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने  आधे पन्ने की जगह में ही यह खुलासा किया है कि 50 प्रतिशत टैरिफ की शुरुआत से पहले भारत ने ट्रम्प के पूर्व सलाहकार की लॉबिइंग फर्म की सेवाएं ली थीं।    

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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