Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

शेयर मार्केट में न गुरु काम आते हैं, न गारंटी; क्योंकि ट्रेडिंग सिखाई नहीं, सिर्फ सीखी जा सकती है!

मनोज अभिज्ञान-

यह बात सुनने में भले ही अप्रिय लगे, लेकिन सच यही है कि शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कोई आपको ठीक-ठीक सिखा ही नहीं सकता। सिखाने के नाम पर बहुत कुछ बताया जा सकता है- चार्ट, इंडिकेटर, पैटर्न, रणनीतियां, लेकिन अंततः पैसा आप तभी बनाते हैं जब फैसले आप खुद लेते हैं। अगर कोई व्यक्ति सचमुच ऐसा फॉर्मूला जानता होता जिससे बाजार को लगातार हराया जा सके, तो वह उसे बेचने के बजाय चुपचाप खुद ही अमीर हो जाता। बाजार में निर्णायक होती है आपकी देखने की क्षमता, आपका नजरिया और अनिश्चितता के साथ जी पाने का साहस।

शेयर मार्केट जीवित व्यवस्था है, जिसमें डर, लालच, अफवाह, उम्मीद, राजनीति, तकनीक और इतिहास सब एक साथ काम करते हैं। यहां जो चीज कल काम कर रही थी, जरूरी नहीं कि वह आज भी काम करे। इसलिए ट्रेडिंग सीखना दरअसल खुद को सीखना है। आप खबरों को कैसे पढ़ते हैं, आंकड़ों को कैसे समझते हैं, और सबसे अहम, नुकसान के समय खुद को कैसे संभालते हैं, यही असली शिक्षा है।

बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी देशों में एक प्रयोग किया गया। अखबारों और पत्रिकाओं ने यह देखना चाहा कि क्या पेशेवर फंड मैनेजर और बाजार विशेषज्ञ वास्तव में आम लोगों से बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। इसी संदर्भ में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कई वर्षों तक एक मशहूर प्रयोग किया। इसमें विशेषज्ञों से कहा गया कि वे कुछ शेयर चुनें, और उसी समय बच्चों द्वारा यादृच्छिक तरीके से कुछ शेयर चुने गए।

परिणाम चौंकाने वाले थे। कई बार ऐसा हुआ कि यादृच्छिक चयन ने विशेषज्ञों के पोर्टफोलियो से बेहतर रिटर्न दिया। कुछ वर्षों में विशेषज्ञ आगे रहे, कुछ वर्षों में पीछे। लेकिन लंबी अवधि में यह साफ दिखा कि विशेषज्ञों की श्रेष्ठता कोई स्थायी सत्य नहीं है। यह प्रयोग बाद में अकादमिक जगत में भी चर्चित हुआ और इससे जुड़े कई शोध पत्र प्रकाशित हुए।

इस तरह के प्रयोगों का मकसद यह साबित करना नहीं था कि विशेषज्ञ बेकार हैं, बल्कि यह दिखाना था कि बाजार की जटिलता इतनी अधिक है कि मानव बुद्धि, चाहे वह कितनी भी प्रशिक्षित क्यों न हो, उसे पूरी तरह वश में नहीं कर सकती। विशेषज्ञ अपने ज्ञान के बोझ तले दबे होते हैं। उनके पास सूचनाओं की भरमार होती है, मॉडल होते हैं, अनुमान होते हैं। वे अक्सर उन्हीं सूचनाओं में उलझ जाते हैं और सरल संभावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरी ओर, बच्चों के यादृच्छिक चयन में कोई पूर्वाग्रह नहीं होता। वहां न डर होता है, न प्रतिष्ठा खोने का भय। वे किसी कथा में नहीं फंसते, वे बस चुनते हैं।

शेयर मार्केट में कथाएं बहुत ताकतवर होती हैं। कोई कंपनी भविष्य की कहानी बेचती है, कोई सेक्टर विकास की उम्मीद। विशेषज्ञ भी इन्हीं कथाओं के भीतर सोचते हैं। कभी-कभी वही कथा उन्हें अंधा कर देती है। जबकि यादृच्छिक चयन इन कथाओं से मुक्त होता है। यही कारण है कि कई बार उसका प्रदर्शन बेहतर दिखता है।

इसका मतलब यह है कि ज्ञान तभी उपयोगी है जब वह विनम्रता के साथ जुड़ा हो। बाजार आपको बार-बार यह याद दिलाता है कि आप सब कुछ नहीं जानते। जो ट्रेडर यह मान लेता है कि वह बाजार से ज्यादा होशियार है, वह जल्दी या देर से लेकिन कीमत चुकाता जरूर है।

स्पष्ट है कि ट्रेडिंग सिखाई नहीं जा सकती, बल्कि विकसित की जाती है। आप किसी को तैरना किताब पढ़कर नहीं सिखा सकते। पानी में उतरना ही पड़ेगा। वैसे ही बाजार में उतरना पड़ता है। नुकसान उठाना पड़ता है। गलत फैसले लेने पड़ते हैं। धीरे-धीरे व्यक्ति यह सीखता है कि कौन-सी गलती उसकी थी और कौन-सी बाजार की चाल।

शेयर मार्केट में बच्चों के बेहतर प्रदर्शन का उदाहरण हमें यह भी सिखाता है कि कभी-कभी सरलता, जिज्ञासा और खुलेपन में ताकत होती है। बच्चे भविष्य की प्रतिष्ठा, टीवी इंटरव्यू या निवेशकों के सवालों से नहीं डरते। वे बस नाम देखते हैं, शायद कोई परिचित ब्रांड चुन लेते हैं। यह चयन तर्कसंगत न सही, लेकिन पूर्वाग्रहों से मुक्त होता है।

इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां साधारण लोगों ने, बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, बाजार में असाधारण सफलता पाई। उन्होंने कोई रहस्यमय सूत्र नहीं खोजा था। उन्होंने बस धैर्य, अनुशासन और अपने अनुभव से सीखने की क्षमता विकसित की थी। दूसरी ओर, कई बड़े-बड़े विशेषज्ञ शानदार डिग्रियों और अनुभव के बावजूद औसत से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जो लोग ट्रेडिंग सिखाने का दावा करते हैं, उनमें से अधिकतर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कोर्स, सब्सक्रिप्शन और सलाह बेचकर बनाते हैं, न कि खुद ट्रेडिंग से। यह अपने आप में संकेत है। बाजार में स्थायी बढ़त इतनी दुर्लभ है कि अगर किसी के पास सच में जानकारी होती, तो वह उसे बाजार में ही भुनाता।

शेयर मार्केट आपको किसी और पर निर्भर रहने की इजाजत नहीं देता। यहां हर फैसला आपकी जिम्मेदारी है। कोई गुरु, कोई विशेषज्ञ, कोई किताब नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। यही वजह है कि यह बाजार एक तरह का दार्शनिक प्रशिक्षण भी है। यह आपको अनिश्चितता के साथ जीना सिखाता है, अपने अहंकार को पहचानना सिखाता है और यह स्वीकार करना सिखाता है कि नियंत्रण भ्रम है।

बच्चों और विशेषज्ञों वाले उस प्रयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि हमें यही याद दिलाती है कि बाजार लोकतांत्रिक है। यहां हर कोई बराबर है। यहां न उम्र का विशेषाधिकार है, न डिग्री का। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि आप कैसे सोचते हैं, कैसे सीखते हैं और अपनी सीमाओं को कितनी ईमानदारी से स्वीकार करते हैं।

शेयर मार्केट में सफलता कोई हस्तांतरित ज्ञान नहीं है। यह व्यक्तिगत यात्रा है। इसमें रास्ता कोई और नहीं दिखा सकता, बस कुछ संकेत दे सकता है। बाकी रास्ता आपको खुद तय करना होता है।

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन