मध्यप्रदेश के सतना में युवा पत्रकार कमलेश चौबे और भाजपा सांसद गणेश सिंह के बीच ठन गई है. यहां सांसद गणेश ने पत्रकार कमलेश चौबे के खिलाफ चुनाव में अपने खिलाफ दुष्प्रचार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया है. सांसद गणेश सिंह का आरोप है कि कमलेश चौबे ने सोशल मीडिया में उनके खिलाफ लगातार आर्टिकल लिखे जिनमें उन्हें भ्रस्टाचारी और जातिवादी कहा गया. इससे उनका चुनाव प्रभावित हुआ.
गणेश सिंह ने ये मुकदमा भाजपा के जिला प्रभारी रमाकांत गौतम के मार्फ़त दर्ज कराया. इसके बाद पत्रकार कमलेश चौबे ने सांसद गणेश सिंह के खिलाफ चल रहे शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले कों हवा दे दी है. सांसद गणेश सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जिला पंचायत सदस्य के पद पर रहते हुए दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया और अपात्रों को नियुक्ति दिलवाई. वर्ष 1998 में जून से सितंबर के बीच शिक्षा कर्मी वर्ग-एक व दो के कुल 343 पदों पर चयन-प्रक्रिया हुई.
कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था कि गणेश सिंह ने लोक सेवक पद पर रहते हुए अवैध व कूटरचित दस्तावेजों के जरिए आपराधिक षड्यंत्र के तहत शिक्षा कर्मियों का चयन किया. इतना ही नहीं उन्होंने शासकीय अधिकारियों मिलीभगत कर एससी, एसटी व ओबीसी के लिए आरक्षित पदों पर अनारक्षित उम्मीदवारों को नियुक्ति दिलवाई.
विशेष कोर्ट ने 2004 में गणेश सिंह पर आरोप तय किए थे।लेकिन आज तक इस केस में फैसला नहीं आया. कमलेश चौबे जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में है कि सैकड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के आरोपी गणेश सिंह के मामले का फैसला दो दशक से लंबित क्यों है. शिक्षकर्मी भर्ती काण्ड से जुड़े दूसरे मामलों के फैसले आ गए तो गणेश सिंह के मामले में देरी क्यों?
आपको बता दें कि कमलेश चौबे का कुछ साल पहले सतना से जिलाबदर कर दिया गया था. जिसके बाद वो भोपाल शिफ्ट हो गए. उनके जिलाबदर के पीछे भी संसद गणेश सिंह का हाथ बताया जा रहा.




