प्रशांत टंडन-
स्टॉक मार्केट लुढ़क रहा है और डॉलर रुपये के मुकाबले नई उंचाई पर – ये दोनों बता रहे हैं अर्थव्यवस्था के आने वाले दिन कितने चुनौतियों भरे होने वाले हैं. अप्रैल में जब अमेरिका नए टैरिफ लागू करेगा तो स्थिति क्या होगी. एनर्जी सिक्यूरिटी की हालत भी चिंता जनक है. रिलायंस ने रूस से 5 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल आयात करने की डील की थी दिसंबर 2024 में जो जनवरी से लागू होनी थी. अमेरिका ने रूस की उन तेलवाहक कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया जिनके माध्यम से तेल आना था. विदेश सेवा से आयातित पेट्रोलियम और विदेश मंत्री हरदीप पुरी और एस जयशंकर पूरी तरह से विफल हुए हैं.

मनोज अभिज्ञान-
आज फरवरी 2025 का आखिरी दिन है, और शेयर बाजार का हाल बेहाल है। बाज़ार ज़मीन पर औंधे मुंह गिरा पड़ा है… निवेशकों की संपत्तियाँ पिघल रही हैं… मार्केट पूरी तरह हिल चुका है। एक महीना पहले ही इस गिरावट के बारे में आगाह किया था जो अब हकीकत बन कर सामने खड़ा है।

मुकेश कुमार-
शेयर बाज़ार में हाहाकार मचा हुआ है। सेंसेक्स 1400 अंक गिर गया और निफ्टी 400। शेयर बाज़ार के उस्ताद बताएंगे करेक्शन हो रहा है। असलियत ये है कि गुब्बारा फूट रहा है। अभी भी वे यही गाएंगे कि फंडामेंटल स्ट्रांग हैं। सचाई ये है कि अर्थव्यवस्था ढह रही है। वे सरकार को बचाने के लिए तर्क गढ़ रहे हैं जबकि जो कुछ हो रहा है सरकार की वज़ह से ही।
अर्थव्यवस्था को गुलाबी दिखाने और कुछ उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए इसे फुलाया जा रहा था, मगर फुलाते-फुलाते वह फूट गया। निवेशक भारत छोड़कर चीन, अमेरिका जा रहे हैं। यहाँ तक कि भारतीय निवेशक भी विदेशों का रुख़ कर रहे हैं। अभी टैरिफ भी आने वाले हैं। ट्रम्प दबाव बढ़ाते जा रहे हैं।
यूक्रेन का युद्ध रुक गया तो सस्ता तेल मिलना भी बंद हो जाएगा।
सच बात तो ये है कि अर्थव्यवस्था भारी संकट में फँस चुकी है और मोदी सरकार के पास इससे निकलने की कोई रणनीति नहीं है।
मोदी की नाकामी की सज़ा हम सबको भुगतनी होगी। बड़ी संख्या में छंटनी होगी, रोज़गार के अवसर और कम हो जाएंगे। विकास पर ब्रेक लग जाएगा और महंगाई आसमान छुएगी। यानी कमर की पेटी बांध लीजिए। हवाई जहाज टर्बुलेंस में फँस गया है।
सुरेश चिपलूनकर-
अभी डेढ़-दो महीने पहले तक शेयर मार्केट के (तथाकथित) विशेषज्ञ बता रहे थे कि अब भारत का शेयर मार्केट इतना शक्तिशाली हो चुका है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिक्री से इसे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने वाला…
भारत को अब FII पर अधिक निर्भर रहने की जरूरत नहीं है… क्योंकि अब भारत के स्थानीय निवेशक (DII) इतने मजबूत हो चुके हैं कि वे मार्केट को गिरने से बचा लेंगे… भारत के DII और म्युचुअल फंड वाले लोग सब संभाल लेंगे… FII की इतनी औकात नहीं है कि वह भारत के मार्केट को बहुत अधिक गिरा सके…अब वो विशेषज्ञ लोग अपना मुंह छुपाए घूम रहे हैं… 😉
अब सो कॉल्ड विशेषज्ञ लोग मार्केट की वर्तमान गिरावट को FII के माथे पर थोप रहे हैं… अब कहाँ हैं तुम्हारे DII ?? आओ न बचाने…


