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आज के अखबार : सबसे बड़ी खबर है, प्रधान सेवक मानसून सत्र के दौरान फुर्र हो जायेंगे, देखिये प्रस्तुति  

शीर्षक है, सबसे अच्छे उपयोग में नहीं है। हालांकि, मुंबई में नगर बस सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी का नाम बेस्ट यानी सर्वश्रेष्ठ है इसलिये यहां बेस्ट शब्द के दो उपयोग है। कैप्शन कुछ इस प्रकार है, कानूनी विवाद और ठेकेदार के बकाया भुगतान के कारण बेस्ट अंडरटेकिंग द्वारा वेट लीज पर ली गई 100 से ज्यादा बसें मुंबई के वडाला डिपो में जरूरत से ज्यादा बढ़ गई हरियाली के बीच खड़ी हैं। भिन्न बैंकों के दावे वाली ये बसें एक कोर्ट रिसीवर के कब्जे में हैं। बेस्ट के पास 437 बसों का स्वामित्व है जबकि 2157 निजी ठेकेदारों के साथ वेट लीज करार पर चलाई जाती हैं। 2014 में बेस्ट के पास 4288 बसें थीं। इंडियन एक्सप्रेस की फोटो, अमित चक्रवर्ती का विवरण। ऐसी न्यूज फोटो कभी-कभी ही दिखती है।  

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों की लीड यही है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होगा। भिन्न अखबारों ने इसे अलग-अलग ढंग से रखा है। उस पर आने से पहले बता दूं कि यह तो सबको पता था, बहुत पहले से पता था और पुलवामा, ऑपरेशन सिन्दूर, युद्ध और युद्ध विराम के बाद जब रफाल गिराये जाने की चर्चा थी और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग हो रही थी तो मानसून सत्र की तारीख की घोषणा करके उस मांग से पीछा छुड़ाया गया था। इसके लिए पहले से तय मानसून सत्र की तारीख की घोषणा समय से पहले कर दी गई थी। आज से शुरू होने वाले संसद सत्र के लिए कल जब सर्वदलीय बैठक थी तो यह खबर मेरे नौ अखबारों में सिर्फ देशबन्धु में लीड थी। आज जब सबको पता है कि सत्र शुरू हो जायेगा और सीधा प्रसारण होगा तो सभी अखबारों ने जोर-शोर से बताया है कि आज संसद में क्या-क्या होगा या हो सकता है। मुझे नहीं लगता कि यह खबर इतनी नई है। आज की नई सूचना दि एशियन एज, हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस में सेकेंड लीड है। सूचना है, प्रधानमंत्री बनने से पहले प्रधानसेवक और चौकीदार बनने की बात करने वाले, प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रेस कांफ्रेंस न करके मन की बात करने और कभी छुट्टी न लेने जैसा प्रचार और रोज 18 घंटे काम करने, देश के पैसे बचाने के लिए होटल में रुकने की बजाय रात में यात्रा करने जैसे जुमले फैलाने वाले प्रचारकों की सेवा लेने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फिर विदेश जा रहे हैं और मानसून सत्र शुरू होने के तीसरे दिन विदेश यात्रा पर निकल जायेंगे। 

टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर लीड के साथ सिंगल कॉलम में है। लीड का शीर्षक है, सरकार ने कहा कि संसद में सिन्दूर और ट्रम्प के दावों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। विदेश यात्रा की खबर का शीर्षक है, मोदी-स्टारमर की चर्चा व्यापार-रक्षा पर फोकस करेगी। खबर में बताया गया है कि इस हफ्ते (बताया जाना चाहिये था कि जब संसद का मानसून सत्र चल रहा होगा तब इस हफ्ते का मतलब सप्ताहांत नहीं है) अपने यूके दौरे के दौरान 24 जुलाई को अपने समकक्ष के साथ व्यापार आदि पर बातचीत करेंगे। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड के अनुसार, संसद आज खुल रही है तो ऑपरेशन सिन्दूर फोकस में होगा। यहां तीन कॉलम की सेकेंड लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री यूके, मालदीव जायेंगे, एफटीए और संबंध एजंडा में सबसे ऊपर। इंडियन एक्सप्रेस की लीड मानसून सत्र शुरू होने से पहले के सर्वदलीय बैठक की खबर है। फ्लैग शीर्षक यही है जबकि मुख्य शीर्षक है, विपक्ष ने पहलगाम, बिहार एसआईआर का मुद्दा उठाया, सरकार ने कहा सदन को चलना चाहिये। उपशीर्षक है, सरकार ने ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा की विपक्ष की मांग मंजूर की; विपक्ष ने प्रधानमंत्री के जवाब देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा की खबर इसके साथ दो कॉलम में है।  भारत यूके व्यापार करार पर दस्तखत, मालदीव के साथ इस हफ्ते प्रधानमंत्री के दौरे का फोकस है। उपशीर्षक है, मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मोदी ‘सम्मानित अतिथि’ होंगे। 

कहने की जरूरत नहीं है कि किसी ने यह नहीं बताया है कि प्रधानमंत्री संसद सत्र के दौरान (फिर) विदेश जा रहे हैं। भले ही यह बताना जरूरी नहीं है और इसे छिपाया भी नहीं गया है पर लेखकीय सेवा ऐसे ही होती है और इसे रेखांकित किया जाना जरूरी है। खासकर इसलिए कि इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी एक खबर के अनुसार बिहार में इस समय चल रहा विवादास्पद विशेष सघन पुनरीक्षण झारखंड में एक साल पहले के चुनाव आयोग के अनुभव का विस्तार लग रहा है। मोटे तौर पर माना जा सकता है कि बिहार का एसआईआर पिछली बार जो कहा, किया और समझा गया उससे आगे की कार्रवाई है। इंडियन एक्सप्रेस की इस खबर को पढ़िये और समझिये कि कैसे चुनाव आयोग, सरकार (दरअसल नरेन्द्र मोदी) की सेवा करने की कोशिश में नजर आ रहा है। यहां भी कुछ कहा नहीं गया है, समझने वाले समझ जायेंगे। पर क्या कहना है वह अलग है। हालांकि अभी यह मुद्दा नहीं है। अभी मुद्दा यह हो सकता है कि इंडियन एक्सप्रेस की खबर अंग्रेजी में छप रही है तो हिन्दी वालों को कैसे समझ में आयेगी और सरकार तो यह काम करने से रही। सरकार नहीं करेगी, अखबार वाले कर नहीं रहे हैं तो उन्हें कैसे बताया जाये जिन्हें अंग्रेजी नहीं जानने पर शर्म नहीं आती है। आनी भी नहीं चाहिये पर यह मुद्दा है क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कह चुके हैं कि इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी, ऐसे समाज का निर्माण अब दूर नहीं है।

अमर उजाला में लीड का शीर्षक है, मानसून सत्र आज से… ऑपरेशन सिन्दूर, ट्रम्प के दावों और बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर हंगामा तय। उपशीर्षक है, ऑपरेशन सिन्दूर समेत मुख्य मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी नहीं, रक्षामंत्री राजनाथ देंगे दोनों सदनों में जवाब। खबर यह भी है और खबरों के फौन्ट में ही बोल्ड, इटैलिक्स  अक्षरों से लिखा है, पीएम मोदी आज सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से रू-ब-रू होंगे। छह कॉलम की लीड के साथ सिंगल कॉलम की एक छोटी सी खबर का शीर्षक है, “जवाब देना पीएम मोदी की नैतिक जिम्मेदारी है : कांग्रेस”। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, विपक्ष उठायेगा पहलगाम, एसआईआर का मुद्दा, सरकार ने कहा चर्चा को तैयार। द टेलीग्राफ की लीड का फ्लैग शीर्षक है, केंद्र सदन में बिहार की मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इच्छुक नहीं है। सिन्दूर चर्चा पर सरकार की सहमति। यहां प्रधानमंत्री के विदेश यात्रा पर जाने की तैयारी का जिक्र पहले पन्ने पर नहीं है। रॉबर्ट वाड्रा के मामले में चार्ज शीट और छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री की गिरफ्तारी की खबर पहले पन्ने पर लीड छापने वाले अमर उजाला ने आज मद्रास हाईकोर्ट की एक खबर को पहले पन्ने पर नहीं छापा है जो नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर है। ईडी (और उसके कामकाज या उपयोग) के बारे में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है, ईडी कोई ड्रोन या सुपरकॉप नहीं है। खबर के अनुसार, ईडी कोई ड्रोन नहीं है कि अपनी इच्छा से हमला कर दे और न ही वह कोई सुपरकॉप है जो उसके संज्ञान में आने वाली हर चीज की जांच करे।

और अब ‘घुसपैठिया’ कावंड़िये

द टेलीग्राफ में आज एक खबर है, “आरोप ‘घुसपैठियों’ पर, उपद्रवी कांवड़िया नहीं। इसमें बताया गया है कि कांवड़ियों द्वारा सीआरपीएफ के एक जवान की एक पिटाई के अगले दिन कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से और सड़क किनारे बने अस्थायी मंच से गुलाब की पंखुड़ियां फेंकते हुए योगी आदित्यनाथ एक बार फिर इन कांवड़ यात्रियों को उनकी यात्रा के दौरान हिंसा के किसी भी आरोप से बरी करने के लिये तैयार थे। दिल्ली-देहररादून हाईवे पर मेरठ के पास दुलहेरा में एक संक्षिप्त भाषण देते हुए उन्होंने कहा, कुछ हिंसक लोग कांवड़ियों में घुसपैठ करके हिन्दू तीर्थ को बदनाम करने के लिए हिंसा कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मिर्जापुर में पिटाई रेलवे स्टेशन पर हुई थी और कार्रवाई रेल सुरक्षा बल ने की है, राज्य पुलिस ने नहीं। रेल पुलिस ने भी मारपीट में तीन ही लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है बाकी चार का मामला टिकट का है। जो भी हो, कांवड़ से लगभग पूरा राज्य परेशान है। फिर भी आज द टेलीग्राफ की इस खबर के अलवा नवोदय टाइम्स में फोटो छपी है जो टेलीग्राफ की खबर के साथ है। इसके ऊपर लिखा है, शिव भक्तों का स्वागत। इसका कैप्शन है, मेरठ में शिवभक्त कांवड़ियों पर फूल की वर्षा करते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। देशबन्धु में यह भी छपा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांवड़ियों को गुंडा माफिया कहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने कहा है, …. कुछ लोग इस पवित्र यात्रा को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके ऊपर सख्त कार्रवाई होगी। यह रही पूरी खबर

इससे अलग, दि एशियन एज में हरिद्वार की फोटो है। कैप्शन के अनुसार यह इतवार के ट्रैफिक जाम की है। इसमें सड़क पर यातायात के बीच बड़ी संख्या में कांवड़िये दिख रहे हैं और इससे पता चलता है कि कांवड़ियों पर फूल बरसाने और उन्हें (या उनकी यात्रा को) बदनाम करने वाले मुख्यमंत्री के रहते पड़ोस के डबल इंजन वाले राज्य में कावड़ियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है या अगर कुछ किया गया है तो वह यही कि उन्हें ट्रैफिक के बीच जाने से रोका नहीं गया है। इसे व्यवस्था नहीं कहा जा सकता है और यह न तो कांवड़ियों के हित में है, ना आम लोगों के और न ही ट्रैफिक के लिये। इस तरह ट्रैफिक जाम होना अपने आप में एक परेशानी है और डबल इंजन वाले राज्य में हिन्दुओं के एक महत्वपूर्ण त्यौहार के मौके पर उसके लिए कोई व्यवस्था नहीं किया जाना और इस तरह ट्रैफिक जाम होना व्यवस्था की भारी कमी है और इसपर खासतौर से ध्यान दिया जाना चाहिये।

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