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सुख-दुख

संघर्ष के इस रास्ते पर स्वागत है शरद!

एनडीटीवी से 17 साल बाद अचानक इस्तीफा देने वाले पत्रकार शरद शर्मा को लेकर सीनियर पत्रकार और यूट्यूबर रवीश कुमार ने क्या कुछ लिखा है, नीचे पढ़ें….


रवीश कुमार-

याद रखना कि पत्रकारिता यहाँ मिट चुकी है। जब तक हो सकता है जमकर करो, फिर कुछ और भी करो। सभी को अपनी आग में जलना है। मीडिया संस्थानों के बिक जाने के बाद व्यक्ति प्रयास तो कर सकता है लेकिन जब तक गोदी मीडिया का सवाल लोकतंत्र के सामूहिक अस्तित्व और भविष्य का नहीं बनेगा, हज़ारों लोगों को अच्छा रोज़गार देने वाली पत्रकारिता उजाड़ होती रहेगी बल्कि हो चुकी है। अब यहाँ नैतिकता की आख़िरी ईंट भी नहीं बची है।

काश कोई हर ट्रक और टेंपो के पीछे लिखवा देता कि गोदी मीडिया भारत के लोकतंत्र का हत्यारा है। एक लाइन लिखने में लोगों की हालत ख़राब है लेकिन सच तो यही है। गोदी चैनल पत्रकारिता के संस्थान भी चलाते हैं और वहाँ पढ़ने लोग जा भी रहे हैं। पता नहीं उन छात्रों को क्या पढ़ाया जाता होगा।

गोदी मीडिया सरकार के गुनाहों पर पर्दा डालता है और अपने गुनाहों पर भी। महाराष्ट्र की हालत देख लो, कैसी चुप्पी पसरी है। इस मीडिया के रहते कुछ भी साबित किया जा सकता है।

कभी-कभी सोच कर डर लगता है कि गोदी चैनलों में जो अच्छे पत्रकार हैं वो किस तरह अपनी रात काटते होंगे। तर्कों से समझाते होंगे फिर करवट बदलते होंगे। वहाँ की बातों को छोड़ अपने रास्ते पर निकल चलो। देखो ज़िंदगी कहाँ ले जाती है। बस हौसला बुलंद रखना। ऐसा काम करना कि दूसरों को भी यह रास्ता अपनाने का हौसला मिले। अब तुम स्वयं के साक्षी हो।

आप सभी से अनुरोध है कि शरद का हौसला बढ़ाइये। उनके चैनल को सब्सक्राइब कीजिए। शरद को शुभकामनाएँ।

मूल खबर…

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