नोएडा। सहारा मीडिया के न्यूज चैनल सहारा समय और अखबार राष्ट्रीय सहारा के सभी संस्करणों मैं तैनात मीडिया कर्मियों से प्रबंधन 4 माह का वेतन (एक माह का पूरा वेतन और तीन माह का वेतन का 70 फ़ीसदी) लेकर त्यागपत्र देने का अनुरोध कर रहा है। इसे लेकर बीते 2 दिनों से सहारा मीडिया के सभी कार्यालयों में हलचल तेज है। इस बीच मीडिया कर्मियों का कहना है की सहारा में तैनात 70-70 वर्ष के अधिकारी पहले त्यागपत्र देकर उदाहरण पेश करें फिर नए कर्मचारी इस पर विचार करेंगे।
सहारा मीडिया के सभी यूनिटों में कई ऐसे अधिकारी है जिनकी आयु करीब 70 साल है, लेकिन यह त्यागपत्र नहीं दे रहे हैं। लेकिन कम उम्र के मीडिया कर्मियों से त्यागपत्र देकर घर चले जाने की बात कर रहे हैं। इस बीच शहर के नोएडा ऑफिस में बुधवार को कई रिटेनरों ( 60 साल से ज्यादा आयु वाले संविदा मीडिया कर्मी) ने त्यागपत्र दे दिया। प्रबंधन ने उन्हें एक माह की पूरी सैलरी और 3 माह का वेतन का 70 फ़ीसदी धनराशि का तीन चेक दिया गया।
दूसरी तरफ स्थाई मीडिया कर्मियों ने प्रबंधन को त्यागपत्र न देने का यह कहते हुए कि फरमान सुना दिया है वह जैसा चाहे वैसा करें।
सहारा मीडिया से जुड़े कर्मियों का कहना है कि कंपनी श्रम विभाग के नये कानून के अनुसार काम नहीं कर रही है। यदि कंपनी ऑफिस बंद करना चाह रही है, तो बंद कर दे। लेकिन उसके लिए जिन्हें हटाना चाहती है, उन्हें पहले लिखित नोटिस दे, फिर उनके मजीठिया का बकाया वेतन, पीएफ और लीव एनकैशमेंट का पूरा हिसाब करके नियम के अनुसार हटा दे याद त्यागपत्र ले ले। लेकिन यहां तो सब गोलमाल है और प्रबंधन हर आदेश मौखिक पालन कराना चाह रहा है। प्रबंधन इधर कई महीने से जो कार्यालय आदेश जारी कर रहा है, उसमें भी एक नया शब्द (कांपीटेंट अथॉरिटी) करके अपठित हस्ताक्षर से जारी कर रहा है, जिससे मीडिया कर्मी यह समझ ही ना पायें की यह हस्ताक्षर किस अधिकारी का है।
सहारा के सभी यूनिटों के मीडिया कर्मी अब इसी कशमकश के बीच स्थानीय स्तर पर श्रम विभागों के अधिकारियों से लिखित शिकायत कर रहे हैं। प्रबंधन की इस अस्पष्ट नीति से सहारा की सभी यूनिटों में हलचल है और मीडिया कर्मी भाजपा सरकार की लचर श्रम नीति की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।



