नईदुनिया से विदा हुए सलिल टंडन, नए सीईओ बने संजय शुक्ला

इंदौर. नईदुनिया में हुए एक बड़े बदलाव के तहत सीईओ सलिल टंडन ने समूह से नाता तोड़ लिया है. उनका स्‍थान पर आए हैं एचटी मप्र के बिजनेस हेड संजय शुक्‍ला. बताया जा रहा है कि श्री टंडन लंबे समय से अपने निजी कारोबार को खड़ा करने की तैयारी में थे. वे पिछले 8 वर्षों से जागरण समूह से जुड़े थे और कई खास जिम्‍मेदारियों को निभा चुके थे. उन्‍होंने करीब 3 महीने पहले अपने इरादे जागरण प्रबंधन से साझा कर लिए थे. कानपुर में हुई एक उच्‍च स्‍तरीय मीटिंग के बाद 29 जुलाई को श्री टंडन ने अपने विदा होने की सूचना मेल की द्वारा सभी वरिष्‍ठ सहयोगियों को दी.

साढ़े तीन वर्ष पहले टेकऑवर के बाद श्री टंडन ने नईदुनिया की जिम्‍मेदारी संभाली थी. उधर, नए सीईओ संजय शुक्‍ला भी जागरण और एचटी मीडिया में लंबी पारी खेल चुके हैं. एचटी के साथ रहते हुए श्री शुक्‍ला ने यूपी, बिहार और दिल्‍ली में अहम ओहदों पर काम किया है. टेकऑवर के बाद हुए इस सबसे बड़े बदलाव का असर जल्‍द होने की भी चर्चा है. इस क्रम में नईदुनिया के संपादक आनंद पांडे की विदाई तय मानी जा रही है. श्री टंडन ही पांडे को नईदुनिया लेकर आए थे. आने के बाद से ही वे काफी विवादों में रहे. अखबार के प्रसार में बड़ी गिरावट के बाद टीम लीडर के तौर पर भी पांडे असफल रहे.

इंदौर में उनके लाए लोगों की संपादकीय योग्‍यता पर आए दिन उंगली उठती रहती है. पिछले दिनों हुए असंतोष का आलम ये था कि रिपोटर्स ने अपने व्‍हाटसअप पर ब्‍लैक डाट लगाकर महीनेभर आंदोलन किया था. विद्रोह को बाहरी पत्रकार संगठनों ने भी खुला समर्थन दिया था. इसी के बाद कानपुर मंगवाई गई गोपनीय रिपोर्ट के बाद आनंद के दिल्‍ली बुलाए जाने की चर्चा थी. बताया जा रहा है निजी कारणों के चलते की गई गुजारिश पर प्रबंधन ने अपने फैसले को कुछ समय के लिए टाल दिया था. लेकिन सलिल टंडन के जाने के बाद अब विदाई तय मानी जा रही है.



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Comments on “नईदुनिया से विदा हुए सलिल टंडन, नए सीईओ बने संजय शुक्ला

  • 🙂 😆 😆 wah pramodji wah pramodji wah pramodji wah pramodji wah wah pramodji……aapne is nispaksh ki aur iske fattu pnoge pandit ki tabiyat se li hai….in chutiyon ko sahi aaina dikhaya hai aapne….sale apane bap ka akhbar samajh baithe hai nadunia ko….ye kaise bhool gaye jahan sravan garg jaisa aadmi apni man margi nahi chala paya wahan ye moorkh kitne din chal payenge….in moorkho ki galatfahmi hai ki ye log naidunia ko chala rahe hai inhe pata hona chahiye ki nd aaj bni keval unhi loga se nikal raha hai jo salon se yahan dilse kam rahe hai varna pandey ne to indore hi nahi sabhi edition me hingdon ki fouj ikkaththa kar li hai jo montjli meeting me iski moorkhtapoorna batoon par taaliyan peetate hai aur charan vandana kar rawana ho jatee hai itna hi nahi wo iski gyan bhari baten likhne ke liye pad ko bhi meeting room me chod jaate hai phir bhi kitna bharosa hai pandey ko apne in chaplooso par…..sase jyada makkari aur aish to pramod trivedi kar raha hai jo isunne me aaya hai ki iska rishtedar hai..woh naidunia me aane se pahle indore collectorate me logo se 100-100 rs ki bhikh maga karta tha par pandey ke editor bante hi uski chet gayi…2 koudi ke reporter ko sr news editor bana dala…6 mahine me 6 stories bhi nahi ki is roaming reporter ne aur jo bhi un sab me naidunia ke khel lage diye….bhaimiyan 60000 rs par rakhe gaye hai aish karne ke liye upar se yah bhi ki finger punching se mukti roaming jo thahre…..pandey ke jane ke bad choti cut ke kahan giregi ye pandey ko bhi pata nahi chalega…..shesh bad me……..

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  • डीयर मित्रों, आप लोगों की सोच बेहतरीन है। नईदुनिया की बिकवाली के लिए पुराने धंधेबाज कारण बने हैं। श्रवण गर्ग ने भी सांपों से खेलने का शौक पाल लिया था। उनका शौक ले डूबा। सबसे बड़ा अजगर आशीष व्यास था। उसने श्रवण गर्ग को निगल लिया और अगले की गोद में बैठ गया। जागरण मैनेजमेंट का जासूस है। जागरण मैनेजमेंट को आशीष्ा व्यास मध्यभारत की पूरी जानकारी देता है। काम न करे लेकिन वेतन मिलता रहे। नईदुनिया में इसने वफादार पाल रखे हैं। श्रवण गर्ग समझ गए थे। श्रवण गर्ग ने आशीष के वफादारों को बाहर का रास्ता दिखाया था। इसने श्रवण गर्ग को ही निपटा दिया। इसके बाद अपने वफादारों को भर्ती कर लिया। आगे-आगे देखो, किस-किस को खाता है आशीष

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  • आशीष व्यास को महिला ने मारा-मनोज, प्रमोद, महेंद्र करते हैं आशीष के लिए महिलाओं की पहरेदारी
    आशीष व्यास की नजरें महिलाओं पर टिकी रहती है। इसका इंतजाम करते हैं मनोज, प्रमोद, नितिन, महेंद्र श्रीवास्तव, चश्मे में से घूर-घूर कर लडकियांे-महिलाओं को देखना आशीष व्यास का पुराना अंदाज है, दो महिलाओं से चैम्बर में पकडा भी चुके हैं। एक महिला से होटल का बोला । उसने जोर का थप्पड मार दिया। महिला के पति ने मनोज, प्रमोद को भी इंदौर छोडने का कहा है। इसके बाद मारपीट की उम्मीद है।

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  • Suraj sinha says:

    आशीष व्यास मर्द है महान आदमी के बारे में बुरी बोलना ठीक नहीं। छेड़छाड़ की आदत है लेकिन उसे बहार के साथियो ने बिगड़ दिया है.औरत नहीं चाहे तो केबिन में कैसे बुलाया जा सकता है.

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  • rituraj ke nam se post karne wale chakke tujhe kya lagta hai aisa likhane se ashish vyas ki chavi kharab ho jayegiare jo unhe jante hai unhe tujhe ye batane ki jaroorat nahi ki woh kya hai aur unka charitra kaisa hai. iske liye tere certificate ki jaroorat nahi samjha tu. rahi bat jagran ke liye jasoosi ki to tujhe hum bata dete hai ki jagran ki aur sanjay gupta ki kismat achchi thi jo sharvan garg ke sath ashish vyas ko naidunia me le aaye verna nd jis isthiti me aaj hai usse kahi kharab halat me hota aur naidunia ka lagbhag poora staff khali ho gaya hota. sirf a vyas ke karan hi log yahan tike hue hai nahi to s garg aur anand pandey ne jo moorkhtae ki hai vaise me sirf inke charron ke alawa yahan koi nahi dikhta aur ye sabhi jante hai 4-5 gadhe milkar akhabar nahi nikal sakte woh bhi naidunia jaisa…rahi bat mahila ke thappad ki to a vyas ka cabin sound proof to hai nahi ki wo andar kuch karen aur bahar kisi ko pata na chale..ye sirf unhe badnam karne ke liye likha hai par in paglon ko ye nahi pata ki wo badnam nahi ho rahe balki unka nam ho raha hai…ashishji behad sabhya aur sammaniya insan hai aise log patrakarita me kum hi hote hai jinse log itna judav mahsoos karte hai. unke sath kam karne wale har vyakti ko lagta hai ki wo apni bat ya samsya un tak pahucha de uska nirakaran wo jaroor kar denge….to ab in akl ke andho ko samjh aa gaya hoga ki kisi par jootha aarop lagana kitna aasan hai par use proov karna kitna kathin…to saare gadhon ab jao apne aaka ke pas jakar dhenchu dhenchu karo karo aur agle post ki planning karo kyoki pichale me to tum log fail ho gaye ho….aur haa ek bat kan(ear) khol kar sun lo ashishji ke patthon ne agar tay kar liya na to tum aur tumhara boss indore me to kya mp me bhi nazar nahi aaoge samjhe….ab apna sar pito kyoji tum isi layak ho.

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  • save naidunia says:

    मित्रों, मैं भी नईदुनिया का ही मुलाजिम हूं! सभी का का स्‍तरहीन ज्ञान लगातार पढ़ रहा हूं! अपनी समझ के आधार पर आप सभी को बताना चाहता हूं कि यह बेहद दुर्लभ संयोग है कि मध्‍यप्रदेश के सबसे बुजुर्ग अखबार में इन दिनों अब तक की सबसे युवा टीम काम कर रही है! यह भी किसी से छुपा नहीं है कि कई बाहरी ताकतें और बड़े अखबार नईदुनिया की ताकत को तोड़ने में लगे हैं! घर के झगड़े घर में निपट जाएं तो बेहतर नहीं तो सड़क का कीचड़ तो इस टीम का मुंह काला करने पर आमादा है ही! हमारे अपने स्‍टॉफ के नाम से कमेंट लिखने की बेवकूफी कोई बाहरी ही कर सकता है! वरना इतनी पुरानी पोस्‍ट पर कमेंट केवल दो-तीन लोग करते हैं और आठ-दस ही पढ़ते हैं! भाई लोगों बाहरी बहकावे में मत आओ! वैसे भी आनंद पांडे और आशीष व्‍यास को करीब से जानने वाले खुले रूप में दावा करते रहे हैं कि दोनों हर हाल में एक हैं! हो सकता है नीचे के स्‍टाफ की अपनी आपस में कोई निजी अदावत हो, लेकिन ना तो ये व्‍यक्तिगत भड़ास निकालने का सही प्‍लेटफार्म है और ना ही तरीका! जो लोग अखबार से निकाले गए और अब कहीं के नहीं हैं वे रोजाना ना-ना प्रकार से हमारे अखबार को खुलेआम कोसते हैं! प्रेस क्‍लब से लेकर व्‍हाटसअप तक जो खेल खेला जा रहा है वह भी किसी से छिपा नहीं है! मुझे तो ना कोई गुट दिखता है और ना ही होने के हालात! भगवान के लिए एक होकर बाहरी दुश्‍मनों से लड़ो क्‍योंकि आपस की बचकानी बातें तो कभी भी आपस में ही की जा सकती हैं!

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  • ओम द्विवेदी, विनोद श्रीवास्तव, राजेंद्र गुप्ता, रुमनी घोष, आशीष बम, गजेंद्र शर्मा, जितेंद्र व्यास, रितुराज, का रखवाला कौन? इनने अभी तक कौन-कौन सी जिम्मेदारी निभाई है? इन्हें वेतन क्यों मिलता है? इनकी गलतियों को कौन उजागर नहीं होने देता? इन्हे समूह संपादक के खिलाफ कौन मोर्चा खोलने का अंतरघात निर्देश देता है? सोचो, और सोचो, दम लगाकर सोचो। दुनिया का खुलासा करने वाले खबरवीर। हम करते हैं खुलासा। इस रखवाले भीतरघाती का नाम है आशीष व्यास। श्रवण गर्ग को चट कर गया। फेल हो गया श्रवण गर्ग। अरे मूर्ख गुलामो। अब भी सुधर जाओ। आशीष व्यास किसी का सगा नहीं है। महिलाएं नईदुनिया छोड़ रहीं हैं। उनकी इज्जत पर खतरा है। हे मूर्खों, महिलाओं की इज्जत बचाओ। हे अंधो तुम गुलामी त्याग दो। लात पड़ेगी तो कौन बचाएगा। सीखो। समझो। देखो। इसकी चाटना बंद करो। हलाल की कमाई खाओ। भीख मांगकर खाओ। लेकिन धूर्त आश्ाीष व्यास किसी का सगा नहीं है। नईदुनिया में मूर्खों की महफिल सजती रही है, सजती रहेगी।

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  • ab tera kya hoga says:

    ❓बूझो तो जानें❓
    ——————————-
    किस अखबार के स्टेट एडिटर (पोंगा पंडित) को अपने पुराने संस्थान की जासूसी कर नकल करने का शौक लग गया है? भाई मियाँ ने अपने अय्यार भिड़ा रखे हैं, जो पल-पल की खबरें लाते हैं! अब नमूना भी देखें… एपीजे कलाम जैसे ही रुखसत हुए, अय्यार तैयार!!! खबर लाए देश का नंबर 1 अखबार अपना पहला पेज ब्लैक&व्हाइट कर रहा है! भाई मियाँ मचल गए… जिद पे अड़ गए… मैं भी फिर से बेअकल नकल करूंगा… नकल कर भाई मियाँ ने फिर से साबित कर दिया ‘भास्कर भाग्य विधाता”… दूसरी तरफ से खबरी की खोज बता रही है नंबर 1 अखबार के कारिंदों ने भी भाई मियाँ के अय्यार/खुद के गद्दार, आँखों में ले उतार लिए हैं… भोपाल से सुल्तान-ए-सल्तनत ने इंदौर/भोपाल/रायपुर के आकाओं को फरमान सुनाकर ताकीद भी कर दिया है… फिलहाल ‘रंगे सियार’ का भ्रम बनाए रखा जाए… सिर पर सिंग उगाए ‘गधे’ को घोड़ों की दौड़ में भागने भी दिया जाए… वैसे चर्चा तो भाई मियाँ के अपने कुनबे में भी है… रंगे सियार की सियासत घर में भी परदे से बाहर आ गई है… घोंसले (नईदुनिया) का तिनका-तिनका ताड़ गया है कि ये पगला, अगला क्या कदम उठाएगा, ये ‘भगला’ भी नहीं जानता… राजधानी में इन दिनों जमकर कानाफूसी चल रही है कि नकल को अकल बताकर हुजूर मियाँ अपने पुराने घोंसले में फिर लौटना चाहते हैं… पर हमारे इंदौरी-अय्यार तो नंबर 1 अखबारी खेमे में भी हैं. बता रहे हैं नंबर 1 अखबार में आजकल ये जुमला खूब चल रहा है – ‘नकलची ‘बन्दर’ नकल करे, सौ-सौ जूते रोज पड़े’… बात यहीं खत्म हो रही… जुमले के अंत में पूछा जाता है – ‘बंदर’ कौन? एक स्वर में जवाब आता है – “पोंगा पंडित”.
    ————–

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  • फ्रंट पेज ब्लैक कर किसने किसकी नकल की? नंबर ने या नईदुनिया ने? सोच समझ के दो रात्सते हैं।

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  • rakesh udai says:

    श्रवण गर्ग के कंधे पर चढ़कर, भास्कर में संपादक बनने के बाद, यह स्वयं को पूर्णकालिक संपादक ही मानने लगा है। किसी भी अख़बार की लुटिया डुबोनी हो, तो इसके हाथ में कमान दे दो। फिर वह पूरी जान लगा देगा, जिसके फ्लस्वरूप अख़बार नहीं चलेगा। फिर उसने अलग अलग डाल पर नाच-कूद रहे अपने लोगो को कई एडिशन दे दिए हैं, जाहिर है कि उनका भी यही हश्र हो रहा है। हालांकि ये सब, भास्कर से निकाले जाने के बाद, फिर घुसने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

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  • इंदौर में स्‍टेट एडिटर आनंद पाण्डे (पोंगा-पंडित) को उसी के खास चमचे ने धूल चटा दी… मामला विवि से जुड़ी एक खबर का है… हुआ यूं कि किसी मुंहलगे ने भाईमियां स्‍टेट एडिटर साहेब के कान में लोंग (खबर) डाल दी… भाईमियां ने लोंग को लहसून समझ लिया… चमचे ने लहसून को लोकी बनाकर पहले पेज पर चिपका दिया… सुबह के उजाले ने कुलपति की आंखें आक्रोश से भर दी… चूंकि कुलपति उत्‍तर (उत्‍तरप्रदेश) कुल के हैं लिहाजा उन्‍होंने उसी कोटे का ब्रम्‍ह-शस्‍त्र चला दिया… शस्‍त्र ने भाईमियां स्‍टेट एडिटर साहेब के वस्त्र अस्‍त-व्‍यस्‍त कर दिए… घबराहट में भाईमियां स्‍टेट एडिटर ने उत्तर कुल के “उच्च-प्रबंधन” को आधिकारिक जवाब दिया – मुझे तो कुछ पता ही नहीं, मैं तो राजधानी में था…

    अब दूसरा सवाल : भाईमियां स्‍टेट एडिटर साहेब, हम जानते हैं उस दौरान आप राजधानी में कंपनी खर्च पर राजसी ठाठ भोग रहे थे… वहां भी आपके चमचे आपकी चिलम भर रहे थे… लेकिन बगैर पढ़े-बगैर कागज देखे आपने भोपाल से ही लोंग क्‍यों ले ली… और अब जब ले ली तो अपने सबसे ‘चू… चमचे’ को क्‍यों दे दी… खैर, लोंग-लहसून-लोकी के खेल में कुलपति किंग बनकर उभरे हैं… ‘उत्‍तर’ प्रदेश से ऐसा ‘प्रश्‍न’ पूछवाया कि भाईमियां स्‍टेट एडिटर साहेब अब तक पूंछ पकड़े दौड़ लगा रहे हैं… माजरा देख चमचे की आंख में भी बिना बरसात ऐसी बिजली चमकी की गायब ही हो गया था… सूत्र सक्रिय हैं, बता रहे हैं – अब भाईमियां स्‍टेट एडिटर साहेब के कनस्‍तर बजने को है।…

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  • rakesh pundit says:

    गजब लिखते हो मनोज भाईमियां। लौंग, लहसुन और लौकी का क्या गजब का तालमेल जमाया है। तीनों अलग-अलग स्थान पर बड़ा कष्ट देते हैं। लेकिन उड़ता तीर लिया है तो दिक्कत तो होगी। पोंगा पंडित की पुंगी जल्दी ही बजने वाली है, खबर पुख्ता है। अय्यार फिर नंबर वन के दफ्तर के इर्दगिर्द करते दिखाई दे रहे हैं, जमावट चल रही है, नतीजा बाकी है।

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  • ashok kulshreshtha says:

    लेकिन सुरक्षित नंबर बन, भोपाल भी नहीं है। केवल हाथ-पैर जोड़कर बचा हुआ है। फैसली की घ़ंटी वहां भी बजने वाली है।

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  • salil tandon k jane se naidunia ko utna nuksan nahi hoga jitna anand pande ke sampadak bane rahne se ho raha hai. naidunia ke itihas me ye pahla aisa sampadak hai jo 65 sal purane is akhbar ki kabr khodne me shiddat ke sath laga hua hai. lagta hai jagran ke maliko ne aankh moond rakhi hai isiliye unhe ye dikhai nahi pad raha ki kis tarah anand pandey ne patrakarita jagat ke fursati aur faltoo bathe logo ki jamat ikttha kar li hai wo bhi inki aoukat se dugni salary par aur use ye galatfahmi hai ki wo patrakarita ke vishwavidhyalay kahe janee wale is akhbar ko sudhar raha hai….sanjay gupta ki ye galatfahmi to usi samay door ho jati yadi apne indore doure par wo nagar ke kuch chuninda logo se aur akhbar agento se bat kar lete…..jab se pandey ne ye pad sambhala hai tabse to iksi isthiti itni dayneeya ho gayi hai jitni shrvan garg ke samay me thi…..unhone is akhbar ke pillron par hathore chalaye the to panday ne to iski neev hi khod di hai ab kisi bhi samay partekarita ka yah batvraksh dharashayi ho jayega. dekhna yah hai ki ye pandey ke samne hoga ya uske janne ke bad……aur pandey ko to yahan se bhagne ke bad kahi na kahi noukri mil jayegi par iske charrron ka kya hoga ye pata nahi……

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  • भड़ास फॉर मीडिया पर भड़ास निकालने वालों का दुख देखकर मेरे भी घड़ियाली आंसू आखिरकार छलक ही आए। लेकिन भड़ास निकालने वालों पर मुझे गजब का तरस आ रहा है। इस बात पर नहीं कि उन्होंन किसी अखबार के संपादक पर तीखा प्रहार किया है, बल्कि इस बात पर कि उनकी ओछी मानसिकता अब खींझ के माध्यम से जगजाहिर होने लगी है। इन भड़ासियों की जब तक दुकान चली तब तक तो इन्हें पत्रकारिता के सिद्वांत याद नहीं आए और जब इन पर लात पड़ी तो ये सिद्वांत झाड़ने लगे। मुझे हंसी आ रही है कि जीवनभर दलाली करने वाले लोग अब ईमानदारों को सिद्वांत का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा इंदौर से बहुत पुराना नाता रहा है। मैं एक छोटे से शहर से पढ़कर आईएएस बना। इसलिए पत्रकारों से भी मेलजोल है। आनंद पांडे को भी तब से जानता हूं, जब वे आईबीएन 7 में बतौर रिपोर्टर गजब के धमाके करते थे। मैं तब दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर गया था। उस समय मंत्री-सांसदों के सामने इस तरह बेखौफ बात करते थे कि वो जनप्रतिनिधि जो जनता को मूर्ख बनाकर चुनाव जीत जाते हैं, आनंद पांडे के सवालों का जवाब नहीं दे पाते थे। तब मेरा भ्ीा लोकसभा में आना-जाना था। आनंद पांडे की निडरता देखकर मुझे भी पत्रकारिता का कीड़ा काटा करता था लेकिन भविष्य की चिंता में आईएएस की नौकरी बहुत प्यारी थी। मुझे आश्चर्य इस बात का है कि आनंद पांडे अखबार में संपादक रहेंगे या नहीं, यह निर्णय एक अखबार मालिक का होता है। उस पर कुछ फ्रस्टेट पत्रकारों को इतनी चिंता क्यों हैै। ब्लॉग पर अनावश्यक कमेंट कर आप एक अखबार के मालिक को चुनौती दे रहे हैं। दरअसल, सच्चाई और मेहनत को लोग आसानी से स्वीकार नहीं करते। मैं मानता हूं कि जीवन में हर कोई सफल नहंी हो सकता लेकिन किसी की सफलता से इस कदर जलना मानसिक विकलांगता का प्रतीक है। मैं चूंकि नईदुनिया का 25 साल पुराना पाठक हूं। मुझे नईदुेिलया अखबार में अब तो वो पैनापन नजर आ रहा है, जो काफी पहले से गायब हो चुका था। अब तो सरकार के खिलाफ इतना छप रहा है, जो पहले कभी नहीं छपा। मैं मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में रहता हूं। सीएम बैठक में अखबार मंगाते हैं और जब नईदुनिया देखकर कहते हैं, यार इसका क्या करूं। ये अखबार क्यों सरकार की पोल खोलने में जुटा है।
    साथियो, माफ करना आप लोग भी हमारे मित्र हो,लेकिन जो सच है, वो मुझे कहना ही पड़ेगा।

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  • tejasvi gaur says:

    भया ऐसा कौन सा आईएएस है जो कि राज्यसभा से लेकर लोकसभा और केंद्र से लेकर राज्य में मुख्यमंत्री के साथ काम कर चुका है या कर रहा है। क्यों फर्जीवाड़ा मचा रहे हो। याद करो, सीएम ही एक कार्यक्रम में बीच से उठकर चले गए थे। कारिंदों अब बस करो नहीं तो कई आईएएस और आईपीएस लिखने लगेंगे।

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  • sach kah rahe ho tejsawi bhaiya aisa koun gaddar ias hai mp me jo jis thali me khata ho usi me ched karne me laga hai….are jis akhbar me cm ke khilaf chap raha ho tum usi ke editor ki …….pochne me lage ho….thodi si budhdhi to bhagwan ne hane bhi di hai jo yah samjh sake ki kis ias ke pas itna samay hai jo apna kam dham chod ek aknbar ke moorkh sampadak ke bare me likhe…ias mahoday cm ko tumhara nam pata chal gaya to isi pandey ke under me noukri karni pad jayegi aur tumhari purani ichcha bhi poori ho jayegi patrakarita karne ki….par aisi galti mat karna pandey se kam sikhoge to na ghar ke rahoge na ghat ke pandey ke kutte ban kar rah jaoge….to ab aage se apna ias ka gyan logo ki seva karne me lagao jiski tumhe salary mil rahi hai na ki pandey ki chaploosi me kayoki jab iske pas hi kuch nahi milega to tumhe kya dega babaji ka thoolloo……..ab bhool kar bhi is par koi comment nahi karna samjhe gyanchand……aur rahi bat naidunia walon ki to woh samjh gaye hai ki kis aadmi ka istar itna gir gaya hai ki woh farji nam se khud hi apne muh miyan miththoo ban raha hai…..

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  • Anand pandey ke virodhiyon ki baad aa gayi he. lagta he Anand pandey ko uske virodiyon ne jayda bhaio dekar use safal bana diya. ek IAS ne pandey ke fevour me comments kiya he kya ye wahi IAS he jiski pandey ki Khabar chapne ke baad DE shuru ho gayi thi, ye IAS ko kyu patrkarita ka chaska lag raha he. jarur kuch daal me kala he. IAS bade patrkaron se ghabrate he. pandey to waise bhi tejtarrar he. kisi ko nahi chodta. moka aa jaye to apne sage ko bhi suli par taang de. bhai itna bhi patrkarita ka chaska nahi hona chahiye. bhai ab usne mehnat ki hai to kuch nahi keh raha hu.

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  • sunil shukla says:

    भाई पांडे के पीछे इतना क्यों पड़े हो सब लोग। उसकी कुर्सी तो वैसे भी जल्दी जाने वाली है। पांडे के आने के बाद से हर तीसरे महीने 2.5 करोड़ का नुक्सान हो रहा है। संजय गुप्ता ने पांडे को 3 महीने का वक़्त दिया है। पांडे की…… तो वैसे भी मरने वाली है।
    जय हिन्द। जय महाराष्ट्र

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  • dharmendra tiwari says:

    anand pandey ki jai ho. jiski burai hone lage samjh jao wo safal ho gaya. anand pandey me lakh buraiyan ho lekin wo aadmi dabang he. chodta kisi ko nahi he.
    Dharmendra Tiwari
    Patrika bhopal

    Reply
  • dharmendra tiwari says:

    dalaon ki fati padi he. sarkar ki dhadkan bad chuki he. bhaskar ko business chalana he. patrika ko advertisement nahi mil raha isliye goad me baith gaya. ab Naidunia hi bacha he jo sarkar ko thok raha he.bhidu ab to anand pandey par bharosa karo. socho kon damdaar. kya bhaskar ka editor itni himmat dikha sakta he. nahi na to phir kyu——
    jatin thapak ujjain hitwad
    mob- 9669054568

    Reply
  • jatin thapak says:

    dalaon ki fati padi he. sarkar ki dhadkan bad chuki he. bhaskar ko business chalana he. patrika ko advertisement nahi mil raha isliye goad me baith gaya. ab Naidunia hi bacha he jo sarkar ko thok raha he.bhidu ab to anand pandey par bharosa karo. socho kon damdaar. kya bhaskar ka editor itni himmat dikha sakta he. nahi na to phir kyu——
    jatin thapak ujjain hitwad
    mob- 9669054568[/quote]

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  • sunil shukla says:

    आनंद पांडे की तरफदारी करने वालों से मेरे कुछ सवाल है। वो उनका जवाब दे देंगे तो मैं भी मान जाऊंगा पांडे को।
    1 अगर पांडे इतना ही दबंग और समझदार है तो उसके आने के बाद नईदुनिया की साख क्यों गिरी। पांडे के लाये हुए छर्रे प्रमोद त्रिवेदी ने जितनी भी ख़बरें लिखी सब फर्जी थी। अगर कोई और लिखता तो पांडे उसकी नोकरी ले लेता।
    2 पांडे के आने के बाद नईदुनिया का सर्कुलेशन लगातार कम क्यों हो रहा है। मार्किट में नईदुनिया नजर नहीं आ रहा है। पाठक नईदुनिया बंद करते जा रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है। ऐसी हालत तो श्रवण गर्ग के समय भी नहीं थी। उस समय बड़े लोगो के बीच नईदुनिया की साख थी। अब शहर के क्रीम लोगों के बीच नईदुनिया को पांडे की तरह ही ओछा समझा जाने लगा है।
    3 पांडे के आने के बाद नईदुनिया की गंभीरता ख़त्म हो गयी। फ्रंट पेज ने गरिमा खो दी।
    4 पांडे अगर नईदुनिया के पुराने लोगों को साथ लेकर चलता तो आज ये हालत नहीं होती। लगातार घाटे में जा रहे पेपर को बचाने के लिए फिर से किसी समझदार संपादक की जरुरत है। पांडे जैसे किसी नासमझ और गधे की नहीं।

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  • आनंद पांडे के नाम पर इतना बवाल क्यों? मालिक को तकलीफ होगी तो वो हटा देगा पर विघ्नसंतोषी बैचेन हो गए हैं। अब बात कह रहे हैं कि अखबार की साख घट गई। घाटा हो रहा है। पुरानों को साथ नहीं लिया। तो यह भी बता दीजिए जनाब की पुराने लोगो के रहते अखबार बिका क्यों? इतना सामर्थ्य था तो नबंर वन बना देते। इसमें कोई शक नहीं कि नईदुनिया अब नए तेवर में है, और अखबार को अब और गंभीरता से पढ़ा जा रहा है। ये विधवा विलाप करने वाले लोग वो हैं जिन्हें कि लापरवाही, आलस व घमंड के चलते जाना पड़ा है।

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  • निष्पक्ष नाम रख कर क्यों पांडे (पोन्गा पंडित) की गा…. में घुस रहे हो मियां। अगर तुम्हारे इस पान्डे में इतने तेवर होते तो वो अखबार में तुम्हारे जैसे चमचों को लेकर नहीं घुसता। नामर्द और फट्टू ही ऐसा कर्म करते हैं। बेटा तुम्हे नज़र नहीं आएगा कि अखबार की साख की किस तरह से रोज़ मैया हो रही है। मालिक को तो जल्द मेरे बच्चे नज़र आ ही जाएगा, लेकिन तब तक देर न हो जाए इसलिए ये विलाप हो रहा है बेटा। और सुन मालिक ने जब अखबार खरीदा था तब से ही वो अपने कर्मियों को असेट मानता रहा है। नासमझ क्या कोई कंपनी इसलिए बिक जाती है क्या कि लोग नाकारा होते हैं।बेटा उनमें से लगभग सभी देशके नंबर 1 अखबार में गए हैं, तो क्या अब व्ओ बिक जाएगा। गधे ऐसा नहीं होता। यह विधवा विलाप नहीं बेटा हर एक की चिन्ता है कि तू और तेरा बॉस तो साले भाग जायेन्गे पैसा कूट कर, लेकिन हार का ठीकरा तेरा जैसा कोई चू… आकर फिर नीव के पत्थर पर ही फोड़ेगा।
    पांण्डे तो भास्कर से इतना डर गया है कि मीटिंग तो क्या हर कहीं बस यह कहता नज़र आता है कि देखना कल पिटाई ना हो जाए। अब ऐसे लीडर से कौन सी टीम बूस्ट होगी। नकली हीरा ही ज्यादा चमकता है। अब मालिक समझ चूका है बेटा और जल्द लात पड़ेगी वो भी गा… पर ये तय है। और हाँ पांण्डे को भड़ास की इतनी दहशत है इन दिनों कि जब भी किसी को चमकना हो ये तो बोल ही देता है कि जाओ लिख देना भड़ास पर या व्हाट्स अप पर। मरेगा रे बेटा तू और तेरा पांण्डे। जय हिन्द

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